वीरांगना की शौर्यगाथा: कारगिल युद्ध में पति हुआ था शहीद, 24 साल बाद मां ने बेटे को बनाया लेफ्टिनेंट
आनंद कुमार कारगिल युद्ध में ऑपरेशन रक्षक के दौरान 14 अगस्त 1999 को शहीद हो गए थे। शहीद की पत्नी शर्मिला देवी ने 24 साल बाद अपने बेटे को भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनाया है। आप भी पढ़ें वीरांगना की ये शौर्यगाथा...
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शर्मिला देवी बताती हैं सेना में सिपाही पति आनंद कुमार कारगिल युद्ध में ऑपरेशन रक्षक के दौरान 14 अगस्त 1999 को शहीद हो गए थे। उस वक्त उनकी उम्र महज 23 वर्ष थी। बड़ी बेटी जोनी 6 साल, दूसरी बेटी सुमित 4 साल और छोटा बेटा अरुण महज 13 माह का था। पति आनंद के बलिदान का समाचार मिला तो लगा मानो दुनिया उजड़ गई है। फिर अपने मासूम बच्चों का चेहरा देखा तो उनके लिए जीने की ठानी। शर्मिला बताती हैं परिवार पालने के लिए उन्होंने खुद खेती बाड़ी और पशुपालन की बागडोर थामी। मन में तय किया कि अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देनी है और पति का नाम रोशन करना है।
बेटा अरुण बना लेफ्टिनेंट
शर्मिला ने बताया कि उनका इकलौता बेटा अरुण बीटेक करने के बाद एसएसबी की परीक्षा पास कर भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बन चुका है। वहीं, बड़ी बेटी जोनी बीएड, एमएससी, सीटेट और रीट की परीक्षा पास कर शिक्षक बनने की तैयारी कर रही है। छोटी बेटी सुमित भी एमएससी नर्सिंग कर नर्सिंग से ही पीएचडी कर रही है।
परिवार की तीसरी पीढ़ी सेना में
शर्मिला देवी ने बताया कि उनके पति आनंद कुमार सेना में सिपाही थे। वहीं, उनके पिता हजारी लाल भी भारतीय सेना में थे। पति आनंद कुमार के सिर से महज छह साल की उम्र में पिता हजारी लाल का साया उठ गया था। बेटे अरुण का सपना पिता की तरह भारतीय सेना में जाने का था। उसने कड़ी मेहनत की और सेना में लेफ्टिनेंट बनकर तीसरी पीढ़ी के रूप में देश सेवा कर रहा है।
"मां ने पिता की कमी नहीं होने दी महसूस"
शर्मिला देवी की छोटी बेटी सुमित कुमारी मां के संघर्षों को बयां करते हुए भावुक हो जाती हैं। कहती हैं उनकी मां ने ही पिता बनकर परिवार की सारी जिम्मेदारियां निभाई हैं। जब भी कभी बाहर परीक्षा देने के लिए सहारे की जरूरत हुई तो मां हमेशा साथ रहीं। जब स्कूल में पीटीएम होती तो मां ही जाया करती थीं। पशुपालन से लेकर खेती कर तीनों बच्चों को पढ़ाया। मां ने कभी पिता की कमी महसूस नहीं होने दी।
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