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Panipat News: पानीपत ग्रामीण विधानसभा कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 10 Sep 2024 05:59 AM IST
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Panipat Rural Assembly is the biggest challenge for Congress
। पानीपत। कांग्रेस के पानीपत ग्रामीण विधानसभा सीट सबसे बड़ी चुनौती है। यह प्रदेश की एक मात्र ऐसी सीट है जहां लगातार तीन बार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जमानत जब्त हुई है। इस सीट पर प्रदेश में नीलोखेड़ी के बाद टिकट के लिए सबसे अधिक 56 आवेदन भी आए हैं। 2024 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस इस सीट पर उम्मीदवार के लिए गहन मंथन कर रही है। जातीय समीकरण साधने का प्रयास कर रही है। कांग्रेस की सीधी टक्कर पंचायत मंत्री महिपाल ढांडा से होगी ।
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पानीपत ग्रामीण विधानसभा सीट 2009 में अस्तित्व में आई थी। इससे पहले इस सीट का अधिकतर हिस्सा नौल्था विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता था। 2009 में इस सीट से निर्दलीय ओमप्रकाश जैन ने बाजी मारी थी। उन्होंने इनेलो की बिमला कादियान को मात दी थी। इस दौरान कांग्रेस ने पूर्व मंत्री प्रसन्नी देवी को मैदान में उतारा था। वह तीसरे स्थान पर रहीं। 2014 में कांग्रेस ने अनुभवी खुशीराम जागलान पर दांव खेला। उनको भाजपा के महिपाल ढांडा ने हराया। खुशीराम जागलान की भी जमानत जब्त हो गई थी। 2019 में कांग्रेस ने पूर्व परिवहन मंत्री ओमप्रकाश जैन को मैदान में उतारा। उन्हें महज 12 हजार वोट मिली और उनकी भी जमानत जब्त हो गई। इस सीट पर हुए तीन विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने दो बार पूर्व कैबिनेट मंत्री को उतारा लेकिन वह जमानत जब्ती का टैग नहीं हटा सके।
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पूर्व की नौल्था विधानसभा और वर्तमान की पानीपत ग्रामीण विधानसभा सीट मंत्री पद की गारंटी भी मानी जाती है। नौल्था विधानसभा सीट से 1982 में प्रसन्नी देवी, 1996 में बिजेंद्र सिंह कादियान, सन 2000 में सतबीर कादियान स्पीकर, 2009 में ओमप्रकाश जैन व 2024 में महिपाल ढांडा कैबिनेट मंत्री बने। इस सीट को जाट बहुल सीट माना जाता है। इस सीट से ओमप्रकाश जैन के अलावा कोई गैर जाट उम्मीदवार आज तक जीत दर्ज नहीं कर पाया है।
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यह सीट राजनीतिक रूप से बेहद जरूरी है। हर पार्टी यहां से अपना जातीय समीकरण साधती है। 1984 में गांव नौल्था में इंदिरा गांधी रैली को संबोधित करने आई थी। 2005 में इनेलो की लहर में सोनिया गांधी ने भी नौल्था गांव में रैली को संबोधित किया था। इस चुनाव में यहां से प्रसन्नी को बंपर जीत मिली थी। उन्होंने इनेलो के सतबीर कादियान को को हराया था।
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