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गुरु का घटा आदर, थप्पड़ चट्टू मारते ही बच्चा पहुंच जाता है थाने
Updated Tue, 05 Sep 2017 12:16 AM IST
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गुरु का घटा आदर, थप्पड़ चट्टू मारते ही बच्चा पहुंच जाता है थाने
अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। आधुनिक शिक्षा के साथ गुरु का आदर भी घट गया है। गुरु का बच्चे को समझाने के लिए एक चाटा भी उल्टे उसी पर भारी पड़ जाता है। बच्चे या अभिभावक गुरुजी द्वारा गलती पर मारे थप्पड़ पर खुद सुधरने की बजाय अपने गुरुजी के खिलाफ ही थाने व चौकियों में चले जाते हैं। गुरुजी को ऐसे में खुद ही बच्चों या फिर उनके अभिभावकों से माफी मांगनी पड़ती है। कई मामलों में तो गुरुजी को इलाज के नाम पर आर्थिक जुर्माना तक भुगतना पड़ता है। ऐसे में शिष्य को सही रास्ते पर लाने कठिनाइयां बढ़ जा रही हैं।
मामला नंबर-1
शहर के नूरवाला स्थित एक प्राइवेट स्कूल प्रिंसिपल ने पिछले दिनों तीन भाई बहनों को फीस जमा कराने की कह दी। करीब चार माह तक बार-बार नोटिस देने के बाद भी फीस जमा न कराने पर स्कूल द्वारा बच्चों को उनके घर भेज दिया गया। अभिभावकों ने नजदीक के थाना पुलिस में स्कूल प्रबंधक की शिकायत दे दी। अभिभावकों ने बच्चों के साथ मारपीट करने और उनको फीस के नाम पर प्रताड़ित करने की शिकायत दे दी। स्कूल प्रबंधन को पुलिस थाने में जाकर अभिभावकों की बात में राजी होना पड़ा। अभिभावकों का कहना है कि वे अपने हिसाब से फीस देंगे।
मामला नंबर-2
शहर के प्रतिष्ठित सीबीएसई स्कूल की अभिभावकों ने शिकायत दे दी। अभिभावकों का आरोप है कि वे स्कूल द्वारा बढ़ाई गई फीस जमा नहीं कराएंगे। स्कूल प्रबंधन द्वारा स्कूल द्वारा निर्धारित फीस जमा कराने वाले बच्चों की ताली बजवाई तो दूसरे बच्चों के अभिभावकों ने पुलिस में शिकायत कर दी। इन अभिभावकों ने अपने बच्चों पर सेम-सेम कराने का आरोप लगाया। यह मामला काफी लंबा खींचा।
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मामला नंबर-3
विकास नगर स्थित निजी स्कूल की टीचर ने सातवीं कक्षा के बच्चे को उसकी गलती पर हलका सा थप्पड़ मार दिया। बच्चा अगले दिन तो ठीक-ठाक स्कूल आ गया, लेकिन दोपहर के समय लड़के का पिता स्कूल में पहुंच गया। पिता ने अपने बच्चे को टीचर द्वारा थप्पड़ मारने पर नाराजगी जताई और पुलिस में शिकायत दे दी। महिला टीचर पुलिस में शिकायत देने के बाद खुद मुश्किल में घिर आई। परिवार के लोगों ने बच्चे के परिजनों से बात की। परिजन ने इलाज में हजारों रुपये खर्च होने की बात को रखा। टीचर के परिजनों ने अभिभावकों की बात मानकर अपना पीछा छुड़ाया।
शिक्षक-छात्र रिश्ते के पतन का है दुष्परिणाम
बीएड कॉलेज की पूर्व प्राचार्या डॉ. कुजल प्रतिष्ठा ने बताया कि आज शिक्षा में बदलाव आए हैं। पहले गुरुकुलों में शिक्षा होती थी और अभिभावक पूर्ण विश्वास भी रखते थे। आज शिक्षा के मायनों के साथ स्टैंडर्ड भी बदल गया है। अभिभावक अपने बच्चों को पढ़ाना लिखाना तो चाहते हैं, लेकिन गुरुजी की डांट सुनना पसंद नहीं करते। गुरु का स्तर पर भी कुछ गिरा है। वे भी इसको एक व्यवसाय मानकर चलने लगे हैं। यहां पर अभिभावकों का भी कसूर है। अभिभावक अपने बच्चों का पक्ष लेते हैं, जबकि पहले ऐसा नहीं होता था। अभिभावकों को अपने बच्चे की स्कूल की गलती मिलते ही खुद भी पिटाई करते थे। शिक्षक व छात्र के पतन होते रिश्तों का दुष्परिणाम समाज को भुगतना पड़ रहा है। समाज को बहुत कुछ समझना व बदलना होगा। समाज को सुधारने की बात कहने से पहले खुद बदलना होगा।
किसी भी स्कूल में बच्चे को सजा नहीं दी जा सकती। पहले बच्चों की क्लास में पिटाई होती थी और बच्चों को अपने गुरुजी का डर के साथ शर्म भी होती थी। अब स्कूलों में इस तरह का कुछ नजर नहीं आता। कई स्कूलों में तो बच्चे अपने गुरुजी पर अहसान जताते हैं। शिक्षा का मौलिक रूप से स्तर गिरा है।
