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Haryana: मशरूम की खेती से किसान हुआ मालामाल, कमाई लगभग एक करोड़, प्रशिक्षण के साथ दे रहा रोजगार
Sat, 21 Jun 2025 05:10 PM IST
शाहिल शर्मा
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़
Published by: शाहिल शर्मा
Updated Sat, 21 Jun 2025 05:10 PM IST
सार
किसान योगेंद्र यादव ने साल 2022 में मशरूम का उत्पादन शुरू किया था। गिरते भूजल के कारण किसान ने कुछ अलग करने की ठानी और तीन साल में सफलता की इबारत लिख दी। आज किसान की सालाना आय 55 लाख रुपये पहुंच गई है। डिटेल में पढ़ें खबर...
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मशरूम के उत्पादन से किसान बना लखपति
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
(मनोज राजपूत) डार्क जोन में शामिल जिले में लगातार गिरते भूजल के कारण बोरवेल ठप्प हो रहे हैं। किसान अब पारंपरिक खेती को छोड़कर नई तकनीकों का उपयोग कर अच्छा मुनाफा ले रहे हैं। महेंद्रगढ़ के गांव खायरा निवासी किसान योगेंद्र यादव ने वर्ष 2022 में जब गिरते भूजल के कारण बोरवेल ठप्प हुआ तो कुछ अलग करने की ठानी। महज चार साल के समय में योगेंद्र यादव ने 20 क्विंटल उत्पादन से 1100 क्विंटल मशरूम का उत्पादन एवं 55 लाख रुपये का सालाना कारोबार खड़ा कर दिया। गत दिसंबर माह के दौरान प्रदेशभर में सबसे अधिक वैरायटी की मशरूम उत्पादन के लिए किसान को प्रगतिशील किसान अवॉर्ड से नवाजा गया था। मशरूम की अच्छी गुणवत्ता होने के कारण दिल्ली, गुरूग्राम व रेवाड़ी जैसे शहरों में लगातार मांग भी बढ़ रही है।
योगेंद्र यादव गुरुग्राम में चलाते थे टैक्सी
गांव खायरा निवासी किसान योगेंद्र यादव ने बताया कि साल 2005 में स्नातक की पढ़ाई करने के बाद सरकारी नौकरी के काफी प्रयास किए लेकिन सफलता नहीं मिली तो गुरुग्राम में टैक्सी चालक की नौकरी। लेकिन कुछ समय बाद वहां से नौकरी छोड़कर तीन एकड़ में खेती शुरू कर दी। वर्ष 2022 में भूमिगत पानी के अभाव में बोरवेल ठप्प हो गया। तब मन में कुछ अलग करने की ठानी और कृषि विज्ञान केंद्र महेंद्रगढ़, मशरूम सेंटर मुरथल व गुरुग्राम में प्रशिक्षण लेकर मशरूम का उत्पादन शुरू कर दिया। शहर के राव तुलाराम चौक के नजदीक महेंद्रगढ़ मशरूम फार्म के नाम से शुरू की गई यूनिट से पहली बार 20 क्विंटल से करीब ढाई लाख रुपये की सालाना आय हुई। वर्ष 2023 में 10 हजार ट्रे से 200 क्विंटल मशरूम का उत्पादन कर आय को भी 15 लाख रुपया सालाना तक पहुंचा दिया।
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योगेंद्र यादव गुरुग्राम में चलाते थे टैक्सी
गांव खायरा निवासी किसान योगेंद्र यादव ने बताया कि साल 2005 में स्नातक की पढ़ाई करने के बाद सरकारी नौकरी के काफी प्रयास किए लेकिन सफलता नहीं मिली तो गुरुग्राम में टैक्सी चालक की नौकरी। लेकिन कुछ समय बाद वहां से नौकरी छोड़कर तीन एकड़ में खेती शुरू कर दी। वर्ष 2022 में भूमिगत पानी के अभाव में बोरवेल ठप्प हो गया। तब मन में कुछ अलग करने की ठानी और कृषि विज्ञान केंद्र महेंद्रगढ़, मशरूम सेंटर मुरथल व गुरुग्राम में प्रशिक्षण लेकर मशरूम का उत्पादन शुरू कर दिया। शहर के राव तुलाराम चौक के नजदीक महेंद्रगढ़ मशरूम फार्म के नाम से शुरू की गई यूनिट से पहली बार 20 क्विंटल से करीब ढाई लाख रुपये की सालाना आय हुई। वर्ष 2023 में 10 हजार ट्रे से 200 क्विंटल मशरूम का उत्पादन कर आय को भी 15 लाख रुपया सालाना तक पहुंचा दिया।
