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स्वास्थ्य विभाग ने संसाधन तो जुटाए पर डॉक्टरों की कमी बड़ी चुनौती
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संदीप सिंह
पानीपत। कोरोना की तीसरी लहर का खतरा अभी बना हुआ है। इससे निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने संसाधन तो जुटा लिए, लेकिन विभाग जिले में डॉक्टरों की कमी पूरी नहीं कर पाया। इसलिए यह तैयारी अधूरी नजर आ रही है। विभाग ने ऑक्सीजन प्लांट, सरकारी अस्पताल में 47 वेंटिलेटर, 687 ऑक्सीजन बेड, 569 नॉन ऑक्सीजन बेड, 150 आईसीयू बेड की व्यवस्था कर ली है। सभी सरकारी डॉक्टरों को वेंटिलेटर ऑपरेट करने का प्रशिक्षण भी दिया गया है। स्टाफ नर्सों को ऑक्सीजन कंसट्रेटर ऑपरेट की भी ट्रेनिंग दी गई है। स्टाफ को लगातार संक्रमण कंट्रोल करने का भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
इन सब तैयारियों के बीच विभाग डॉक्टर नहीं जुटा पा रहा है।
कोरोना के दौरान शरीर के रोगों को समझने के लिए फिजिशयन की सबसे अधिक आवश्यकता है। पिछले तीन साल में कई बार मांग भेजी जा चुकी है, लेकिन फिजिशयन नहीं मिला है। 200 बेड के सिविल अस्पताल में 85 डॉक्टरों के पद स्वीकृत होने चाहिए, लेकिन यहां पर 56 पद ही स्वीकृत हैं। इनमें से भी 17 पद सालों से खाली पड़े हैं। ऐसे में डॉक्टरों के अभाव में कोरोना की तीसरी लहर से निपटना बड़ी चुनौती होगी।
1 हजार लोगों पर एक फिजिशयन व एमबीबीएस डॉक्टर चाहिए
डब्ल्यूएओ की गाइडलाइन के अनुसार एक हजार लोगों पर एक फिजिशयन व एक एमबीबीएस डॉक्टर होना चाहिए। गाइडलाइन के अनुसार 10 हजार की आबादी पर एक विशेषज्ञ होना चाहिए। इस हिसाब से पानीपत की 14 लाख की आबादी पर 1400 डॉक्टर होने चाहिए, लेकिन सरकारी, प्राइवेट व आयुष विभाग के डॉक्टरों की संख्या मिलाकर 649 हैं। जिले में 750 डॉक्टरों की कमी है।
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जिले में लैब टेक्नीशियन के 65 पद, 47 खाली
जिले के सिविल अस्पताल, 7 सीचएचसी व 17 पीएचसी में लैब टेक्नीशियन के 65 पद स्वीकृत हैं। इनमें से महज 18 पर ही तैनाती है। सिविल अस्पताल में लैब टेक्नीशियन के 12 पद रिक्त पड़े हैं।
पांच लाख किशोरों व बच्चों पर महज दो शिशु रोग विशेषज्ञ
जिले में 17 साल तक के किशोरों व बच्चों की संख्या लगभग 5 लाख है। सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में दो ही शिशु रोग विशेषज्ञ हैं। एक शिशु रोग विशेषज्ञ डेपुटेशन पर हैं।
ऑक्सीजन की कमी से नहीं होगी मौत
कोरोना की दूसरी लहर के दौरान जिले में सैकड़ों लोगों की मौत ऑक्सीजन की कमी से हुई है। हालांकि सरकार ऑक्सीजन की कमी को मौत का कारण नहीं मान रही है। अब जिले में ऑक्सीजन की कमी से मौत नहीं होगी। सिविल अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया है। प्लांट में एक मिनट में एक हजार लीटर ऑक्सीजन हवा से बनेगी। समालखा में भी प्लांट लगाया गया है। विभाग के पास 282 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर हैं। सभी सीएचसी में बेड के हिसाब से कंसंट्रेटर भिजवा दिए गए हैं।
हमारी तैयारी पूरी है, कोई दिक्कत नहीं होने देंगे : डॉ. कादियान
कोरोना की संभावित तीसरी लहर से निपटने की तैयारी पूरी है। डॉक्टरों व स्टाफ को ट्रेनिंग दी गई है। संसाधन भी जुटा लिए गए हैं। जल्द ऑक्सीजन प्लांट की ट्रायल होगी। मैन पावर उपलब्ध कराना सरकार का काम है। वे जिले की स्थिति से मुख्यालय को अवगत करवा चुके हैं।
