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नप और पीएचईडी की खींचतान में अटका सीवर लाइन बदलने का काम

Wed, 08 Jan 2020 12:30 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 08 Jan 2020 12:30 AM IST
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नगर परिषद व जन स्वास्थ्य विभाग (पीएचईडी) के अधिकारियों के बीच तालमेल के अभाव कहें या खींचतान शहर के 10 स्थानों पर करीब तीन किमी. लंबी पुरानी सीवर लाइन बदलने का काम अटका हुआ है। इसके चलते शहर के बीच हर रोज सीवर ओवरफ्लो की समस्या रहती है। हालांकि अमृत योजना के तहत शहर की सीवर लाईन दुरुस्त करने के लिए नगर परिषद के पास करीब 35 करोड़ रुपये का बजट मौजूद है। बावजूद इसके काम अटके हुए हैं। जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि एस्टीमेट बनाकर पास होने के लिए विभाग के पास भेजे जाते हैं तो कार्यों को अमृत योजना के तहत करवाने का हवाला देकर एस्टीमेट वापस भेज दिए जाते हैं। जब इसके लिए नगर परिषद को पत्र लिखा जाता है तो वहां से शहर की बाहरी कॉलोनियों में काम कराने की बात कही जाती है। ऐसे में बीते करीब डेढ़ साल से मामला पटरी पर नहीं आ सका है।
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शांति नगर सहित धारूहेड़ा चुंगी पर हालात एक जैसे
शहर में सीवर व पेयजल की व्यवस्था का जिम्मा जन स्वास्थ्य विभाग के पास है। लेकिन अमृत योजना के तहत शहर की सीवर लाइन को दुरुस्त कराने की राशि नगर परिषद को दी गई थी। मूल विभाग से एस्टीमेट पास नहीं होने के बाद पीएचईडी अधिकारियों की ओर से कायस्थवाड़ा मोहल्ला में करीब 50 फुट, नई बस्ती जीवली बाजार से रोशन डेयरी के सामने भोला की चक्की के पास 280 फुट, नित्यानंद वाली गली 300 फुट, भजन का बाग मीरावाली गली 440 फुट, नसियाजी रोड स्थित शांति नगर गली नंबर एक से चार में 1660 फुट, धारूहेड़ा चुंगी से शनि मंदिर के पास 360 फुट, नई आबादी गली नंबर-1 में 620 फुट व हरी कीर्तन मंदिर ठठेरा मोहल्ला में 78 फुट पुुरानी सीवर लाइन को बदलने के लिए नप को पत्र लिखा गया। लेकिन यहां से कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिल रहा है।
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50 साल पुरानी है शहर की सीवर लाइन
जानकारी के अनुसार पुराने शहर में करीब 50 साल पहले ईंटों से 6 इंच की सीवर लाइन डाली गई थी। ईंट पुरानी होने के चलते गिर चुकी है, ऐसे में जगह-जगह से सीवर लाइन रुकी हुई है। शिकायत के बाद कुछ दिनों तक सीवर की समस्या ठीक रहती है, लेकिन बाद में पहले जैसी ओवरफ्लो की समस्या बढ़ जाती है। वर्ष 2015 में शहर की पुरानी सीवर लाइन को बदलने का प्रोजेक्ट तैयार किया गया था, लेकिन बाद में अमृत योजना आने के बाद मामला लटक गया।
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