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‘किसान हो रहा गरीब, पूंजीपतियों की बढ़ी कमाई’
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पलवल में किसानों के धरना को संबोधित करते हुए स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती
- फोटो : Palwal
पलवल। किसान नेता महेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि भाजपा सरकार केवल पूंजीपतियों के हितों के लिए कार्य कर रही है। कोरोना के कारण जहां हर वर्ग आर्थिक तंगी से जूझ रहा है, वहीं सरकार के नजदीकी पूंजीपति और ज्यादा अमीर हो रहे हैं। पूंजीपतियों की पूंजी में बेतहाशा वृद्धि हुई है। चौहान मंगलवार को केेएमपी-केजीपी इंटरचेंज पर चल रहे किसान धरने को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर मेवात से आए किसानों ने धरने को समर्थन दिया। धरने की अध्यक्षता गांव कोट से आए हाजी खलील अहमद ने की, जबकि संचालन राजकुमार ओलिहान ने किया।
वक्ताओं ने किसानों में जोश भरने का काम किया। उन्होंने कहा कि आज भाजपा सरकार अंग्रेजी शासन काल की याद दिला रही है। अंग्रेजी शासन काल में चले किसान आंदोलन को 40 देशों का समर्थन मिला था। आज 19 देशों में विभिन्न सामाजिक संगठनों, नेताओं और कार्यकर्ताओं का समर्थन मिल रहा है, परंतु भाजपा सरकार झुकने को तैयार नहीं है। सरकार ने कोरोना काल में तीन कृषि कानूनों को पारित कर दिया, जिनकी योजना एक साल पहले ही बन चुकी थी।
स्वामी श्रद्धानंद ने कहा है कि कृषि करना अत्यंत कठिन और तपस्या का कार्य है, जितनी मेहनत खेती में करनी पड़ती है उतनी अन्य कार्यों में नहीं। उन्होंने कहा कि कृषि धर्म और कृषि संस्कृति को विकसित करने के लिए कृषकों को आत्मनिर्भर बनाना परम आवश्यक है। सरकार की गलत नीतियों के कारण किसान आर्थिक रुप से बहुत ही कमजोर हो चुका है। सरकार को राजहट छोड़कर किसानों की खुशहाली के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य का कानून बनाना चाहिए।
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इस अवसर पर निसार कोट ने चौपाई प्रस्तुत की। धरने को छैल सिंह बाजना, रोशनलाल अल्लीका, सोहनपाल चौहान, धर्मचंद प्रधान घुघेरा, रघुबीर सिंह, बलवीर सिंह बांसवा, अच्छेलाल जोधपुर सहित अन्य ने संबोधित किया।
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वक्ताओं ने किसानों में जोश भरने का काम किया। उन्होंने कहा कि आज भाजपा सरकार अंग्रेजी शासन काल की याद दिला रही है। अंग्रेजी शासन काल में चले किसान आंदोलन को 40 देशों का समर्थन मिला था। आज 19 देशों में विभिन्न सामाजिक संगठनों, नेताओं और कार्यकर्ताओं का समर्थन मिल रहा है, परंतु भाजपा सरकार झुकने को तैयार नहीं है। सरकार ने कोरोना काल में तीन कृषि कानूनों को पारित कर दिया, जिनकी योजना एक साल पहले ही बन चुकी थी।
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स्वामी श्रद्धानंद ने कहा है कि कृषि करना अत्यंत कठिन और तपस्या का कार्य है, जितनी मेहनत खेती में करनी पड़ती है उतनी अन्य कार्यों में नहीं। उन्होंने कहा कि कृषि धर्म और कृषि संस्कृति को विकसित करने के लिए कृषकों को आत्मनिर्भर बनाना परम आवश्यक है। सरकार की गलत नीतियों के कारण किसान आर्थिक रुप से बहुत ही कमजोर हो चुका है। सरकार को राजहट छोड़कर किसानों की खुशहाली के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य का कानून बनाना चाहिए।
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इस अवसर पर निसार कोट ने चौपाई प्रस्तुत की। धरने को छैल सिंह बाजना, रोशनलाल अल्लीका, सोहनपाल चौहान, धर्मचंद प्रधान घुघेरा, रघुबीर सिंह, बलवीर सिंह बांसवा, अच्छेलाल जोधपुर सहित अन्य ने संबोधित किया।