डॉ. जितेंद्र कादियान, सिविल सर्जन पानीपत।
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पानीपत। कोरोना की तीसरी लहर का खतरा अभी बना हुआ है। इससे निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने संसाधन तो जुटा लिए, लेकिन विभाग जिले में डॉक्टरों की कमी पूरी नहीं कर पाया। इसलिए यह तैयारी अधूरी नजर आ रही है। विभाग ने ऑक्सीजन प्लांट, सरकारी अस्पताल में 47 वेंटिलेटर, 687 ऑक्सीजन बेड, 569 नॉन ऑक्सीजन बेड, 150 आईसीयू बेड की व्यवस्था कर ली है। सभी सरकारी डॉक्टरों को वेंटिलेटर ऑपरेट करने का प्रशिक्षण भी दिया गया है। स्टाफ नर्सों को ऑक्सीजन कंसट्रेटर ऑपरेट की भी ट्रेनिंग दी गई है। स्टाफ को लगातार संक्रमण कंट्रोल करने का भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
इन सब तैयारियों के बीच विभाग डॉक्टर नहीं जुटा पा रहा है।
कोरोना के दौरान शरीर के रोगों को समझने के लिए फिजिशयन की सबसे अधिक आवश्यकता है। पिछले तीन साल में कई बार मांग भेजी जा चुकी है, लेकिन फिजिशयन नहीं मिला है। 200 बेड के सिविल अस्पताल में 85 डॉक्टरों के पद स्वीकृत होने चाहिए, लेकिन यहां पर 56 पद ही स्वीकृत हैं। इनमें से भी 17 पद सालों से खाली पड़े हैं। ऐसे में डॉक्टरों के अभाव में कोरोना की तीसरी लहर से निपटना बड़ी चुनौती होगी।
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1 हजार लोगों पर एक फिजिशयन व एमबीबीएस डॉक्टर चाहिए
डब्ल्यूएओ की गाइडलाइन के अनुसार एक हजार लोगों पर एक फिजिशयन व एक एमबीबीएस डॉक्टर होना चाहिए। गाइडलाइन के अनुसार 10 हजार की आबादी पर एक विशेषज्ञ होना चाहिए। इस हिसाब से पानीपत की 14 लाख की आबादी पर 1400 डॉक्टर होने चाहिए, लेकिन सरकारी, प्राइवेट व आयुष विभाग के डॉक्टरों की संख्या मिलाकर 649 हैं। जिले में 750 डॉक्टरों की कमी है।
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जिले में लैब टेक्नीशियन के 65 पद, 47 खाली
जिले के सिविल अस्पताल, 7 सीचएचसी व 17 पीएचसी में लैब टेक्नीशियन के 65 पद स्वीकृत हैं। इनमें से महज 18 पर ही तैनाती है। सिविल अस्पताल में लैब टेक्नीशियन के 12 पद रिक्त पड़े हैं।
पांच लाख किशोरों व बच्चों पर महज दो शिशु रोग विशेषज्ञ
जिले में 17 साल तक के किशोरों व बच्चों की संख्या लगभग 5 लाख है। सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में दो ही शिशु रोग विशेषज्ञ हैं। एक शिशु रोग विशेषज्ञ डेपुटेशन पर हैं।
ऑक्सीजन की कमी से नहीं होगी मौत
कोरोना की दूसरी लहर के दौरान जिले में सैकड़ों लोगों की मौत ऑक्सीजन की कमी से हुई है। हालांकि सरकार ऑक्सीजन की कमी को मौत का कारण नहीं मान रही है। अब जिले में ऑक्सीजन की कमी से मौत नहीं होगी। सिविल अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया है। प्लांट में एक मिनट में एक हजार लीटर ऑक्सीजन हवा से बनेगी। समालखा में भी प्लांट लगाया गया है। विभाग के पास 282 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर हैं। सभी सीएचसी में बेड के हिसाब से कंसंट्रेटर भिजवा दिए गए हैं।
हमारी तैयारी पूरी है, कोई दिक्कत नहीं होने देंगे : डॉ. कादियान
कोरोना की संभावित तीसरी लहर से निपटने की तैयारी पूरी है। डॉक्टरों व स्टाफ को ट्रेनिंग दी गई है। संसाधन भी जुटा लिए गए हैं। जल्द ऑक्सीजन प्लांट की ट्रायल होगी। मैन पावर उपलब्ध कराना सरकार का काम है। वे जिले की स्थिति से मुख्यालय को अवगत करवा चुके हैं।
डॉ. जितेंद्र कादियान, सिविल सर्जन पानीपत।