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सरकार को 31 मार्च 2021 तक सही करनी होगी सीवरेज व्यवस्था, यमुना को प्रदूषित करने वालों की पहचान कर करनी होगी कार्रवाई, एनजीटी ने निर्देश किए जारी
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एनजीटी ने यमुना को प्रदूषण रहित बनाने के लिए प्रशासन को कड़े दिशा निर्देश जारी किए हैं। एनजीटी ने अपने आदेशों में कहा कि यमुना को प्रदूषित होने से बचाना है इसके लिए उचित कदम उठाए। अपनी सीवरेज व्यवस्था को जल्द से जल्द उचित करें। अधिक से अधिक एसटीपी प्लांट लगाकर पानी को ट्रीट कर ड्रेन में छोड़ा जाए, ताकि यमुना को प्रदूषित होने से बचाया जा सके। इसके लिए 31 मार्च 2021 तक का वक्त दिया गया है। प्रशासन को इस तिथि तक अपनी सीवरेज व्यवस्था सुदृढ़ करनी होगी। इसके अलावा ये भी निर्देश जारी किए गए हैं कि प्रशासन भू-जल का दोहन करने वालों को भू-जल प्राधिकरण से अनुमति लेने के लिए जागरूक करें। अधिक से अधिक के पास एनओसी हो, ताकि भूजल के दोहन को बचाया जा सके।
इससे पहले एनजीटी पिछले साल दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा सरकार को यमुना को प्रदूषित होने से बचाने के लिए ठोस कदम न उठाने पर फटकार भी लगा चुका है। एनजीटी ने कहा है कि सभी रीजनल ऑफिसर को निर्देश दिए गए थे कि वो सिंचाई विभाग के साथ ये सुनिश्चित करें कि ड्रेन से यमुना में कितना पानी गिरता है। उस पानी की गुणवत्ता कैसी है। यमुना को बचाने के लिए प्रत्येक जिले में टास्क फोर्स होनी चाहिए। प्रशासन ने इस संबंध में कोई ठोस कार्य नहीं किए। अब एनजीटी ने सरकार को ये निर्देश दिए हैं कि वो यमुना को प्रदूषित करने वालों की पहचान कर उन पर कार्रवाई करे।
राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ये नहीं कर सका
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने निर्देश दिए थे कि सभी यमुना नदी या उसके राज्य में उसकी सहायक नदियों में संगठनों से पहले सभी नालों में स्थायी प्रवाह निगरानी स्टेशनों को यमुना नदी या उसकी सहायक नदियों में निर्वहन के योगदान को जानने के लिए स्थापित किया जाना चाहिए और संबंधित विभाग द्वारा रिकॉर्ड बनाए रखा जाएगा, लेकिन इस संबंध में कोई ठोस कदम नहीं उठाए।
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-सिंचाई विभाग और यमुना के रख-रखाव से संबंध रखने वाले विभागों द्वारा एक्शन प्लान तो दिए गए है, लेकिन मासिक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई है। सभी विभागों को अपनी रिपोर्ट हर माह की पांच तारीख तक जमा कराने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन रिपोर्ट नहीं जमा कराई गई।
-अवैध कॉलोनियों से निकलने वाले पानी के लिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट होना आवश्यक है। इसके बाद ही गंदे पानी को ड्रेन में छोड़ा जाए, लेकिन इस संबंध में भी प्रशासन कार्रवाई नहीं कर पाया। गंदा पानी सीधा ड्रेन में जा रहा है और ड्रेन सीधे यमुना में गिर रही है।
- समीक्षा रिपोर्ट में आईएमटी रोहतक, पानीपत, कुंडली, मुरथल, राय और बरही में सीईटीपी निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया। उन्हें हटाने के लिए कार्य योजना के साथ कमियों का विवरण आवश्यक है। औद्योगिक क्षेत्र में स्थित उद्योग बिना सहमति के चल रहे हैं। इन उद्योगों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
बापौली क्षेत्र की फैक्टरियां टैंकर से डालती हैं गंदा पानी
बापौली क्षेत्र में लगभग 60 डाइंग यूनिट हैं। ये यूनिट टैंकर में केमिकल युक्त पानी भरकर यमुना में छोड़ते हैं। आए दिन ये दृश्य देखा जा सकता है। इसके अलावा पानीपत के काबड़ी स्थित स्थित फैक्टरी भी टैंकर में पानी भरकर नाले में डालते हैं। ये नाले ड्रेन से कनेक्ट होते हैं। इस प्रकार यमुना प्रदूषित हो रही है।