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55 लाख रुपये हो रही सालाना आया
साल 2024 में खाद यूनिट स्थापित कर दी तथा उत्पादन करीब 900 क्विंटल हुआ जिससे 25 लाख रुपये की आय मिली। पिछले एक साल के दौरान आधुनिक तकनीकि व वर्षभर उत्पादन देने वाली दो नई यूनिट शुरू कर दी हैं तथा उत्पादन भी 1100 क्विंटल व आय 55 लाख रुपये हुई है। लक्ष्य है कि अगले एक साल में 1500 क्विंटल उत्पादन किया जाए। सप्ताह में तीन दिन दिल्ली, गुरुग्राम व रेवाड़ी आपूर्ति की जा रही है।
साल 2024 में खाद यूनिट स्थापित कर दी तथा उत्पादन करीब 900 क्विंटल हुआ जिससे 25 लाख रुपये की आय मिली। पिछले एक साल के दौरान आधुनिक तकनीकि व वर्षभर उत्पादन देने वाली दो नई यूनिट शुरू कर दी हैं तथा उत्पादन भी 1100 क्विंटल व आय 55 लाख रुपये हुई है। लक्ष्य है कि अगले एक साल में 1500 क्विंटल उत्पादन किया जाए। सप्ताह में तीन दिन दिल्ली, गुरुग्राम व रेवाड़ी आपूर्ति की जा रही है।
युवाओं को भी दे रहे प्रशिक्षण
योगेंद्र यादव ने बताया कि फार्म पर सफेद बटन, पिंक ओयेस्टर, व्हाइट ओयेस्टर, मिल्की व ऋषि मशरूम सहित सात प्रकार की वैरायटी तैयार की जा रही हैं। जब लंबे समय तक मशरूम को सुरक्षित रखना चुनौती बना तो उत्पादन बनाना शुरू कर दिया। मशरूम से सात प्रकार की नमकीन, तीन प्रकार के बिस्किट, लड्डु, अचार, सूखा पाउडर बनाना शुरू कर दिया। इन उत्पादों की मांग लगातार बढ़ती रही तो खुद प्रोडेक्ट बनाने के लिए यूनिट स्थापित कर दी। मशरूम यूनिट पर दस से अधिक महिलाओं को रोजगार भी दिया है। साथ ही बेटा विनय व विहान तथा पत्नी ममता भी सहयोग कर रहे हैं। योगेंद्र यादव द्वारा फार्म पर प्रतिमाह करीब 50 युवाओं को भी मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण देकर तैयार किया जा रहा है।
ये भी पढ़ें: वीरांगना की शौर्यगाथा: कारगिल युद्ध में पति हुआ था शहीद, 24 साल बाद मां ने बेटे को बनाया लेफ्टिनेंट
योगेंद्र यादव ने बताया कि फार्म पर सफेद बटन, पिंक ओयेस्टर, व्हाइट ओयेस्टर, मिल्की व ऋषि मशरूम सहित सात प्रकार की वैरायटी तैयार की जा रही हैं। जब लंबे समय तक मशरूम को सुरक्षित रखना चुनौती बना तो उत्पादन बनाना शुरू कर दिया। मशरूम से सात प्रकार की नमकीन, तीन प्रकार के बिस्किट, लड्डु, अचार, सूखा पाउडर बनाना शुरू कर दिया। इन उत्पादों की मांग लगातार बढ़ती रही तो खुद प्रोडेक्ट बनाने के लिए यूनिट स्थापित कर दी। मशरूम यूनिट पर दस से अधिक महिलाओं को रोजगार भी दिया है। साथ ही बेटा विनय व विहान तथा पत्नी ममता भी सहयोग कर रहे हैं। योगेंद्र यादव द्वारा फार्म पर प्रतिमाह करीब 50 युवाओं को भी मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण देकर तैयार किया जा रहा है।
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