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भाईचारे की पंचायत: नारनौल के गांव सिलारपुर मेहता में छह पंचों समेत पूरी पंचायत पर बनी सर्वसम्मति
Tue, 18 Oct 2022 10:58 PM IST
भूपेंद्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, नारनौल (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, नारनौल (हरियाणा)
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Tue, 18 Oct 2022 10:58 PM IST
सार
आधिकारिक मुहर लगते ही पहली बार गांव में सर्वसम्मति की पंचायत होगी। ग्रामीण बोले कि 12 साल से सर्वसम्मति से चुनाव का प्रयास चल रहा है। इस बार सहमति बन गई है।
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नारनौल के गांव सिलारपुर मेहता में छह पंचों समेत पूरी पंचायत पर बनी सर्वसम्मति।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
हरियाणा के जिला नारनौल-महेंद्रगढ़ के गांव सिलारपुर मेहता में मंगलवार को करण सिंह के घर नंबरदार बीर सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में ग्रामीणों ने छह पंचों सहित पूरी पंचायत को सर्वसम्मति से चुनने पर सहमति बनी। सरपंच करण सिंह की पुत्रवधू सुनीता को बनाने का फैसला किया गया।
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हालांकि अभी आधिकारिक मुहर लगना बाकी है। बुधवार को नामांकन दाखिल करने का अंतिम दिन है। नामांकन की कार्रवाई पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई संभव हो पाएगी। अगर गांव का यह सामूहिक प्रयास सफल हो गया तो गांव में एक मिसाल कायम होगी और सरकार की ओर से इनाम राशि भी गांव को दी जाएगी।
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गांव सिलारपुर मेहता के नंबरदार बीर सिंह ने बताया कि सोमवार की रात गांव के सर्व समाज की बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में करण सिंह की पुत्रवधू सुुनीता पत्नी सुरेंद्र को सरपंच बनाने की सर्वसम्मति से सहमति बनी है। उन्होंने बताया कि गांव में छह पंचों पर भी आम सहमति बन गई है। वार्ड 1 से मनीषा, 2 से दीनाराम, 3 से धर्मेंद्र, वार्ड 4 से पूनम, वार्ड 5 से राजबाला और वार्ड 6 से शेर सिंह पर सहमति बनी है।
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पूरा गांव इस सहमति से खुश है। बैठक में सरपंच की सहमति बनने के बाद करण सिंह को गांव की ओर से पगड़ी पहनाई गई तथा उनको माला पहनाकर सम्मानित किया गया। इस मौके पर पूर्व सरपंच माडूराम, पूर्व सरपंच अजय कुमार समेत गांव के लोग उपस्थित रहे।
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12 वर्ष से चल रहा है सर्वसम्मति से चुनाव का प्रयास
नंबरदार बीर सिंह ने बताया कि उनका गांव पहले ढाणी किरारोद में शामिल था। 12 वर्ष पहले गांव सिलारपुर ढाणी किरारोद से अलग हो गया था। 2011 में पहली बार माडूराम सरपंच चुने गए थे। उस समय भी गांव के सभी पंच सर्वसम्मति से चुने गए थे। बताया कि 12 साल से ग्रामीणों का सर्वसम्मति से सरपंच बनाने का प्रयास चल रहा है लेकिन इस बार उनको कामयाबी मिल गई है। उन्होंने बताया कि इस प्रयास के लिए वे चार रात से सोए नहीं हैं। वे लगातार ग्रामीणों को सर्वसम्मति के लिए मनाने में जुटे हुए थे।
गांव में कायम होगी मिसाल
गांव के नंबरदार बीर सिंह, पूर्व सरपंच माडूराम, पूर्व सरपंच अजय कुमार ने बताया कि गांव में सर्वसम्मति से पंचायत चुनी जाती है तो एक मिसाल कायम होती है और गांव में भाईचारा बना रहता है। चुनाव के समय आपसी बैर हो जाते हैं। लोग पांच साल तक एक-दूसरे के घर पर आना जाना बंद कर देते हैं। दूसरा चुनाव में लाखों रुपये का खर्चा हो जाता है। सर्वसम्मति से चुनाव में सरपंच की काम करने में दिलचस्पी रहेगी और ग्रामीणों के दु:ख दर्द में हमेशा खड़ा रहेगा।
सरकार से मिलेगी 11 लाख रुपये की इनाम राशि
प्रदेश सरकार ने पंचायती राज संस्थाओं के छठे आम चुनाव में सर्वसम्मति से चुने जाने वाली ग्राम पंचायतों को प्रोत्साहित करने के लिए इनाम राशि देगी। ग्राम पंचायत सर्वसम्मति से चुने जाने पर 11 लाख रुपये, सर्वसम्मति से सरपंच चुने जाने पर 5 लाख रुपये, सर्वसम्मति से पंच चुने जाने पर 50 हजार रुपये प्रति पंच के हिसाब से पंचायत को दिए जाएंगे।
जिला परिषद के सर्वसम्मति से चुनाव पर पांच लाख रुपये प्रति सदस्य जिला परिषद को दिए जाएंगे। इसी प्रकार ब्लॉक समिति सर्वसम्मति से चुनी जाती है तो दो लाख रुपये प्रति सदस्य के हिसाब से जिला परिषद को दी जाएगी। सरकार ने यह भी निर्णय लिया गया है कि यह अनुदान राशि गांव के विकास पर खर्च की जाएगी।