25 अगस्त 2017 को डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम को दोषी करार दिए जाने के बाद पंचकूला में की गई हिंसा के एक मामले के दस आरोपियों को पंचकूला जिला अदालत ने वीरवार को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। बरी होने वालों पंजाब के जिला पटियाला, जिला संगरूर, राजस्थान के जिला गंगानगर और हरियाणा के रोहतक के विभिन्न गांवों के निवासी भगवंत सिंह, देवीदयाल, जगजीत सिंह, नाजिर सिंह, कस्तूरी लाल, अमृतपाल, जगतार सिंह, मधुर हंस, दलबीर सिंह और गुरिंदर सिंह शामिल हैं। मामले में बचाव पक्ष के वकीलों उमेश महौर, मनोज कुमार गौड़, यज्ञदत्त शर्मा, यशपाल सिंह और रेनू भारद्वाज ने बताया कि आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी किया गया है। वीरवार को मामले में एडिशनल सेशंस जज, संजय संधीर की कोर्ट ने फैसला सुनाया। दर्ज मामले के अनुसार आरोपियों पर डेरा प्रमुख राम रहीम को दोषी करार दिए जाने के बाद पंचकूला के सेक्टर-5 स्थित हैफेड चौक पर फरीदाबाद फायर स्टेशन से पहुंची एक फायर ब्रिगेड पर पथराव कर उसे आग लगाने के आरोप थे। दमकल कर्मियों ने गाड़ी से छलांग लगाकर जान बचाई थी। लेकिन उपद्रवियों ने ड्यूटी पर तैनात दमकल कर्मी सुरेंद्र कुमार पर जानलेवा हमला कर दिया था। इससे सुरेंद्र घायल हो गए थे और उन्हें उपचार के लिए सिविल अस्पताल-6 भर्ती कराया गया था। आरोपियों के फायर ब्रिगेड को आग लगाने से गाड़ी का केबिन, केबिन में मौजूद पांच जोड़े बूट, पांच हेलमेट, तीन कंबल व स्टाफ के कपड़े, जूते और वर्दी जलकर खाक हो गए थे। हिंसा के समय फायर ब्रिगेड का चालक चालक रहे लाल, फायरमैन सुनील कुमार और फायरमैन सुरेंद्र कुमार ड्यूटी पर मौजूद थे। दमकल केंद्र के अधिकारी शमशेर सिंह की शिकायत पर आरोपियों पर सेक्टर-5 थाने में केस दर्ज किया था। पंचकूला हिंसा मामले में पहले की तर्ज पर पुलिस की जांच रिपोर्ट फिर झूठी साबित हुई है।