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Panipat News: डेयरी प्लॉटों का जिन्न 20 साल बाद फिर निकला बाहर, निगम 19 प्लॉटों की करेगा बोली
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पानीपत। नगर निगम बिंझौल में डेयरियों के खाली पड़े प्लाटों के मामले में 20 साल बाद कार्रवाई के लिए एक्शन में आ गया है। निगम यहां खाली 19 प्लाटों की बोली करेगा। ये प्लॉट 2003 में अलॉट करते समय खाली रह गए थे। इन पर आसपास के डेयरी संचालकों व अन्य लोगों ने कब्जा कर लिया था। उन्हें नोटिस तक भेजे जाएंगे। इनके अलावा अन्य विवादित 36 प्लाटों के कोर्ट केस या अन्य विवादों की अधिकारियों को स्टेटस रिपोर्ट दी जाएगी। निगम डेयरियों के प्लाटों पर पशुओं के लिए मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध कराएगा।
यह फैसला मंगलवार को पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में स्वच्छता समिति की बैठक में लिया गया। कमेटी की इस विषय पर एक महीने में तीसरी बार बैठक हुई है। बैठक में नगर निगम आयुक्त राहुल नरवाल व मेयर अवनीत कौर समेत पार्षद अनिल बजाज, बलराम मकौल, रविंद्र भाटिया आदि मौजूद रहे।
बिंझौल में शहर की डेयरियों को शिफ्ट करने के लिए 20 साल पहले 147 प्लाट आवंटित किए गए थे। इनमें से 56 प्लाटों पर ही डेयरी शिफ्ट हुई। 55 प्लाटों में अब भी गड़बड़झाला मिला। इनमें से 19 प्लॉट खाली और 36 का आवंटन रद्द हो चुका है। इन पर आसपास की डेयरी संचालकों ने इन पर कब्जा जमा लिया था। कमेटी की मानें तो अधिकतर डेयरियों के प्लाट आज भी रिक्त हैं। यहां मकान बना दिए गए हैं या फिर दूसरी गतिविधियां की जा रही है। इसको लेकर 10 मार्च को निगम की सफाई कमेटी की बैठक हुई। इसमें मेयर समेत निगम अधिकारियों और सफाई कमेटी के सदस्य शामिल हुए। 14 मार्च को फिर कमेटी की बैठक हुई। इसमें आयुक्त भी शामिल हुए। जिसमें इन प्लाटों का पुन: निरीक्षण करने का निर्णय लिया गया।
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सफाई कमेटी के अध्यक्ष संजीव दहिया ने बताया कि उस समय डेयरी के प्लाटों के आवंटन में भी फर्जीवाड़ा हुआ था, जिसकी जांच तत्कालीन आयुक्त ने एसडीएम से कराई थी। इसमें 36 प्लाॅट बिना सर्वे के ही डेयरियों को आवंटित पाए गए। इसके बाद इनकी अलॉटमेंट रद्द कर दी गई थी। इसके अलावा 19 प्लाटों की नीलामी नहीं हुई।
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यह फैसला मंगलवार को पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में स्वच्छता समिति की बैठक में लिया गया। कमेटी की इस विषय पर एक महीने में तीसरी बार बैठक हुई है। बैठक में नगर निगम आयुक्त राहुल नरवाल व मेयर अवनीत कौर समेत पार्षद अनिल बजाज, बलराम मकौल, रविंद्र भाटिया आदि मौजूद रहे।
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बिंझौल में शहर की डेयरियों को शिफ्ट करने के लिए 20 साल पहले 147 प्लाट आवंटित किए गए थे। इनमें से 56 प्लाटों पर ही डेयरी शिफ्ट हुई। 55 प्लाटों में अब भी गड़बड़झाला मिला। इनमें से 19 प्लॉट खाली और 36 का आवंटन रद्द हो चुका है। इन पर आसपास की डेयरी संचालकों ने इन पर कब्जा जमा लिया था। कमेटी की मानें तो अधिकतर डेयरियों के प्लाट आज भी रिक्त हैं। यहां मकान बना दिए गए हैं या फिर दूसरी गतिविधियां की जा रही है। इसको लेकर 10 मार्च को निगम की सफाई कमेटी की बैठक हुई। इसमें मेयर समेत निगम अधिकारियों और सफाई कमेटी के सदस्य शामिल हुए। 14 मार्च को फिर कमेटी की बैठक हुई। इसमें आयुक्त भी शामिल हुए। जिसमें इन प्लाटों का पुन: निरीक्षण करने का निर्णय लिया गया।
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सफाई कमेटी के अध्यक्ष संजीव दहिया ने बताया कि उस समय डेयरी के प्लाटों के आवंटन में भी फर्जीवाड़ा हुआ था, जिसकी जांच तत्कालीन आयुक्त ने एसडीएम से कराई थी। इसमें 36 प्लाॅट बिना सर्वे के ही डेयरियों को आवंटित पाए गए। इसके बाद इनकी अलॉटमेंट रद्द कर दी गई थी। इसके अलावा 19 प्लाटों की नीलामी नहीं हुई।