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Panipat News: स्मॉग से घुट रहा दम, हांफ रहे लोग
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पानीपत। टेक्सटाइल नगरी की हवा बेहद जहरीली हो चुकी है। सुबह शाम स्मॉग से जन जीवन प्रभावित है। आंखों में जलन महसूस हो रही है। दमा रोगियों की मुश्किलें बढ़ रही हैं। डॉक्टर उन्हें सुबह शाम घर में ही रहने की सलाह दे रहे हैं। हालांकि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार सब सही चल रहा है। सीपीसीबी के अनुसार वीरवार को बुधवार की अपेक्षा पानीपत का एक्यूआई दो अंक घटकर 182 दर्ज किया गया है। इसको माइक्रोसाॅफ्ट की एमएसएन साइट झुठला रही है। एमएसएन के अनुसार वीरवार को पानीपत का एक्यूआई 425 दर्ज किया गया है। यह सेहत के लिए बेहद हानिकारक है। यह ह्दय रोगी, सांस के रोगी व गर्भवतियों के लिए बेहद खतरनाक है। एमएसएन साइट के अनुसार शहर में 2.5 की मात्रा 317 पहुंच गई है। कार्बन की मात्रा 200 से अधिक है। पीएम-10 की मात्रा 400 से अधिक है।
नाइट्रोजन ऑक्साइड की मात्रा 100 से अधिक है। इसका मुख्य कारण शहर के स्कूलों, कॉलेज व उद्योगों में चल रहे जेनरेटर सेट हैं। उद्योगों में प्रतिबंधित फ्यूल का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। आने वाले दिनों में वायु की गुणवत्ता और अधिक खराब हो सकती है। जैसे जैसे तापमान में गिरावट आएगी वैसे स्मॉग बनेगी। अब हवा में धुएं व कार्बन की मात्रा बढ़ रही है।
बॉक्स
पिछले साल था रेड जोन में
नवंबर 2023 के पहले सप्ताह में शहर का का एक्यूआई पांच दिन तक रेड जोन में रहा। दो दिन ऑरेंज जोन में रहा। इस साल अब तक लगातार सात दिन से एक्यूआई 183 से 187 के बीच ही रहा है। यह यलो जोन में है। इस पर पर्यावरणविद् लगातार सवाल भी खड़े कर रहे हैं। इस संबंध में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी बात करने से बच रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सीपीसीबी व एचएसपीपीसीबी के अधिकारी शहरवासियों को गुमराह कर रहे हैं।
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पर्यावरण मामलों के विशेषज्ञ वरुण गुलाटी ने बताया कि पानीपत का एक्यूआई सही प्रदर्शित नहीं किया जा रहा है। शहर की हवा बेहद खराब है। सुबह शाम स्मॉग बन रही है। यह सेहत के लिए बेहद हानिकारक है। प्रशासन अपना काम सही से नहीं किया जा रहा है। उद्योगों का भी निरीक्षण नहीं किया जा रहा है। आने वाले दिनों में हवा का दबाव अधिक बढ़ेगा। धूल के कण हवा में नहीं उठ पाएंगे। स्मॉग का खतरा गहराएगा। हवा में कार्बन व नाइट्रोजन ऑक्साइड की मात्रा भी बढ़ेगी।
वर्जन-
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एसडीओ कुलदीप सिंह ने बताया कि ग्रैप- 2 के तहत काम किया जा रहा है। प्रदूषण स्तर पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। उद्योगों का निरीक्षण किया जा रहा हैं। जेनरेटर सेट चलते मिलने पर कार्रवाई होगी।
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नाइट्रोजन ऑक्साइड की मात्रा 100 से अधिक है। इसका मुख्य कारण शहर के स्कूलों, कॉलेज व उद्योगों में चल रहे जेनरेटर सेट हैं। उद्योगों में प्रतिबंधित फ्यूल का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। आने वाले दिनों में वायु की गुणवत्ता और अधिक खराब हो सकती है। जैसे जैसे तापमान में गिरावट आएगी वैसे स्मॉग बनेगी। अब हवा में धुएं व कार्बन की मात्रा बढ़ रही है।
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पिछले साल था रेड जोन में
नवंबर 2023 के पहले सप्ताह में शहर का का एक्यूआई पांच दिन तक रेड जोन में रहा। दो दिन ऑरेंज जोन में रहा। इस साल अब तक लगातार सात दिन से एक्यूआई 183 से 187 के बीच ही रहा है। यह यलो जोन में है। इस पर पर्यावरणविद् लगातार सवाल भी खड़े कर रहे हैं। इस संबंध में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी बात करने से बच रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सीपीसीबी व एचएसपीपीसीबी के अधिकारी शहरवासियों को गुमराह कर रहे हैं।
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पर्यावरण मामलों के विशेषज्ञ वरुण गुलाटी ने बताया कि पानीपत का एक्यूआई सही प्रदर्शित नहीं किया जा रहा है। शहर की हवा बेहद खराब है। सुबह शाम स्मॉग बन रही है। यह सेहत के लिए बेहद हानिकारक है। प्रशासन अपना काम सही से नहीं किया जा रहा है। उद्योगों का भी निरीक्षण नहीं किया जा रहा है। आने वाले दिनों में हवा का दबाव अधिक बढ़ेगा। धूल के कण हवा में नहीं उठ पाएंगे। स्मॉग का खतरा गहराएगा। हवा में कार्बन व नाइट्रोजन ऑक्साइड की मात्रा भी बढ़ेगी।
वर्जन-
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एसडीओ कुलदीप सिंह ने बताया कि ग्रैप- 2 के तहत काम किया जा रहा है। प्रदूषण स्तर पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। उद्योगों का निरीक्षण किया जा रहा हैं। जेनरेटर सेट चलते मिलने पर कार्रवाई होगी।