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जुलूस निकालकर धरनास्थल पर पहुंचे किसान
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पलवल में धरनास्थल पर झोपड़ी बनाकर बैठे किसान।
- फोटो : Palwal
पलवल। दलित समाज के बाद मंगलवार को फरीदाबाद व पलवल जिला से ब्राह्मण समाज ने किसान आंदोलन को समर्थन दिया। केएमपी-केजीपी इंटरचेंज पर जारी धरने के नौवें दिन ब्राह्मण समाज से सैकड़ों लोग जुलूस निकाल कर धरना स्थल पर पहुंचे। इस दौरान जय जवान-जय किसान के नारों से पूरा पंडाल गूंज उठा। ब्राह्मण नेता अरुण भारद्वाज, गिरीश भारद्वाज व रामनारायण के नेतृत्व में पहुंचे समाज के लोगों ने धरने को निरंतर समर्थन देने की घोषणा की। 52 पाल के अध्यक्ष अरुण जेलदार के नेतृत्व में चल रहे धरने की अध्यक्ष अरुण भारद्वाज भिडूकी ने की, जबकि संचालन रूपराम तेवतिया ने किया। अटोहां चौक पर दोबारा शुरू हुए धरने में किसानों की संख्या बढ़ती जा रही है। धरना स्थल पर तंबूओं की संख्या में भी इजाफा हो रहा है। आलम यह है कि राष्ट्रीय राजमार्ग के साथ सर्विस रोड पर तंबू लगाने के लिए जगह ही नहीं बची है। अब किसान तंबू लगाने के लिए जगह तलाश रहे हैं।
बैठक कर हल निकाले सरकार
ब्राह्मण नेता गिरीश भारद्वाज ने कहा कि सरकार किसान आंदोलन को एक जाति का साबित करने पर तुली है, जबकि सभी समाजों की तरफ से धरने को समर्थन दिया जा रहा है। सरकार अपनी जिद पर अड़ी हुई है, जोकि लोकतंत्र के हिसाब से सही नहीं है। जनता द्वारा जनता के हिसाब राज चलाना लोकतंत्र है। सरकार को किसानों के साथ बैठ कर इसका हल निकालना चाहिए, ताकि सरकार सड़कों से उठकर खेत में जा सके। पूर्व विधायक उदयभान के कहा कि 36 बिरादरी के तरफ से किसानों को समर्थन मिल रहा है। किसान कृषि कानूनों के निरस्त होने के बाद ही सड़कों से हटेंगे। धरने को मेवात विकास सभा के संरक्षण सद्दीक अहमद, आसिफ अली, हाजी नईम इकबाल, राजकुमार घुघेरा, हरीओम शाहपुर, रमेश प्रधान मांदकौल, रामनारायण बंचारी, गंगा किशन हीरापुर, मास्टर महेंद्र चौहान, स्वामी श्रद्धानंद, रतन सिंह सौरोत सहित अन्य ने संबोधित किया।
बड़गुर्जर पाल ने किया सहयोग
बड़गुर्जर पाल की तरफ से मंगलवार को धरने को समर्थन दिया गया। इस अवसर पर 12 गांवों की तरफ से धरने के लिए एक लाख 51 हजार रुपये का सहयोग दिया गया। सहयोग मूलचंद बड़गुर्जर, अमरू पहलवान, रति खां सरपंच स्यापनकी, किशन प्रधान फिरोजपुर के नेतृत्व में किया गया। इस अवसर पर गांव गन्नीकी की तरफ से भंडारे के लिए खाद्य सामग्री दी गई।
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युवाओं की ड्यूटी निर्धारित
धरनास्थल पर किसानों के लिए लगाए जा रहे भंडारे में युवा भरपूर सहयोग कर रहे हैं। भंडारा तैयार करवाने में भी युवा भरपूर सहयोग कर रहे हैं। सब्जी काटने से लेकर पानी भरने व भंडारे में बिठाकर भोजन कराने में युवा जुटे रहते हैं। इतना ही नहीं युवा धरना स्थल पर सफाई का भी विशेष ध्यान रखते हैं। युवा कुल्लू चौहान ने बताया कि धरने में युवाओं की ड्यूटी निर्धारित की हुई है, जो पूरी तत्परता से अपना काम करते हैं।
रावत पाल ने बनाई झोपड़ी
धरनास्थल पर पालों के हिसाब से तंबूओं की संख्या बढ़ रही है। किसी ने वाटरप्रूफ तंबू लगाया है तो किसी ने ट्रॉली को ही घर बना लिया है। अब रावत पाल की तरफ से झोपड़ी बना ली गई है। झोपड़ी में एलसीडी व डीटीएच भी लगाई गई है, जिस पर किसान अन्य स्थानों पर चल रहे धरनों पर नजर बनाए रखते हैं। उदयचंद रावत ने बताया कि किसान पूरी तैयारी के साथ धरना स्थल पर मौजूद हैं।
गीतों के जरिये सरकार पर कटाक्ष
धरनास्थल पर पहुंच रहे किसान तरह-तरह से मनोरंजन कर रहे हैं। गीतों व तुकबंदी के जरिये हंसी ठिठौली चलती रहती है। मंगलवार को नंदलाल होडल ने यू बीजेपी सरकार फेर नहीं आने की गीत के जरिये वाहवाही बटोरी। किसानों ने जमकर तालियां बजाई। इनके अलावा हेतराम पहलवान सहित अन्य ने गीत व कविता सुनाई।
गांवों में चलाया जा रहा जागरूकता अभियान
