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गरीबों को खराब गेहूं बांटने की तैयारी, अफसर जानकार भी मौन
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कोसली अनाज मंडी में भीगीं गेहूं की बोरियां। संवाद
- फोटो : Rewari
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कोसली मंडी में स्टॉक कर रखा गया खराब गेहूं राशन डिपो पर भेज कर गरीबों को वितरित करने की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों को इस समस्या के बारे में अवगत कराया गया, मगर उन्होंने इस पर चुप्पी साध रखी है। कोसली में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के वेयर हाउस में रखा गया गेहूं खराब है और उसमें कीड़े रेंग रहे हैं। इस गेहूं को गवर्नमेंट ऑफ हरियाणा लिखे बैगों में भरा जा रहा है। बैगों में भरा जा रहा गेहूं इंसान तो दूर जानवर भी खाना पसंद नहीं करेंगे, मगर उसे गरीबों में बांटने की तैयारी की जा रही है। एसडीएम को इस बारे में अवगत कराने के बाद भी समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया। कोसली मंडी में खाद्य आपूर्ति विभाग द्वारा इकट्ठा किया गया गेहूं न केवल कोसली बल्कि महेंद्रगढ़ जिले में भी गरीबों में वितरित करने के लिए भेजा जा रहा है।
तीन माह बाद भी नहीं आई जांच रिपोर्ट
राशन डिपो पर वितरित करने के लिए रखा गया खराब गेहूं का बैग चार माह पहले हुई बारिश में भीग गया था। इस पर उपायुक्त ने रेवाड़ी के एसडीएम से जांच करवाई थी। जांच हुए तीन महीने हो चुके हैं, मगर अभी तक रिपोर्ट नहीं आई है। सूत्रों की माने तो जांच में एसडीएम रेवाड़ी रविंद्र यादव ने साढ़े तीन हजार कट्टे गेहूं भीगने से खराब होने की बात कहते हुए उसे वितरित करने से मना कर दिया, लेकिन वही वही खराब गेहूं गरीबों को वितरण करने के लिए भेज दिया गया।
मनुष्य क्या पशुओं के खाने लायक नहीं गेहूं
समेत सिंह का कहना है कि हम गरीबों को ऐसा गेहूं दिया जा रहा है जिसे मनुष्य तो क्या जानवर भी नहीं खा सकते। सरकार एक तरफ हमें मुफ्त राशन देने की बात करती है और दूसरी तरफ अधिकारी ही सरकार व गरीबों को चूना लगा रहे हैं।
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सार्वजनिक करनी चाहिए जांच रिपोर्ट
महावीर का कहना है कि सबसे बड़ी बात तो यह है कि जब पहले भीगे गेहूं कि जांच जिला उपायुक्त ने करवाई तो उसमें कुछ निकलकर आया या नहीं यह सार्वजनिक करना चाहिए था। चार माह पहले बारिश में भीगने की वजह से खराब हुए गेहूं को गरीबों में वितरण करने का आदेश किसने दिया इसकी जांच होनी चाहिए।
जांच के बाद भी वितरण के लिए भेज दिया गेहूं
विकास कुमार ने कहा कि जांच के बाद भी भीगा गेहूं रेवाड़ी व महेंद्रगढ़ जिले के गरीब परिवारों को वितरण के लिए भेज दिया गया है। इस खराब गेहूं को एक टाइम इन अधिकारियों के परिवार को खिलाया जाना चाहिए, ताकि उनको भी पता चले कि खराब अनाज खाने से क्या होता है।
भीगे हुए कट्टों को भरा जाएगा दोबारा
इस बाबत खाद्य आपूर्ति विभाग के अधिकारी भारत का कहना है कि गेहूं के जो कट्टे भीग कर फट गए हैं उस गेहूं को दोबारा भरा जा रहा है। जब उनसे री पैकिंग करने के नियम के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया और चुप्पी साध ली।
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तीन माह बाद भी नहीं आई जांच रिपोर्ट
राशन डिपो पर वितरित करने के लिए रखा गया खराब गेहूं का बैग चार माह पहले हुई बारिश में भीग गया था। इस पर उपायुक्त ने रेवाड़ी के एसडीएम से जांच करवाई थी। जांच हुए तीन महीने हो चुके हैं, मगर अभी तक रिपोर्ट नहीं आई है। सूत्रों की माने तो जांच में एसडीएम रेवाड़ी रविंद्र यादव ने साढ़े तीन हजार कट्टे गेहूं भीगने से खराब होने की बात कहते हुए उसे वितरित करने से मना कर दिया, लेकिन वही वही खराब गेहूं गरीबों को वितरण करने के लिए भेज दिया गया।
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मनुष्य क्या पशुओं के खाने लायक नहीं गेहूं
समेत सिंह का कहना है कि हम गरीबों को ऐसा गेहूं दिया जा रहा है जिसे मनुष्य तो क्या जानवर भी नहीं खा सकते। सरकार एक तरफ हमें मुफ्त राशन देने की बात करती है और दूसरी तरफ अधिकारी ही सरकार व गरीबों को चूना लगा रहे हैं।
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सार्वजनिक करनी चाहिए जांच रिपोर्ट
महावीर का कहना है कि सबसे बड़ी बात तो यह है कि जब पहले भीगे गेहूं कि जांच जिला उपायुक्त ने करवाई तो उसमें कुछ निकलकर आया या नहीं यह सार्वजनिक करना चाहिए था। चार माह पहले बारिश में भीगने की वजह से खराब हुए गेहूं को गरीबों में वितरण करने का आदेश किसने दिया इसकी जांच होनी चाहिए।
जांच के बाद भी वितरण के लिए भेज दिया गेहूं
विकास कुमार ने कहा कि जांच के बाद भी भीगा गेहूं रेवाड़ी व महेंद्रगढ़ जिले के गरीब परिवारों को वितरण के लिए भेज दिया गया है। इस खराब गेहूं को एक टाइम इन अधिकारियों के परिवार को खिलाया जाना चाहिए, ताकि उनको भी पता चले कि खराब अनाज खाने से क्या होता है।
भीगे हुए कट्टों को भरा जाएगा दोबारा
इस बाबत खाद्य आपूर्ति विभाग के अधिकारी भारत का कहना है कि गेहूं के जो कट्टे भीग कर फट गए हैं उस गेहूं को दोबारा भरा जा रहा है। जब उनसे री पैकिंग करने के नियम के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया और चुप्पी साध ली।