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Mahendragarh-Narnaul News: नन्हीं तीरंदाज हेनिका की नजर अब नेशनल गोल्ड पर
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फोटो 03 हेनिका यादव
- फोटो : 1
नारनौल। नांगल चौधरी क्षेत्र की 10 वर्षीय हेनिका यादव पढ़ाई के साथ तीरंदाजी में भी अपनी अलग पहचान बना रही है। 16 जनवरी 2016 को एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मी हेनिका ने महज आठ साल की उम्र में तीर-कमान थामा था। अब उसकी नजर 2027 में होने वाली राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता पर है। इसके लिए वह नियमित अभ्यास कर रही है।
हेनिका के पिता रेवाड़ी की एक निजी कंपनी में काम करते हैं, जबकि मां गृहिणी हैं। उसका छोटा भाई दूसरी कक्षा में पढ़ता है। हेनिका ने बताया कि स्कूल में कोच को बच्चों को तीरंदाजी सिखाते देखकर उसने अपने पिता को इसकी जानकारी दी। पिता ने उसे यह खेल सीखने के लिए प्रेरित किया और समझाया कि तीरंदाजी से खेल के साथ एकाग्रता भी बढ़ती है।
पिता की बात से प्रेरित होकर हेनिका ने कोच ईश्वर सिंह के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण शुरू किया। शुरुआत में उसे अभ्यास में थोड़ी बोरियत महसूस हुई, लेकिन उसने हार नहीं मानी। अब वह रोजाना नियमित अभ्यास करती है। स्कूल शुरू होने से पहले ग्राउंड में करीब एक घंटे प्रशिक्षण लेती है और स्कूल के बाद घर पर भी एक घंटे अभ्यास करती है। परीक्षा के दिनों में वह अभ्यास छोड़कर पढ़ाई पर ध्यान देती है।
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कम समय में दो पदक
हेनिका ने वर्ष 2025 में नारनौल में आयोजित जिला स्तरीय प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीता। इसके बाद पलवल में हुई राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में उसने रजत पदक अपने नाम किया। उस समय वह पांचवीं कक्षा में पढ़ रही थी। हेनिका का सपना है कि वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के लिए स्वर्ण पदक जीते और अपने पिता का सिर गर्व से ऊंचा करे।
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हेनिका के पिता रेवाड़ी की एक निजी कंपनी में काम करते हैं, जबकि मां गृहिणी हैं। उसका छोटा भाई दूसरी कक्षा में पढ़ता है। हेनिका ने बताया कि स्कूल में कोच को बच्चों को तीरंदाजी सिखाते देखकर उसने अपने पिता को इसकी जानकारी दी। पिता ने उसे यह खेल सीखने के लिए प्रेरित किया और समझाया कि तीरंदाजी से खेल के साथ एकाग्रता भी बढ़ती है।
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पिता की बात से प्रेरित होकर हेनिका ने कोच ईश्वर सिंह के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण शुरू किया। शुरुआत में उसे अभ्यास में थोड़ी बोरियत महसूस हुई, लेकिन उसने हार नहीं मानी। अब वह रोजाना नियमित अभ्यास करती है। स्कूल शुरू होने से पहले ग्राउंड में करीब एक घंटे प्रशिक्षण लेती है और स्कूल के बाद घर पर भी एक घंटे अभ्यास करती है। परीक्षा के दिनों में वह अभ्यास छोड़कर पढ़ाई पर ध्यान देती है।
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कम समय में दो पदक
हेनिका ने वर्ष 2025 में नारनौल में आयोजित जिला स्तरीय प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीता। इसके बाद पलवल में हुई राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में उसने रजत पदक अपने नाम किया। उस समय वह पांचवीं कक्षा में पढ़ रही थी। हेनिका का सपना है कि वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के लिए स्वर्ण पदक जीते और अपने पिता का सिर गर्व से ऊंचा करे।