52 पाल के अध्यक्ष अरुण जेलदार ने बताया कि कृषि कानूनों के विरोध में गांवों में जागरूकता अभियान चलाया रहा है। लोगों से ज्यादा से ज्यादा संख्या में धरने में पहुंचने की अपील की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री व सरकार के मंत्री तरह-तरह के बयानबाजी कर लोगों को गुमराह कर रहे हैं। सरकार किसानों से साथ छलावा कर रही है। यदि सरकारी मंडी बंद हो गई तो किसान की हालत बेहद खराब हो जाएगी। इसलिए किसानों को लगातार जागरूक किया जा रहा है।
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बैठक कर हल निकाले सरकार
ब्राह्मण नेता गिरीश भारद्वाज ने कहा कि सरकार किसान आंदोलन को एक जाति का साबित करने पर तुली है, जबकि सभी समाजों की तरफ से धरने को समर्थन दिया जा रहा है। सरकार अपनी जिद पर अड़ी हुई है, जोकि लोकतंत्र के हिसाब से सही नहीं है। जनता द्वारा जनता के हिसाब राज चलाना लोकतंत्र है। सरकार को किसानों के साथ बैठ कर इसका हल निकालना चाहिए, ताकि सरकार सड़कों से उठकर खेत में जा सके। पूर्व विधायक उदयभान के कहा कि 36 बिरादरी के तरफ से किसानों को समर्थन मिल रहा है। किसान कृषि कानूनों के निरस्त होने के बाद ही सड़कों से हटेंगे। धरने को मेवात विकास सभा के संरक्षण सद्दीक अहमद, आसिफ अली, हाजी नईम इकबाल, राजकुमार घुघेरा, हरीओम शाहपुर, रमेश प्रधान मांदकौल, रामनारायण बंचारी, गंगा किशन हीरापुर, मास्टर महेंद्र चौहान, स्वामी श्रद्धानंद, रतन सिंह सौरोत सहित अन्य ने संबोधित किया।
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बड़गुर्जर पाल ने किया सहयोग
बड़गुर्जर पाल की तरफ से मंगलवार को धरने को समर्थन दिया गया। इस अवसर पर 12 गांवों की तरफ से धरने के लिए एक लाख 51 हजार रुपये का सहयोग दिया गया। सहयोग मूलचंद बड़गुर्जर, अमरू पहलवान, रति खां सरपंच स्यापनकी, किशन प्रधान फिरोजपुर के नेतृत्व में किया गया। इस अवसर पर गांव गन्नीकी की तरफ से भंडारे के लिए खाद्य सामग्री दी गई।
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युवाओं की ड्यूटी निर्धारित
धरनास्थल पर किसानों के लिए लगाए जा रहे भंडारे में युवा भरपूर सहयोग कर रहे हैं। भंडारा तैयार करवाने में भी युवा भरपूर सहयोग कर रहे हैं। सब्जी काटने से लेकर पानी भरने व भंडारे में बिठाकर भोजन कराने में युवा जुटे रहते हैं। इतना ही नहीं युवा धरना स्थल पर सफाई का भी विशेष ध्यान रखते हैं। युवा कुल्लू चौहान ने बताया कि धरने में युवाओं की ड्यूटी निर्धारित की हुई है, जो पूरी तत्परता से अपना काम करते हैं।
रावत पाल ने बनाई झोपड़ी
धरनास्थल पर पालों के हिसाब से तंबूओं की संख्या बढ़ रही है। किसी ने वाटरप्रूफ तंबू लगाया है तो किसी ने ट्रॉली को ही घर बना लिया है। अब रावत पाल की तरफ से झोपड़ी बना ली गई है। झोपड़ी में एलसीडी व डीटीएच भी लगाई गई है, जिस पर किसान अन्य स्थानों पर चल रहे धरनों पर नजर बनाए रखते हैं। उदयचंद रावत ने बताया कि किसान पूरी तैयारी के साथ धरना स्थल पर मौजूद हैं।
गीतों के जरिये सरकार पर कटाक्ष
धरनास्थल पर पहुंच रहे किसान तरह-तरह से मनोरंजन कर रहे हैं। गीतों व तुकबंदी के जरिये हंसी ठिठौली चलती रहती है। मंगलवार को नंदलाल होडल ने यू बीजेपी सरकार फेर नहीं आने की गीत के जरिये वाहवाही बटोरी। किसानों ने जमकर तालियां बजाई। इनके अलावा हेतराम पहलवान सहित अन्य ने गीत व कविता सुनाई।
गांवों में चलाया जा रहा जागरूकता अभियान
52 पाल के अध्यक्ष अरुण जेलदार ने बताया कि कृषि कानूनों के विरोध में गांवों में जागरूकता अभियान चलाया रहा है। लोगों से ज्यादा से ज्यादा संख्या में धरने में पहुंचने की अपील की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री व सरकार के मंत्री तरह-तरह के बयानबाजी कर लोगों को गुमराह कर रहे हैं। सरकार किसानों से साथ छलावा कर रही है। यदि सरकारी मंडी बंद हो गई तो किसान की हालत बेहद खराब हो जाएगी। इसलिए किसानों को लगातार जागरूक किया जा रहा है।