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Panipat News: रुपयों के लेन-देन पर कराया था दुष्कर्म का केस, आरोपी को किया बरी
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- किशोरी की मां ने दर्ज कराया था मुकदमा, गर्भ में पल रहे भ्रूण से मिलान नहीं हुआ था आरोपी का डीएनए
माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। जिला एवं सत्र न्यायाधीश पीयूष शर्मा की अदालत ने किशोरी से दुष्कर्म के आरोपी कमलेश चौधरी को दोषमुक्त करते हुए बरी कर दिया है। मुकदमे की सुनवाई के दौरान आरोपी ने अपने पक्ष में कई साक्ष्य दिए जिसमें डीएनए जांच को सबसे अहम साक्ष्य माना गया। साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद मंगलवार को अदालत ने दोषमुक्त करने के आदेश दिए।
अप्रैल 2023 में सदर थाने में एक महिला ने मुकदमा दर्ज कराया था। उनका कहना था कि उनकी 16 साल की बेटी के पेट में कई दिन से दर्द हो रहा था। वह डॉक्टर के पास पहुंचे तो डॉक्टर ने किशोरी को दो माह की गर्भवती बताया जिसके बाद किशोरी से पूछा तो उसने पड़ोस में रहने वाले कमलेश चौधरी निवासी सतना जिला मध्यप्रदेश पर धमकी देकर गलत काम करने के आरोप लगाए थे। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपी को जेल भेज दिया था। विवेचना के बाद आरोपी के खिलाफ चार्जशीट अदालत में दाखिल की थी।
कमलेश के अधिवक्ता मोहित कुहाड़ ने बताया कि सुनवाई के दौरान उन्होंने अपना पक्ष मजबूती से रखा। किशोरी के गर्भवती होने की डीएनए जांच कराई गई। भ्रूण का डीएनए आरोपी के डीएनए से मैच नहीं हुआ था और जांच रिपोर्ट निगेटिव आई थी। सुनवाई के दौरान पैसे के लेन-देन के मामले में झूठा मुकदमा दर्ज होने की भी बात सामने आई थी। हालांकि किशोरी और उसकी मां ने आरोपी के ही खिलाफ गवाही दी। लेकिन डीएनए रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश पीयूष शर्मा की अदालत ने आरोपी को दोष मुक्त करते हुए बरी कर दिया।
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माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। जिला एवं सत्र न्यायाधीश पीयूष शर्मा की अदालत ने किशोरी से दुष्कर्म के आरोपी कमलेश चौधरी को दोषमुक्त करते हुए बरी कर दिया है। मुकदमे की सुनवाई के दौरान आरोपी ने अपने पक्ष में कई साक्ष्य दिए जिसमें डीएनए जांच को सबसे अहम साक्ष्य माना गया। साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद मंगलवार को अदालत ने दोषमुक्त करने के आदेश दिए।
अप्रैल 2023 में सदर थाने में एक महिला ने मुकदमा दर्ज कराया था। उनका कहना था कि उनकी 16 साल की बेटी के पेट में कई दिन से दर्द हो रहा था। वह डॉक्टर के पास पहुंचे तो डॉक्टर ने किशोरी को दो माह की गर्भवती बताया जिसके बाद किशोरी से पूछा तो उसने पड़ोस में रहने वाले कमलेश चौधरी निवासी सतना जिला मध्यप्रदेश पर धमकी देकर गलत काम करने के आरोप लगाए थे। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपी को जेल भेज दिया था। विवेचना के बाद आरोपी के खिलाफ चार्जशीट अदालत में दाखिल की थी।
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कमलेश के अधिवक्ता मोहित कुहाड़ ने बताया कि सुनवाई के दौरान उन्होंने अपना पक्ष मजबूती से रखा। किशोरी के गर्भवती होने की डीएनए जांच कराई गई। भ्रूण का डीएनए आरोपी के डीएनए से मैच नहीं हुआ था और जांच रिपोर्ट निगेटिव आई थी। सुनवाई के दौरान पैसे के लेन-देन के मामले में झूठा मुकदमा दर्ज होने की भी बात सामने आई थी। हालांकि किशोरी और उसकी मां ने आरोपी के ही खिलाफ गवाही दी। लेकिन डीएनए रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश पीयूष शर्मा की अदालत ने आरोपी को दोष मुक्त करते हुए बरी कर दिया।
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