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राष्ट्रीय लोक अदालत 14 को : सीजेएम
Sat, 31 Aug 2024 11:56 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sat, 31 Aug 2024 11:56 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाडी। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण एवं हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से 14 सितंबर को रेवाड़ी स्थित न्यायिक परिसर सहित बावल व कोसली में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। परिवादी राष्ट्रीय लोक अदालत में आपसी सुलह व समझौते के आधार पर स्वयं या अपने अधिवक्ता के माध्यम से केस का निपटारा करा सकते हैं।
सीजेएम एवं जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण के सचिव अमित वर्मा ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में बैंक लोन से संबंधित मामले, मोटर एक्सीडेंट, एनआई एक्ट, फौजदारी, रेवेन्यू, वैवाहिक विवाद का निपटारा किया जाएगा। बताया कि न्यायालय में लंबित मामलों को परस्पर सहयोग व सौहार्दपूर्ण माध्यम से निपटाने के लिए राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाता है। उन्होंने बताया कि यदि किसी व्यक्ति का कोई मामला न्यायालय में लंबित है तो वह राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से उसका निस्तारण करा सकता है। उन्होंने बताया कि लोक अदालत में दोनों पक्षों की आपसी सहमति व राजीनामे से सौहार्दपूर्ण वातावरण में पक्षकारों की रजामंदी से विवाद निपटाया जाता है। इससे शीघ्र व सुलभ न्याय, कहीं कोई अपील नहीं, अंतिम रूप से निपटारा, समय की बचत जैसे लाभ मिलते हैं।
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रेवाडी। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण एवं हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से 14 सितंबर को रेवाड़ी स्थित न्यायिक परिसर सहित बावल व कोसली में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। परिवादी राष्ट्रीय लोक अदालत में आपसी सुलह व समझौते के आधार पर स्वयं या अपने अधिवक्ता के माध्यम से केस का निपटारा करा सकते हैं।
सीजेएम एवं जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण के सचिव अमित वर्मा ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में बैंक लोन से संबंधित मामले, मोटर एक्सीडेंट, एनआई एक्ट, फौजदारी, रेवेन्यू, वैवाहिक विवाद का निपटारा किया जाएगा। बताया कि न्यायालय में लंबित मामलों को परस्पर सहयोग व सौहार्दपूर्ण माध्यम से निपटाने के लिए राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाता है। उन्होंने बताया कि यदि किसी व्यक्ति का कोई मामला न्यायालय में लंबित है तो वह राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से उसका निस्तारण करा सकता है। उन्होंने बताया कि लोक अदालत में दोनों पक्षों की आपसी सहमति व राजीनामे से सौहार्दपूर्ण वातावरण में पक्षकारों की रजामंदी से विवाद निपटाया जाता है। इससे शीघ्र व सुलभ न्याय, कहीं कोई अपील नहीं, अंतिम रूप से निपटारा, समय की बचत जैसे लाभ मिलते हैं।
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