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साल में 12 नवजात बेटियों व 3 बेटे को अपनों ने फेंका, दो दिन में तीन बेटी मिली बेसहारा, डॉक्टरों व स्टाफ ने माता-पिता की तरह केअर
Updated Mon, 10 Dec 2018 12:18 AM IST
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3 साल में 12 नवजात बेटियों व 3 बेटे को अपनों ने फेंका, दो दिन में तीन बेटी मिली बेसहारा, डॉक्टरों व स्टाफ ने माता-पिता की पानीपत। जिले में रूढ़ीवादी सोच रखने वाले लोगों ने तीन साल में 12 बेटियों व 3 बेटों को दुत्कार दिया और उन्हें लावारिश हालत में खाली प्लॉट, रोड व लोगों के घरों के सामने छोड़ दिया। शनिवार को समालखा व डिडवाडी में दो 1 साल व 10 साल की लड़की लावारिस हालत में मिली। रविवार को भी किला के पास मानसिक रूप से बीमार एक 8 साल की बच्ची मिली है। इन लड़कियों को शिशु गृह में भेज दिया गया है। जो नवजात बच्चियां एक या दो दिन की मिली उनकी सिविल अस्पताल के डॉक्टरों व स्टाफ ने माता-पिता की तरह केअर कर उन्हें स्वस्थ किया। उनके लिए अपने पैसों से दूध, कपड़ों व खिलौना की व्यवस्था की। नर्सों ने हर बच्ची को नाम दिया। नवजातों की केअर में किसी प्रकार की कमी ना रह जाए सिविल सर्जन व एमएस ने भी एसएनसीयू वार्ड में एक डॉक्टर व अतिरिक्त स्टाफ की ड्यूटी लगा दी। डॉक्टरों ने सभी बच्चों को पूरी तरह से स्वस्थ कर साईं स्थित शिशु गृह में भिजवा दिया। जहां सभी का पालन पोषण किया जा रहा है। एक सप्ताह पहले कुटानी रोड पर मिले बच्चे की खानपुर मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान मौत हो गई है। पुलिस अब तक इन बेटियों व बेटों के आरोपियों का सुराग तक नहीं लगा पाई है।
सिविल अस्पताल के 5 बाल रोग विशेषज्ञ शहर में तीन साल मिली 12 लावारिस नवजात बच्चियों के गवाह रहे है। इन डॉक्टरों की यादें भी इन बच्चियों के साथ जुडी है। जिन्होंने हर बच्ची की केअर के लिए 24 घंटे ड्यूटी की है। अपने पैसों से बच्चियों के लिए कपड़ों से लेकर खिलौनों तक की व्यवस्था की। नवजात बच्चियों के लावारिस हालत में मिलने के बाद डॉक्टरों ने इलाज के लिए आने वाले मरीजों को भी बेटियों के प्रति प्रेरित करना शुरू किया। इन डॉक्टरों की मेहनत से आज सभी छह बच्चियां पूरी तरह से स्वस्थ है। जिनको राई शिशू गृह से गोद लेने के लिए दिल्ली, करनाल, चंडीगढ़, जयपुर, सोनीपत समेत विभिन्न प्रकार से दंपति पहुंच रहे है। बच्चियों को गोद लेने की प्रक्रिया अब भी चल रही है।
यह मिली बच्चियां:
8 फरवरी 2015 को जाटल रोड पर खाली प्लॉट में, 19 फरवरी 2015 को जाटल रोड पर बाल अनाथालय के सामने, दिसंबर 2015 में सनौली रोड स्थित साईं चौक पर खाली प्लॉट में, 14 सितंबर 2016 को सेक्टर 11-12 में डॉक्टर के मकान के सामने 2 लावारिस बच्चियां मिली, 15 सितंबर को सेक्टर 25 में एक बच्चा व 17 नवंबर 2016 को जीटी रोड पर एसडी कॉलेज के सामने लावारिस हालत में बच्ची मिली। 2017 में दो बच्चियां व 12 स्थानों बच्चों के भूर्ण मिले। 2018 में सितंबर माह में एक बच्ची समालखा रेलवे स्टेशन पर मिली। 15 नवंबर को कुटानी गांव के खेतों में एक नवजात को फेंक दिया गया। सिर में चोट लगने से बच्चे की मौत हो गई। 26 नवंबर को अंसल सोसाइटी के गेट नंबर दो पर, 8 दिसंबर को समालखा व डिडवाडी गांव के पास व 9 दिसंबर को किला के पास एक 8 साल की बच्ची मिली।
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आरोपी का पता लगाने वाले पर 5 हजार का इनाम:
नारी तू नारायणी समिति की अध्यक्ष सविता आर्य ने डॉक्टरों से बच्ची के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली। उन्होंने बेटी को दुत्कारने वाले का पता लगाने वाले को 5 हजार रुपये देने की घोषणा दी है। उन्होंने एडीजीपी नवदीप विर्क को भी पत्र लिखकर आरोपियों का पता लगाने की मांग की।