31 दिसंबर 2019 तक सुधारनी थी व्यवस्था
एनजीटी ने पिछले साल जून में सरकार को निर्देश जारी किए थे कि वो 31 दिसंबर 2019 तक जिले की सीवरेज व्यवस्था को सही करें। ड्रेन पानी को ट्रीट करके छोड़ा जाए। इस संबंध में लगातार मीटिंग भी हुई थी, लेकिन प्रशासन को इसको करने में नाकाम साबित हुआ। अब एनजीटी ने सीवरेज व्यवस्था ठीक करने के लिए 31 मार्च 2021 तक का समय दिया है।
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इससे पहले एनजीटी पिछले साल दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा सरकार को यमुना को प्रदूषित होने से बचाने के लिए ठोस कदम न उठाने पर फटकार भी लगा चुका है। एनजीटी ने कहा है कि सभी रीजनल ऑफिसर को निर्देश दिए गए थे कि वो सिंचाई विभाग के साथ ये सुनिश्चित करें कि ड्रेन से यमुना में कितना पानी गिरता है। उस पानी की गुणवत्ता कैसी है। यमुना को बचाने के लिए प्रत्येक जिले में टास्क फोर्स होनी चाहिए। प्रशासन ने इस संबंध में कोई ठोस कार्य नहीं किए। अब एनजीटी ने सरकार को ये निर्देश दिए हैं कि वो यमुना को प्रदूषित करने वालों की पहचान कर उन पर कार्रवाई करे।
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राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ये नहीं कर सका
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने निर्देश दिए थे कि सभी यमुना नदी या उसके राज्य में उसकी सहायक नदियों में संगठनों से पहले सभी नालों में स्थायी प्रवाह निगरानी स्टेशनों को यमुना नदी या उसकी सहायक नदियों में निर्वहन के योगदान को जानने के लिए स्थापित किया जाना चाहिए और संबंधित विभाग द्वारा रिकॉर्ड बनाए रखा जाएगा, लेकिन इस संबंध में कोई ठोस कदम नहीं उठाए।
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-सिंचाई विभाग और यमुना के रख-रखाव से संबंध रखने वाले विभागों द्वारा एक्शन प्लान तो दिए गए है, लेकिन मासिक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई है। सभी विभागों को अपनी रिपोर्ट हर माह की पांच तारीख तक जमा कराने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन रिपोर्ट नहीं जमा कराई गई।
-अवैध कॉलोनियों से निकलने वाले पानी के लिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट होना आवश्यक है। इसके बाद ही गंदे पानी को ड्रेन में छोड़ा जाए, लेकिन इस संबंध में भी प्रशासन कार्रवाई नहीं कर पाया। गंदा पानी सीधा ड्रेन में जा रहा है और ड्रेन सीधे यमुना में गिर रही है।
- समीक्षा रिपोर्ट में आईएमटी रोहतक, पानीपत, कुंडली, मुरथल, राय और बरही में सीईटीपी निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया। उन्हें हटाने के लिए कार्य योजना के साथ कमियों का विवरण आवश्यक है। औद्योगिक क्षेत्र में स्थित उद्योग बिना सहमति के चल रहे हैं। इन उद्योगों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
बापौली क्षेत्र की फैक्टरियां टैंकर से डालती हैं गंदा पानी
बापौली क्षेत्र में लगभग 60 डाइंग यूनिट हैं। ये यूनिट टैंकर में केमिकल युक्त पानी भरकर यमुना में छोड़ते हैं। आए दिन ये दृश्य देखा जा सकता है। इसके अलावा पानीपत के काबड़ी स्थित स्थित फैक्टरी भी टैंकर में पानी भरकर नाले में डालते हैं। ये नाले ड्रेन से कनेक्ट होते हैं। इस प्रकार यमुना प्रदूषित हो रही है।
31 दिसंबर 2019 तक सुधारनी थी व्यवस्था
एनजीटी ने पिछले साल जून में सरकार को निर्देश जारी किए थे कि वो 31 दिसंबर 2019 तक जिले की सीवरेज व्यवस्था को सही करें। ड्रेन पानी को ट्रीट करके छोड़ा जाए। इस संबंध में लगातार मीटिंग भी हुई थी, लेकिन प्रशासन को इसको करने में नाकाम साबित हुआ। अब एनजीटी ने सीवरेज व्यवस्था ठीक करने के लिए 31 मार्च 2021 तक का समय दिया है।