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भट्ठे से छुड़वाए 4 बंधुआ मजदूर परिवार के 24 लोग
Updated Thu, 01 Feb 2018 10:04 PM IST
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भट्ठे से छुड़ाए 4 बंधुआ मजदूर परिवार के 24 लोग
होशियारपुर। वालंटियर फार सोशल जस्टिस की और से होशियारपुर के गांव मांझी में एक ईंटों के भट्ठे से चार मजदूर परिवारों के 24 लोगों को कथित तौर पर बंधुआ मजदूरी से मुक्त करवाया गया। जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल है। इन में से दो परिवार उत्तर प्रदेश में बरेली जिले के जबकि दो बदायूं के रहने वाले बताए जाते हैं। संस्था की प्रोग्राम मैनेजर रीना पाणिग्रही ने बताया कि उक्त लोग एक सितंबर 2015 को भट्ठे पर काम करने के लिए लाए गए थे। उस वक्त इनके जमांदार चरन सिंह ने इन्हें अग्रिम राशि के तौर पर क्रमश: 5 हजार, 6 हजार व 7 हजार रुपये दिए थे। जिसके बाद से यह लोग भट्ठे पर काम करते आ रहे थे। उन्होंने बताया कि इन 4 परिवारों से संबंधित 24 लोगों को भट्ठे पर जब्री काम करवाया जाता था और इन्हें भट्ठे से बाहर नहीं जाने दिया जाता था। काम के एवज में इन्हें कथित तौर पर कोई वेतन भी नहीं मिलता था। इस तरह 2 वर्ष से इन लोगों को वालंटियजर फार सोशल जस्टिस के बारे में पता चला तो उन्होंने संस्था से संपर्क कर उन्हें छुड़ाने की गुहार लगाई। इस पर संस्था के निर्देशक जयसिंह, कानूनी सहायक योगेश प्रसाद, और अन्यों सदस्यों पर आधारित टीम यहां पहुंची और जिला प्रशासन से संपर्क किया। इसके बाद इस टीम के सदस्यों के साथ तहसीलदार अरविंद वर्मा और लेबर अफसर नवदीप सिंह ने उक्त भट्ठे रेड कर उन्हें वहां से मुक्त करवाया।
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भट्ठे से छुड़ाए 4 बंधुआ मजदूर परिवार के 24 लोग
होशियारपुर। वालंटियर फार सोशल जस्टिस की और से होशियारपुर के गांव मांझी में एक ईंटों के भट्ठे से चार मजदूर परिवारों के 24 लोगों को कथित तौर पर बंधुआ मजदूरी से मुक्त करवाया गया। जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल है। इन में से दो परिवार उत्तर प्रदेश में बरेली जिले के जबकि दो बदायूं के रहने वाले बताए जाते हैं। संस्था की प्रोग्राम मैनेजर रीना पाणिग्रही ने बताया कि उक्त लोग एक सितंबर 2015 को भट्ठे पर काम करने के लिए लाए गए थे। उस वक्त इनके जमांदार चरन सिंह ने इन्हें अग्रिम राशि के तौर पर क्रमश: 5 हजार, 6 हजार व 7 हजार रुपये दिए थे। जिसके बाद से यह लोग भट्ठे पर काम करते आ रहे थे। उन्होंने बताया कि इन 4 परिवारों से संबंधित 24 लोगों को भट्ठे पर जब्री काम करवाया जाता था और इन्हें भट्ठे से बाहर नहीं जाने दिया जाता था। काम के एवज में इन्हें कथित तौर पर कोई वेतन भी नहीं मिलता था। इस तरह 2 वर्ष से इन लोगों को वालंटियजर फार सोशल जस्टिस के बारे में पता चला तो उन्होंने संस्था से संपर्क कर उन्हें छुड़ाने की गुहार लगाई। इस पर संस्था के निर्देशक जयसिंह, कानूनी सहायक योगेश प्रसाद, और अन्यों सदस्यों पर आधारित टीम यहां पहुंची और जिला प्रशासन से संपर्क किया। इसके बाद इस टीम के सदस्यों के साथ तहसीलदार अरविंद वर्मा और लेबर अफसर नवदीप सिंह ने उक्त भट्ठे रेड कर उन्हें वहां से मुक्त करवाया।