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Punjab: पूर्व मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा को राहत नहीं, मोहाली कोर्ट ने खारिज की जमानत याचिका
Wed, 16 Nov 2022 10:30 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Wed, 16 Nov 2022 10:30 PM IST
सार
अब सुंदर शाम अरोड़ा को जमानत के लिए उच्च अदालत की शरण लेनी होगी। हालांकि उनकी जमानत याचिका पर सरकारी व बचाव पक्ष के वकील में जमकर बहस हुई। सरकारी वकील ने उनकी याचिका को विरोध किया।
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पूर्व मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
विजिलेंस ब्यूरो के एआईजी को पचास लाख रिश्वत देने के आरोप में रंगे हाथों गिरफ्तार किए गए पूर्व मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा को मोहाली जिला अदालत से झटका लगा है। अदालत ने उनकी तरफ से दायर की गई जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। वहीं अब उन्हें जमानत के लिए उच्च अदालत की शरण लेनी होगी। हालांकि उनकी जमानत याचिका पर सरकारी व बचाव पक्ष के वकील में जमकर बहस हुई। सरकारी वकील ने उनकी याचिका को विरोध किया। विलिलेंस ब्यूरो ने उन्हें एक महीना पहले काबू किया था।
जानकारी के मुताबिक पूर्व मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति समेत तीन शिकायतों में विजिलेंस जांच कर रही थी। उनसे दो बार विजिलेंस पूछताछ भी हो चुकी थी। उन्हें पता था कि जो अधिकारी जांच कर रहे हैं, वह उनके शहर होशियारपुर के हैं। ऐसे में 14 अक्तूबर को उन्होंने विजिलेंस के एआईजी मनमोहन कुमार शर्मा को फोन कर कहा कि वह उनसे मिलना चाहते हैं। इसके बाद वह वह एआईजी के घर पहुंचे। उन्होंने एआईजी को बताया कि उनकी पत्नी की मौत हो गई है। वह काफी परेशान चल रहे हैं।
इसके बाद उन्होंने एआईजी को कहा कि वह उन्हें इस केस से निकालने में मदद करें। वह इसके बदले में उन्हें एक करोड़ रुपये देने को तैयार हैं। उनकी दलील थी कि वह व्यापारी आदमी हैं। उन्हें अच्छी तरह पता है कि पुलिस को कैसे हैंडल किया जाता है, लेकिन एआईजी उन्हें काफी देर तक समझाते रहे कि अगर वह सही हैं तो डरने की कोई बात नहीं है, लेकिन पूर्व मंत्री अपनी बात से पीछे नहीं हटे और वहां से चले गए। साथ ही कहा कि वह अगले दिन आधे पैसे लेकर आएंगे। इसके बाद एआईजी ने सारी बात उच्च अधिकारियों और सीएम मान तक पहुंचा दी। जिसके बाद वह ट्रैप लगाकर उन्हें काबू कर लिया था।
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जानकारी के मुताबिक पूर्व मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति समेत तीन शिकायतों में विजिलेंस जांच कर रही थी। उनसे दो बार विजिलेंस पूछताछ भी हो चुकी थी। उन्हें पता था कि जो अधिकारी जांच कर रहे हैं, वह उनके शहर होशियारपुर के हैं। ऐसे में 14 अक्तूबर को उन्होंने विजिलेंस के एआईजी मनमोहन कुमार शर्मा को फोन कर कहा कि वह उनसे मिलना चाहते हैं। इसके बाद वह वह एआईजी के घर पहुंचे। उन्होंने एआईजी को बताया कि उनकी पत्नी की मौत हो गई है। वह काफी परेशान चल रहे हैं।
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इसके बाद उन्होंने एआईजी को कहा कि वह उन्हें इस केस से निकालने में मदद करें। वह इसके बदले में उन्हें एक करोड़ रुपये देने को तैयार हैं। उनकी दलील थी कि वह व्यापारी आदमी हैं। उन्हें अच्छी तरह पता है कि पुलिस को कैसे हैंडल किया जाता है, लेकिन एआईजी उन्हें काफी देर तक समझाते रहे कि अगर वह सही हैं तो डरने की कोई बात नहीं है, लेकिन पूर्व मंत्री अपनी बात से पीछे नहीं हटे और वहां से चले गए। साथ ही कहा कि वह अगले दिन आधे पैसे लेकर आएंगे। इसके बाद एआईजी ने सारी बात उच्च अधिकारियों और सीएम मान तक पहुंचा दी। जिसके बाद वह ट्रैप लगाकर उन्हें काबू कर लिया था।
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