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घर और बाहर दोनों की जिम्मेदारी बखूबी निभा रहीं अधिकारी माताएं
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जिले की महिला अधिकारियों के लिए कोरोना संक्रमण के इस दौर में परिवार और समाज की जिम्मेदारी को निभाना आसान नहीं है, लेकिन यह उनकी हिम्मत और जज्बा ही है कि वे इसे बखूबी निभा रहीं हैं। अपने परिवार और बच्चों के साथ ही कोरोना संक्रमण के दौरान सरकार की ओर से दी गई ड्यूटी को पूरी ईमानदारी से अंजाम दे रहीं हैं।
मेडिकल विद्यार्थी बेटा और बेटी संक्रमण से बचने के लिए कहते हैं : इंस्पेक्टर सुनीता
पानीपत में सेक्टर 13-17 थाने की प्रभारी इंस्पेक्टर सुनीता पर इस वक्त अपने थानाक्षेत्र में लॉकडाउन के नियमों का पालन कराने की जिम्मेदारी है। बेटा वत्सल और बेटी नमीषा एमबीबीएस के विद्यार्थी हैं और कोरोना काल में संक्रमितों के इलाज मेें बेटा गुरुग्राम और बेटी फरीदाबाद के अस्पतालों में सहयोग कर रही हैं। कॉल कर बेटा और बेटी संक्रमण से बचाव के बारे में बताते रहते हैं। वहीं बेटा और बेटी ने कहा कि उन्हें अपनी मां पर गर्व है, जो दिन रात कोरोना काल में अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं। इंस्पेक्टर सुनीता ने बताया कि कोविड को देखते हुए वह बच्चों से दूर से ही मिलती हैं। सुबह आठ से नौ बजे के बीच थाने में आ जाती हैं। नाश्ता, लंच और डिनर थाने में ही होता है। मातृ दिवस पर माताओं से अपील है कि परिवार के लोगों को घर से बाहर न जाने दें, लॉकडाउन का पालन करें। सभी के सहयोग से ही कोरोना को हराया जा सकता है।
संक्रमण से बचाने के लिए बेटे से अलग रह रहीं हूं : इंस्पेक्टर किरण नैन
सोनीपत के कामी गांव की रहने वाली इंस्पेक्टर किरण नैन महिला थाने की प्रभारी हैं। उनके पिता सूबेसिंह आर्मी से रिटायर्ड हैं और मां बिमला देवी गृहिणी हैं। संक्रमण से बचाव के लिए बेटे वेदांग को माता-पिता के पास रहने के भेजा है। उन्होंने बताया कि 2020 में मातृ दिवस पर बेटे का जन्मदिन था, लेकिन कोविड-19 के दौरान वह ड्यूटी पर थीं और वीडियो कॉल पर बेटे को बधाई दी थी। इस बार फिर से हालात खराब हैैं। उनके माता-पिता ने कहा कि उन्हें अपनी बेटी पर गर्व है। वह पुलिस की ड्यूटी के साथ ही परिवार की जिम्मेदारी भी निभा रही हैं। कोरोना काल में पुलिस की जिम्मेदारी बढ़ गई है।
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टाइम टेबल बनाकर ड्यूटी के साथ बच्चों को संभाल रही हूं : रितू राठी
जिला बाल कल्याण अधिकारी रितू राठी ने बताया कि बड़ी बेटी आइना दस और छोटा बेटा अभि आठ साल का है। बच्चे अभी छोटे हैं। संक्रमण के इस दौर में जहां ड्यूटी निभानी है वहीं बच्चों को भी संभालना है। दोनों जिम्मेदारियों को निभाने के लिए एक टाइम टेबल बनाया। इस दौरान समय का प्रबंधन सभी माताओं के लिए जरूरी भी है। बेटी आइना और बेटे अभी ने कहा कि मां हर समय मोटिवेट करती हैं, उनका ध्यान रखती हैं।
अपने बच्चों के साथ ही पीड़ित बच्चों की सुरक्षा और न्याय दिलाने की भी मेरी जिम्मेदारी : पूजा मलिक
चाइल्डलाइन कोऑर्डिनेटर पूजा मलिक ने बताया कि उनकी बड़ी बेटी रक्षिता पांच और छोटा बेटा चित्रांश दो साल का है। इस पद पर रहते हुए, किसी भी समय घर से बाहर जाना पड़ता है। वह 24 घंटे ड्यूटी पर रहती हैं। पति संदीप की अंबाला में आयुर्वेद दवाओं की फैक्टरी है। वह ज्यादातर अंबाला में ही रहते हैं। ऐसे में इमरजेंसी केस आने पर बच्चों को सास-ससुर के पास छोड़कर जाती हैं। ड्यूटी पर रहकर ही कॉल कर उनके स्वास्थ्य के बारे में जानती रहती हैं। उन्होंने बताया कि अपने बच्चों के साथ ही दूसरे पीड़ित बच्चों की सुरक्षा करना भी उनकी जिम्मेदारी है। जब भी घर जाती हैं तो सबसे पहले खुद को सैनिटाइज करती हैं। सास-ससुर ने कहा कि उन्हें बहू पर गर्व है, जो परिवार के साथ ही समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को भी बखूबी निभा रही हैं।