उदय प्रताप सिंह, डीईओ, पानीपत।
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अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। आधुनिक शिक्षा के साथ गुरु का आदर भी घट गया है। गुरु का बच्चे को समझाने के लिए एक चाटा भी उल्टे उसी पर भारी पड़ जाता है। बच्चे या अभिभावक गुरुजी द्वारा गलती पर मारे थप्पड़ पर खुद सुधरने की बजाय अपने गुरुजी के खिलाफ ही थाने व चौकियों में चले जाते हैं। गुरुजी को ऐसे में खुद ही बच्चों या फिर उनके अभिभावकों से माफी मांगनी पड़ती है। कई मामलों में तो गुरुजी को इलाज के नाम पर आर्थिक जुर्माना तक भुगतना पड़ता है। ऐसे में शिष्य को सही रास्ते पर लाने कठिनाइयां बढ़ जा रही हैं।
मामला नंबर-1
शहर के नूरवाला स्थित एक प्राइवेट स्कूल प्रिंसिपल ने पिछले दिनों तीन भाई बहनों को फीस जमा कराने की कह दी। करीब चार माह तक बार-बार नोटिस देने के बाद भी फीस जमा न कराने पर स्कूल द्वारा बच्चों को उनके घर भेज दिया गया। अभिभावकों ने नजदीक के थाना पुलिस में स्कूल प्रबंधक की शिकायत दे दी। अभिभावकों ने बच्चों के साथ मारपीट करने और उनको फीस के नाम पर प्रताड़ित करने की शिकायत दे दी। स्कूल प्रबंधन को पुलिस थाने में जाकर अभिभावकों की बात में राजी होना पड़ा। अभिभावकों का कहना है कि वे अपने हिसाब से फीस देंगे।
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मामला नंबर-2
शहर के प्रतिष्ठित सीबीएसई स्कूल की अभिभावकों ने शिकायत दे दी। अभिभावकों का आरोप है कि वे स्कूल द्वारा बढ़ाई गई फीस जमा नहीं कराएंगे। स्कूल प्रबंधन द्वारा स्कूल द्वारा निर्धारित फीस जमा कराने वाले बच्चों की ताली बजवाई तो दूसरे बच्चों के अभिभावकों ने पुलिस में शिकायत कर दी। इन अभिभावकों ने अपने बच्चों पर सेम-सेम कराने का आरोप लगाया। यह मामला काफी लंबा खींचा।
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मामला नंबर-3
विकास नगर स्थित निजी स्कूल की टीचर ने सातवीं कक्षा के बच्चे को उसकी गलती पर हलका सा थप्पड़ मार दिया। बच्चा अगले दिन तो ठीक-ठाक स्कूल आ गया, लेकिन दोपहर के समय लड़के का पिता स्कूल में पहुंच गया। पिता ने अपने बच्चे को टीचर द्वारा थप्पड़ मारने पर नाराजगी जताई और पुलिस में शिकायत दे दी। महिला टीचर पुलिस में शिकायत देने के बाद खुद मुश्किल में घिर आई। परिवार के लोगों ने बच्चे के परिजनों से बात की। परिजन ने इलाज में हजारों रुपये खर्च होने की बात को रखा। टीचर के परिजनों ने अभिभावकों की बात मानकर अपना पीछा छुड़ाया।
शिक्षक-छात्र रिश्ते के पतन का है दुष्परिणाम
बीएड कॉलेज की पूर्व प्राचार्या डॉ. कुजल प्रतिष्ठा ने बताया कि आज शिक्षा में बदलाव आए हैं। पहले गुरुकुलों में शिक्षा होती थी और अभिभावक पूर्ण विश्वास भी रखते थे। आज शिक्षा के मायनों के साथ स्टैंडर्ड भी बदल गया है। अभिभावक अपने बच्चों को पढ़ाना लिखाना तो चाहते हैं, लेकिन गुरुजी की डांट सुनना पसंद नहीं करते। गुरु का स्तर पर भी कुछ गिरा है। वे भी इसको एक व्यवसाय मानकर चलने लगे हैं। यहां पर अभिभावकों का भी कसूर है। अभिभावक अपने बच्चों का पक्ष लेते हैं, जबकि पहले ऐसा नहीं होता था। अभिभावकों को अपने बच्चे की स्कूल की गलती मिलते ही खुद भी पिटाई करते थे। शिक्षक व छात्र के पतन होते रिश्तों का दुष्परिणाम समाज को भुगतना पड़ रहा है। समाज को बहुत कुछ समझना व बदलना होगा। समाज को सुधारने की बात कहने से पहले खुद बदलना होगा।
किसी भी स्कूल में बच्चे को सजा नहीं दी जा सकती। पहले बच्चों की क्लास में पिटाई होती थी और बच्चों को अपने गुरुजी का डर के साथ शर्म भी होती थी। अब स्कूलों में इस तरह का कुछ नजर नहीं आता। कई स्कूलों में तो बच्चे अपने गुरुजी पर अहसान जताते हैं। शिक्षा का मौलिक रूप से स्तर गिरा है।
उदय प्रताप सिंह, डीईओ, पानीपत।