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Rewari News: पानी की राशनिंग से अब मिलेगा छुटकारा, 50 करोड़ रुपये की लागत से एक वाटर टैंक बनेगा

Tue, 19 Dec 2023 11:36 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 19 Dec 2023 11:36 PM IST
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Now we will get relief from water rationing, a water tank will be built at a cost of Rs 50 crore.
रेवाड़ी। लंबे समय से चली आ रही पानी की राशनिंग से शहरवासियों को अब छुटकारा मिलने की उम्मीद जगी है। ऐसा इसलिए क्योंकि शहर से सटे गांव भगवानपुर की पंचायत ने जनस्वास्थ्य विभाग को 10 एकड़ जमीन देने का प्रस्ताव पास कर दिया है। इससे पहले गांव चांदावास में वाटर टैंक बनाने के लिए लंबे समय तक बात चली, लेकिन प्रक्रिया सफल नहीं हो पाई। उसके बाद गांव भगवानपुर में वाटर टैंक के लिए जमीन की मांग पंचायत से की गई। वहीं, अब जन स्वास्थ्य विभाग फाइल तैयार कर मुख्यालय मंजूरी के लिए भेजेगा।
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मुख्यालय से मंजूरी मिलते ही आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।वर्ष 2015 में शहर को ठीक जलापूर्ति करने के लिए अतिरिक्त वाटर टैंक निर्माण की घोषणा की गई थी। विभाग की ओर से उस वक्त करीब 50 करोड़ रुपये आवंटित कर किए गए थे, लेकिन जमीन ना मिलने से कार्य में बीच में अटका रहा। इस वक्त शहर सिंचाई के लिए ही नहीं पेयजल के लिए भी पूरी तरह जवाहर लाल नेहरू कैनाल से आने वाले यमुना के पानी पर निर्भर है। नहरी पानी का शोधन कर सप्लाई के लिए रेवाड़ी के कालका गांव में 5 वाटर टैंक व लिसाना में तीन वाटर टैंक बनाए गए हैं। मौजूदा समय में इन्हीं 8 वाटर टैंक से रेवाड़ी शहर की पौने तीन लाख से अधिक की आबादी को पेयजल आपूर्ति की जाती है। नहरी पानी का पूरी तरह से भंडारण ना हो पाने से रेवाड़ी शहर के लोगों को एक दिन छोड़कर एक दिन पेयजल की सप्लाई की जाती है।
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जिले को मिलता है महज 510 क्यूसेक पानी

पानीपत स्थित खूबडू से रेवाड़ी तक जवाहरलाल नेहरू कैनाल के माध्यम से पानी पहुंचता है। इस दौरान नहरी पानी को 18 बार लिफ्ट करना पड़ता है। रेवाड़ी में नहरी पानी की मात्रा करीब 770 क्यूसेक निर्धारित की गई है, लेकिन जिले को महज 510 क्यूसेक पानी ही मिल पाता है। वहीं दूसरी ओर नहरी पानी रेवाड़ी में महज 15 दिन ही चल पाता है।
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इस साल चांदावास में बनने की जगी थी उम्मीद

जनस्वास्थ्य विभाग की ओर से गांव चांदवास में करीब 50 करोड़ रुपये की लागत से एक वाटर टैंक का निर्माण कराया जाना था, लेकिन पंचायत की ओर से जमीन ही चिह्नित नहीं गई। वहीं, पिछली पंचायत की ओर से प्रस्ताव दिया गया था, नई पंचायत बनने के बाद प्रक्रिया अधर में लटक गई।

20 बूस्टिंग स्टेशनों से होती है पानी सप्लाई

शहर में नहरी परियोजना पर आधारित पेयजल सप्लाई है। यहां नहर के पानी को कालाका व लिसाना में बने जलघरों में एकत्रित किया जाता है। इसके बाद वहां से धारूहेड़ा चुंगी और नगर परिषद में बने टैंक के माध्यम से शहर की कॉलोनियों में पानी सप्लाई छोड़ा जाता है। शहर में पानी के लिए 20 जगह बूस्टिंग स्टेशन बनाए हुए हैं।


गांव भगवानपुर में नया टैंक बनाने के लिए जमीन देखी गई है। पंचायत ने 10 एकड़ जमीन देने का प्रस्ताव भी पास कर दिया है। अब टैंक बनाने के लिए पूरे दस्तावेज एकत्रित किए जाएंगे, जिसके बाद स्वीकृति के लिए फाइल को चंडीगढ़ भेजा जाएगा। वहां से स्वीकृति मिलते ही टैंक बनाने की प्रक्रिया सिरे चढ़ पाएगी।
-विनय चौहान, एक्सईएन, जनस्वास्थ्य विभाग रेवाड़ी।
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