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मेडिकल विद्यार्थी बेटा और बेटी संक्रमण से बचने के लिए कहते हैं : इंस्पेक्टर सुनीता
पानीपत में सेक्टर 13-17 थाने की प्रभारी इंस्पेक्टर सुनीता पर इस वक्त अपने थानाक्षेत्र में लॉकडाउन के नियमों का पालन कराने की जिम्मेदारी है। बेटा वत्सल और बेटी नमीषा एमबीबीएस के विद्यार्थी हैं और कोरोना काल में संक्रमितों के इलाज मेें बेटा गुरुग्राम और बेटी फरीदाबाद के अस्पतालों में सहयोग कर रही हैं। कॉल कर बेटा और बेटी संक्रमण से बचाव के बारे में बताते रहते हैं। वहीं बेटा और बेटी ने कहा कि उन्हें अपनी मां पर गर्व है, जो दिन रात कोरोना काल में अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं। इंस्पेक्टर सुनीता ने बताया कि कोविड को देखते हुए वह बच्चों से दूर से ही मिलती हैं। सुबह आठ से नौ बजे के बीच थाने में आ जाती हैं। नाश्ता, लंच और डिनर थाने में ही होता है। मातृ दिवस पर माताओं से अपील है कि परिवार के लोगों को घर से बाहर न जाने दें, लॉकडाउन का पालन करें। सभी के सहयोग से ही कोरोना को हराया जा सकता है।
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संक्रमण से बचाने के लिए बेटे से अलग रह रहीं हूं : इंस्पेक्टर किरण नैन
सोनीपत के कामी गांव की रहने वाली इंस्पेक्टर किरण नैन महिला थाने की प्रभारी हैं। उनके पिता सूबेसिंह आर्मी से रिटायर्ड हैं और मां बिमला देवी गृहिणी हैं। संक्रमण से बचाव के लिए बेटे वेदांग को माता-पिता के पास रहने के भेजा है। उन्होंने बताया कि 2020 में मातृ दिवस पर बेटे का जन्मदिन था, लेकिन कोविड-19 के दौरान वह ड्यूटी पर थीं और वीडियो कॉल पर बेटे को बधाई दी थी। इस बार फिर से हालात खराब हैैं। उनके माता-पिता ने कहा कि उन्हें अपनी बेटी पर गर्व है। वह पुलिस की ड्यूटी के साथ ही परिवार की जिम्मेदारी भी निभा रही हैं। कोरोना काल में पुलिस की जिम्मेदारी बढ़ गई है।
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टाइम टेबल बनाकर ड्यूटी के साथ बच्चों को संभाल रही हूं : रितू राठी
जिला बाल कल्याण अधिकारी रितू राठी ने बताया कि बड़ी बेटी आइना दस और छोटा बेटा अभि आठ साल का है। बच्चे अभी छोटे हैं। संक्रमण के इस दौर में जहां ड्यूटी निभानी है वहीं बच्चों को भी संभालना है। दोनों जिम्मेदारियों को निभाने के लिए एक टाइम टेबल बनाया। इस दौरान समय का प्रबंधन सभी माताओं के लिए जरूरी भी है। बेटी आइना और बेटे अभी ने कहा कि मां हर समय मोटिवेट करती हैं, उनका ध्यान रखती हैं।
अपने बच्चों के साथ ही पीड़ित बच्चों की सुरक्षा और न्याय दिलाने की भी मेरी जिम्मेदारी : पूजा मलिक
चाइल्डलाइन कोऑर्डिनेटर पूजा मलिक ने बताया कि उनकी बड़ी बेटी रक्षिता पांच और छोटा बेटा चित्रांश दो साल का है। इस पद पर रहते हुए, किसी भी समय घर से बाहर जाना पड़ता है। वह 24 घंटे ड्यूटी पर रहती हैं। पति संदीप की अंबाला में आयुर्वेद दवाओं की फैक्टरी है। वह ज्यादातर अंबाला में ही रहते हैं। ऐसे में इमरजेंसी केस आने पर बच्चों को सास-ससुर के पास छोड़कर जाती हैं। ड्यूटी पर रहकर ही कॉल कर उनके स्वास्थ्य के बारे में जानती रहती हैं। उन्होंने बताया कि अपने बच्चों के साथ ही दूसरे पीड़ित बच्चों की सुरक्षा करना भी उनकी जिम्मेदारी है। जब भी घर जाती हैं तो सबसे पहले खुद को सैनिटाइज करती हैं। सास-ससुर ने कहा कि उन्हें बहू पर गर्व है, जो परिवार के साथ ही समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को भी बखूबी निभा रही हैं।