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जहरीला पदार्थ निगलने से हुई थी भगवान की मौत
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रेवाड़ी। गढ़ी बोलनी रोड स्थित एक सोसायटी में गुरुग्राम के गांव टीकरी के रहने वाले भगवान सिंह की मार्च में हुई मौत सामान्य नहीं थी। उसकी मौत जहरीला पदार्थ निगलने से हुई थी। लैब से विसरा रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारणों से पर्दा उठा है। मृतक के भाई ने तीन महिलाओं सहित चार लोगों पर भगवान सिंह को जहर देकर हत्या करने का आरोप लगाया है। साथ ही कसौला थाना में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में करोड़ों रुपये की जमीन की वसीयत में हेराफेरी करने का भी आरोप लगाया गया है।
पुलिस के अनुसार गांव टीकरी के रहने वाले भगवान सिंह यहां की एक सोसायटी स्थित फ्लैट में रहते थे। इसी वर्ष सात मार्च को संदिग्ध परिस्थितियों में भगवान सिंह की मौत हो गई थी। फ्लैट में कुछ और लोग भी उनके साथ रहते थे। भगवान सिंह के साथ रहने वालों व परिजनों के बीच शव लेने को लेकर भी काफी विवाद हुआ था। उस समय पुलिस ने भगवान सिंह के परिजनों के आग्रह पर शव का पोस्टमार्टम कराया था और शव परिजनों को ही सौंपा था।
लैब से आई विसरा रिपोर्ट में पता लगा कि भगवान सिंह की मौत का कारण जहर था। उनके भाई गांव टीकरी के रहने वाले बीर सिंह ने अपनी शिकायत में कहा है कि कोसली की रहने वाली राजबाला के अतिरिक्त सुनीता, रामा व बलजीत सोसायटी में भगवान सिंह के साथ ही रहते थे। कैंसर के कारण भगवान सिंह की हालत नाजुक थी और बिस्तर पर ही पड़े रहते थे। इस हालत में वह स्वयं जहर नहीं ला सकते थे। उनके साथ रह रहे चारों आरोपियों ने ही भगवान सिंह को जहरीला पदार्थ खिलाया था। आरोपियों ने डॉक्टर, पुलिस व परिजनों को मौत के कारण की झूठी जानकारी दी। भगवान सिंह की जान बचाने का भी कोई प्रयास नहीं किया और मौत होने के बाद अस्पताल लेकर गए। बाद में आरोपियों ने भगवान सिंह के शव पर भी अपना दावा कर दिया था ताकि बिना कानूनी कार्रवाई के अंतिम संस्कार कर कार्रवाई से बच सके। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया था।
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शिकायत में कहा गया है कि राजबाला व अन्य लोगों ने भगवान सिंह से करोड़ों रुपये का आर्थिक लाभ लिया। इस संबंध में दीवानी व आपराधिक मामले भी लंबित हैं। आरोपियों ने भगवान सिंह की 50 करोड़ से अधिक की वसीयत में भी हेराफेरी की थी। मौत के बाद राजबाला ने भगवान सिंह की 16 लाख रुपये की बीमा पोलिसी का भी लाभ ले लिया। कसौला थाना पुलिस ने बीर सिंह की शिकायत पर आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की है।
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पुलिस के अनुसार गांव टीकरी के रहने वाले भगवान सिंह यहां की एक सोसायटी स्थित फ्लैट में रहते थे। इसी वर्ष सात मार्च को संदिग्ध परिस्थितियों में भगवान सिंह की मौत हो गई थी। फ्लैट में कुछ और लोग भी उनके साथ रहते थे। भगवान सिंह के साथ रहने वालों व परिजनों के बीच शव लेने को लेकर भी काफी विवाद हुआ था। उस समय पुलिस ने भगवान सिंह के परिजनों के आग्रह पर शव का पोस्टमार्टम कराया था और शव परिजनों को ही सौंपा था।
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लैब से आई विसरा रिपोर्ट में पता लगा कि भगवान सिंह की मौत का कारण जहर था। उनके भाई गांव टीकरी के रहने वाले बीर सिंह ने अपनी शिकायत में कहा है कि कोसली की रहने वाली राजबाला के अतिरिक्त सुनीता, रामा व बलजीत सोसायटी में भगवान सिंह के साथ ही रहते थे। कैंसर के कारण भगवान सिंह की हालत नाजुक थी और बिस्तर पर ही पड़े रहते थे। इस हालत में वह स्वयं जहर नहीं ला सकते थे। उनके साथ रह रहे चारों आरोपियों ने ही भगवान सिंह को जहरीला पदार्थ खिलाया था। आरोपियों ने डॉक्टर, पुलिस व परिजनों को मौत के कारण की झूठी जानकारी दी। भगवान सिंह की जान बचाने का भी कोई प्रयास नहीं किया और मौत होने के बाद अस्पताल लेकर गए। बाद में आरोपियों ने भगवान सिंह के शव पर भी अपना दावा कर दिया था ताकि बिना कानूनी कार्रवाई के अंतिम संस्कार कर कार्रवाई से बच सके। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया था।
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शिकायत में कहा गया है कि राजबाला व अन्य लोगों ने भगवान सिंह से करोड़ों रुपये का आर्थिक लाभ लिया। इस संबंध में दीवानी व आपराधिक मामले भी लंबित हैं। आरोपियों ने भगवान सिंह की 50 करोड़ से अधिक की वसीयत में भी हेराफेरी की थी। मौत के बाद राजबाला ने भगवान सिंह की 16 लाख रुपये की बीमा पोलिसी का भी लाभ ले लिया। कसौला थाना पुलिस ने बीर सिंह की शिकायत पर आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की है।