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Panipat News: मदर एंड चाइल्ड केयर विंग के निर्माण में दो साल तक की देरी, सिविल सर्जन ने मांगी रिपोर्ट
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पानीपत। सिविल अस्पताल परिसर में 21 करोड़ की लागत से बन रही एमसीएच (मैटरनल एंड चाइल्ड हेल्थ) विंग की सौगात में लगभग दो साल की देरी चल रही है। अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि ये बिल्डिंग कब तक तैयार होनी है। पीडब्ल्यूडी को बिल्डिंग जून 2023 तक हैंडओवर करनी थी। फिर इसकी तारीख दिसंबर 2024 तक तय की गई । अब तक बिल्डिंग का 70 प्रतिशत काम पूरा हुआ है। या यूं कहें कि अब तक बिल्डिंग का ढांचा ही पूरा हुआ है। फर्निचर, फर्श व फिनिशिंग का काम अब भी रहता है। बिल्डिंग को पूरा होने में डेढ़ साल तक का वक्त लग सकता है। सिविल सर्जन ने पीडब्ल्यूडी को पत्र लिखकर बिल्डिंग की स्टेट्स रिपोर्ट मांगी है। 2021 में कुरुक्षेत्र की निजी कंपनी ने एमसीएच विंग की बिल्डिंग का निर्माण कार्य शुरू किया था। एमसीएच विंग शुरू होने पर सिविल अस्पताल 300 बेड का होगा। फिलहाल 200 बेड का सिविल अस्पताल है और 100 बेड की एमसीएच विंग बनाई जा रही है। विंग पंचकूला की तर्ज पर बनाई जा रही है। बिल्डिंग 23 हजार 425 वर्ग फीट में बनाई जा रही है।
2018 में सीएम मनोहर लाल ने पानीपत में एमसीएच विंग के निर्माण को हरी झंडी दी थी। जून 2021 में विंग का निर्माण कार्य शुरू हुआ था। विंग में प्रसव से पहले गर्भवती महिलाओं को रखने के लिए बेड होंगे। प्रसव संपन्न कराने के लिए 20 टेबल होंगी। प्रसव उपरांत 48 से 72 घंटे अस्पताल में भर्ती पहले के लिए जच्चा-बच्चा के लिए पर्याप्त बेड होंगे। महिला ओपीडी, शिशु रोग ओपीडी, स्पेशल न्यू बोर्न चाइल्ड केयर यूनिट (एसएनसीयू) बनेगी। एक ऑपरेशन थियेटर भी बन सकता है। जच्चा-बच्चा का चेकअप और इलाज एक छत के नीचे होगा।
सिविल अस्पताल में अगर कोई गर्भवती महिला या शिशु इलाज के लिए आता है तो पहले उसने पर्ची कटवानी पड़ती है। फिर भूतल पर डॉक्टर जांच करते हैं। अगर गर्भवती है तो उसे जांच के बाद दूसरे तल पर ले जाया जाता है। यहां पर डिलीवरी होने के बाद अगर शिशु को कोई दिक्कत है तो उसे पांचवें तल पर एसएनसीयू वार्ड में ले जाया जाता है। अगर महिला की सिजेरियन डिलीवरी होनी है तो उसे पांचवें तल पर ऑपरेशन थियेटर ले जाना पड़ता है। ऐसे में मरीजों के साथ साथ डॉक्टरों को भी खासी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
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वर्जन- सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा ने कहा कि एमसीएच विंग का अभी काफी काम बचा है। पीडब्ल्यूडी को पत्र लिखकर इसकी स्टेट्स रिपोर्ट मांगी गई है। बिल्डिंग का काम देरी से चल रहा है। बिल्डिंग के कार्य पर नजर रखी जा रही है। एमसीएच विंग बनने पर अस्पताल 300 बेड का होगा। जच्चा बच्चा को एक ही बेड के नीचे सभी सुविधाएं मिलेंगी।
- डॉ. जयंत आहूजा, सिविल सर्जन पानीपत।
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2018 में सीएम मनोहर लाल ने पानीपत में एमसीएच विंग के निर्माण को हरी झंडी दी थी। जून 2021 में विंग का निर्माण कार्य शुरू हुआ था। विंग में प्रसव से पहले गर्भवती महिलाओं को रखने के लिए बेड होंगे। प्रसव संपन्न कराने के लिए 20 टेबल होंगी। प्रसव उपरांत 48 से 72 घंटे अस्पताल में भर्ती पहले के लिए जच्चा-बच्चा के लिए पर्याप्त बेड होंगे। महिला ओपीडी, शिशु रोग ओपीडी, स्पेशल न्यू बोर्न चाइल्ड केयर यूनिट (एसएनसीयू) बनेगी। एक ऑपरेशन थियेटर भी बन सकता है। जच्चा-बच्चा का चेकअप और इलाज एक छत के नीचे होगा।
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सिविल अस्पताल में अगर कोई गर्भवती महिला या शिशु इलाज के लिए आता है तो पहले उसने पर्ची कटवानी पड़ती है। फिर भूतल पर डॉक्टर जांच करते हैं। अगर गर्भवती है तो उसे जांच के बाद दूसरे तल पर ले जाया जाता है। यहां पर डिलीवरी होने के बाद अगर शिशु को कोई दिक्कत है तो उसे पांचवें तल पर एसएनसीयू वार्ड में ले जाया जाता है। अगर महिला की सिजेरियन डिलीवरी होनी है तो उसे पांचवें तल पर ऑपरेशन थियेटर ले जाना पड़ता है। ऐसे में मरीजों के साथ साथ डॉक्टरों को भी खासी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
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वर्जन- सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा ने कहा कि एमसीएच विंग का अभी काफी काम बचा है। पीडब्ल्यूडी को पत्र लिखकर इसकी स्टेट्स रिपोर्ट मांगी गई है। बिल्डिंग का काम देरी से चल रहा है। बिल्डिंग के कार्य पर नजर रखी जा रही है। एमसीएच विंग बनने पर अस्पताल 300 बेड का होगा। जच्चा बच्चा को एक ही बेड के नीचे सभी सुविधाएं मिलेंगी।
- डॉ. जयंत आहूजा, सिविल सर्जन पानीपत।