पुलिस नहीं कर पाई एक भी मामले को ट्रेस
तीन साल में शहर में अलग अलग स्थानों पर नवजातों को फेंका गया। पुलिस ने सभी मामलों में लोगों की शिकायत पर अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। लेकिन है की बात ये रही कि पुलिस एक भी मामले में आरोपियों तक नहीं पहुंच पाई। बच्चों से जुड़ी संस्थाओं ने पुलिस पर मामलों में लापरवाही बरतने के आरोप लगाए।
सीसीटीवी फुटेज खंगालेंगे: दहिया
बच्चों को लावारिस छोड़ने के मामले गंभीर है। असंल के आस पास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रहे हैं। मामले में अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। पुलिस पूूरे मामले की जांच कर रही है।
सुरेंद्र दहिया, इंचार्ज सिटी थाना पानीपत।
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सिविल अस्पताल के 5 बाल रोग विशेषज्ञ शहर में तीन साल मिली 12 लावारिस नवजात बच्चियों के गवाह रहे है। इन डॉक्टरों की यादें भी इन बच्चियों के साथ जुडी है। जिन्होंने हर बच्ची की केअर के लिए 24 घंटे ड्यूटी की है। अपने पैसों से बच्चियों के लिए कपड़ों से लेकर खिलौनों तक की व्यवस्था की। नवजात बच्चियों के लावारिस हालत में मिलने के बाद डॉक्टरों ने इलाज के लिए आने वाले मरीजों को भी बेटियों के प्रति प्रेरित करना शुरू किया। इन डॉक्टरों की मेहनत से आज सभी छह बच्चियां पूरी तरह से स्वस्थ है। जिनको राई शिशू गृह से गोद लेने के लिए दिल्ली, करनाल, चंडीगढ़, जयपुर, सोनीपत समेत विभिन्न प्रकार से दंपति पहुंच रहे है। बच्चियों को गोद लेने की प्रक्रिया अब भी चल रही है।
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यह मिली बच्चियां:
8 फरवरी 2015 को जाटल रोड पर खाली प्लॉट में, 19 फरवरी 2015 को जाटल रोड पर बाल अनाथालय के सामने, दिसंबर 2015 में सनौली रोड स्थित साईं चौक पर खाली प्लॉट में, 14 सितंबर 2016 को सेक्टर 11-12 में डॉक्टर के मकान के सामने 2 लावारिस बच्चियां मिली, 15 सितंबर को सेक्टर 25 में एक बच्चा व 17 नवंबर 2016 को जीटी रोड पर एसडी कॉलेज के सामने लावारिस हालत में बच्ची मिली। 2017 में दो बच्चियां व 12 स्थानों बच्चों के भूर्ण मिले। 2018 में सितंबर माह में एक बच्ची समालखा रेलवे स्टेशन पर मिली। 15 नवंबर को कुटानी गांव के खेतों में एक नवजात को फेंक दिया गया। सिर में चोट लगने से बच्चे की मौत हो गई। 26 नवंबर को अंसल सोसाइटी के गेट नंबर दो पर, 8 दिसंबर को समालखा व डिडवाडी गांव के पास व 9 दिसंबर को किला के पास एक 8 साल की बच्ची मिली।
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आरोपी का पता लगाने वाले पर 5 हजार का इनाम:
नारी तू नारायणी समिति की अध्यक्ष सविता आर्य ने डॉक्टरों से बच्ची के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली। उन्होंने बेटी को दुत्कारने वाले का पता लगाने वाले को 5 हजार रुपये देने की घोषणा दी है। उन्होंने एडीजीपी नवदीप विर्क को भी पत्र लिखकर आरोपियों का पता लगाने की मांग की।
पुलिस नहीं कर पाई एक भी मामले को ट्रेस
तीन साल में शहर में अलग अलग स्थानों पर नवजातों को फेंका गया। पुलिस ने सभी मामलों में लोगों की शिकायत पर अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। लेकिन है की बात ये रही कि पुलिस एक भी मामले में आरोपियों तक नहीं पहुंच पाई। बच्चों से जुड़ी संस्थाओं ने पुलिस पर मामलों में लापरवाही बरतने के आरोप लगाए।
सीसीटीवी फुटेज खंगालेंगे: दहिया
बच्चों को लावारिस छोड़ने के मामले गंभीर है। असंल के आस पास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रहे हैं। मामले में अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। पुलिस पूूरे मामले की जांच कर रही है।
सुरेंद्र दहिया, इंचार्ज सिटी थाना पानीपत।