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अहीर कॉलेज मामलाः जमीन विक्रेताओं पर लगाया असल मालिक न होने का आरोप

Wed, 22 Sep 2021 12:11 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 22 Sep 2021 12:11 AM IST
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Ahir College case: Accused of not being the real owner of land vendors
अहीर कॉलेज की जमीन खरीद को लेकर घोटाले का आरोप लगाते पूर्व मंत्री कैप्टन अजय सिंह यादव - फोटो : rewadi
अहीर कॉलेज भूमि घोटाले का विवाद बढ़ता जा रहा है। पूर्व मंत्री कैप्टन अजय सिंह यादव व केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह के समर्थक एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं।
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मंगलवार को पूर्व मंत्री कैप्टेन अजय सिंह यादव ने अपने निवास स्थान पर प्रेसवार्ता कर जमीन विक्रेताओं पर जमीन के असली मालिक नहीं होने का आरोप लगाते हुए कहा कि जमीन विक्रेताओं के खिलाफ कोर्ट में दर्जनों मुकदमे चल रहे हैं। रेवाड़ी के पूर्व आयुक्त टीएल सत्यप्रकाश ने 2009 में एफआईआर दर्ज करने तक के आदेश भी दिए थे। उनका कहना है कि रजिस्ट्री में अनियमितता के चलते अहीर एजुकेशन बोर्ड से अहीर एजुकेशन प्राइवेट सोसासटी बना ली गई। रजिस्ट्री में जो प्रॉपर्टी आईडी लिखी हुई है उसमें सिर्फ 4805 गज जमीन दिखाई गई थी, जबकि रजिस्ट्री 105 कनाल की हुई है। रजिस्ट्री के अनुसार भूमि का जो पट्टा चढ़ा हुआ है वह 1965 का है और इनके अधिवक्ता उसको 1935 का बता रहे हैं, जबकि उन्हें जो जानकारी मिली है उसके अनुसार वह 1928 से 2018 तक था।
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पूर्व मंत्री ने बताया कि 6 अप्रैल 1980 को अहीर एजुकेशन बोर्ड को डिसॉल्व करके उसको अहीर एजुकेशन सोसायटी बना दिया गया था, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. राव बिरेंद्र सिंह का नाम शामिल था। सभी लोगों को किस आधार पर निकाल दिया गया, इसका केंद्रीय मंत्री के पास कोई जवाब नहीं है। अपने चहेते लोगों को ही अहीर एजुकेशन सोसायटी में शामिल किया गया है। सोसायटी में सैकड़ों आजीवन सदस्य थे उन सभी को निकाल दिया गया है।
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कैप्टन ने कहा कि 1944 से लेकर 1980 तक के सदस्यों की लिस्ट को सार्वजनिक करना चाहिए, ताकि लोगों के सामने सच्चाई आ सके। उन्होंने कहा कि यह निजी संस्था होने के बाद भी यूजीसी से ग्रांट ली जा रही है। सरकार से वेतन भी लिया जा रहा है। इस सोसायटी के चेयरमैन राव इंद्रजीत सिंह हैं, इसलिए सामने आकर जनता के सभी सवालों के जवाब देने चाहिए, न कि अपने समर्थकों को आगे करना चाहिए। कैप्टन अजय सिंह यादव ने कहा कि अहीर कॉलेज को समाज के लोगों ने मिलकर बनाया था। उन लोगों के नाम के पत्थर भी हटा दिए गए हैं। जिन लोगों ने मालिक बनकर जमीन को बेचा है। उनको एयू खान एडीजे हिसार द्वारा वर्ष 1938 में ही जमीन के असल मालिक रहे स्व लाला मक्खन लाल का वंशज नहीं माना गया था। उसके बाद इन्होंने किसी अदालत में दोबारा से याचिका भी नहीं डाली। अब किस आधार पर जमीन को बेच दिया। वहीं 200 करोड़ रुपये की जमीन को महज डेढ़ करोड़ रुपये में खरीदकर बड़ा जमीन घोटाला किया है। इससे सरकारी खजाने को करोड़ों का नुकसान हुआ है। जमीन विक्रेताओं के खिलाफ कोर्ट में दर्जनों मुकदमे चल रहे हैं। रेवाड़ी के पूर्व आयुक्त टीएल सत्यप्रकाश ने 2009 में एफआईआर दर्ज करने तक के आदेश दिए थे।

जमीन की बाकायदा प्रॉपर्टी आईडी बनवाई गई है तथा 28 लाख रुपये म्यूनिसिपल टैक्स भी जमा किया गया है। पूर्व मंत्री ने लेकर पहले जमीन को लेकर विवादित बताया था। उसको जवाब उन्हें मिल गया तब नया सवाल निकाल रहे हैं। जमीन खरीद पूरी कानूनी प्रक्रिया के तहत हुई है। -सचिन मलिक, कानूनी सलाहकार कॉलेज सोसायटी।
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