फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Mahendragarh/Narnaul News ›   प्रसूता की मौत के दो दिन बाद हंगामा, परिजनों ने डाक्टर पर लगाया लापरवाही आरोप

प्रसूता की मौत के दो दिन बाद हंगामा, परिजनों ने डाक्टर पर लगाया लापरवाही आरोप

Sun, 03 Jun 2018 12:24 AM IST
Updated Sun, 03 Jun 2018 12:24 AM IST
विज्ञापन
प्रसूता की मौत के दो दिन बाद हंगामा, परिजनों ने डाक्टर पर लगाया लापरवाही आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन

नारनौल।
महेंद्रगढ़ रोड पर स्थित एक निजी अस्पताल में जुड़वा बच्चों को जन्म देेने के बाद खून चढ़ाते समय कथित रूप से बिगड़ी तबीयत और उसके बाद हुई प्रसूता की मौत के दो दिन बाद शनिवार को मृतका के परिजनों ने अस्पताल पहुंचकर जमकर हंगामा किया। मृतका संतोष पत्नी धर्मेंद्र गांव सागरपुर की रहने वाली थी। शनिवार को मृतका के परिजन दो स्कूली बसों में सवार होकर सुबह करीब नौ बजे उक्त अस्पताल पहुंचे और हंगामा शुरू करते हुए अस्पताल की डाक्टर के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। मामला बिगड़ता देख पुलिस को सूचना दी गई। सूचना पाकर महाबीर चौक पुलिस चौकी प्रभारी सज्जन शर्मा मौके पर पहुंचे। लेकिन मृतका के परिजनों व उनके गांव से आए लोगों की संख्या को देखते हुए सूचना के बाद शहर थाना प्रभारी वेदप्रकाश व उनकी टीम भी अस्पताल पहुंची। जहां मृतक प्रसूता के जेठ बिजेंद्र सिंह ने एसएचओ के समक्ष प्रसूता की मौत के लिए अस्पताल की डाक्टर और स्टाफ को जिम्मेदार ठहराते हुए उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग। जिस पर एसएचओ ने मृतका के परिजनों को यह समझाबुझा कर शांत किया कि वे अपनी शिकायत लिखकर दे दें। ताकि इस मामले में कानूनी कार्रवाई की जा सके। बाद में मृतका के जेठ ने महाबीर चौक पुलिस चौकी प्रभारी के नाम एक लिखित शिकायत सौंपकर अस्पताल की डाक्टर के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उसने अपनी इस शिकायत की एक-एक प्रति मुख्यमंत्री, प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री व पुलिस अधीक्षक को भी प्रेषित की है।
शिकायत में ये लिखा
बिजेंद्र ने अपनी शिकायत में लिखा है कि 23 व 24 मई को वह अपनी मां खजानी देवी के साथ अपने छोटे भाई धर्मेंद्र की गर्भवती पत्नी संतोष को महेंद्रगढ़ रोड स्थित एक निजी अस्पताल में रुटीन चेकअप के लिए लेकर आया था। इस दिन डाक्टर अलका बिश्नोई ने संतोष को 5-7 दिन की दवा देकर दोबारा बुलाया था। इसके बाद 28 मई को वह संतोष को सुबह करीब साढ़े 11 बजे फिर से अस्पताल लेकर गया। इस दिन डाक्टर बिश्नोई ने संतोष का चेकअप करने के बाद कहा कि बच्चे ने जच्चा के पेट में टायलेट कर दिया है और बच्चे का वजन भी पूरा है। बिजेंद्र के अनुसार डाक्टर ने जच्चा का एचबी भी पूरा बताया और कहा कि ऐसी स्थिति में ऑपरेशन करवाने में कोई दिक्कत नहीं है।
विज्ञापन

बिजेंद्र ने अपनी शिकायत में लिखा है कि डाक्टर बिश्नोई द्वारा ऑपरेशन की बात कहने पर उसने कहा कि जैसा उन्हें उचित लगे कर लें। इसके बाद डाक्टर और उनके स्टाफ से उससे व प्रसूता से कुछ फार्मों और कोरे कागजों पर हस्ताक्षर करवा लिए, साथ ही 20 हजार रुपये भी जमा करवाकर ऑपरेशन की कार्रवाई शुरू कर दी। बिजेंद्र ने बताया कि करीब तीन बजकर 40 मिनट पर संतोष ने जुड़वा लड़कों को जन्म दिया। ऑपरेशन के कुछ समय बाद डाक्टर ने सिविल अस्पताल से एक यूनिट खून मंगवाकर प्रसूता को चढ़ा दिया। उस समय संतोष और उसके दोनों बच्चे स्वस्थ थे और बीपी भी सामान्य था। इसके बाद संतोष से उनके रिश्तेदार व परिजन मिलने के लिए भी आ गये थे और वह सभी से अच्छी तरह से सामान्य स्थिति में बात करने लगी थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

बिजेंद्र ने बताया कि अगले दिन 29 मई 2018 को अस्पताल की डाक्टर अलका बिश्नोई ने उससे कहा कि वैसे तो संतोष की तबीयत बिल्कुल ठीक है फिर भी यदि इसे एक यूनिट खून और चढ़वा दिया जाए तो ठीक रहेगा। बिजेंद्र ने बताया कि डाक्टर की सलाह पर उसने नारनौल के जेआरपी ब्लड बैंक से एक यूनिट खून लाकर डाक्टर को दे दिया। इसके बाद दोपहर बाद करीब 3-4 बजे संतोष को यूनिट चढ़ानी शुरू कर दी। खून चढ़ाने के दस मिनट बाद ही संतोष ने डाक्टर अलका बिश्नोई से कहा कि उसका जी घबरा रहा है। इस पर डाक्टर ने उस समय खून चढ़ाना बंद कर दिया। लेकिन थोड़ी देर बाद ही फिर से खून चढ़ाना शुरू कर दिया।
बिजेंद्र ने अपनी शिकायत में लिखा है कि इस पर जब उसने डाक्टर से कहा कि जब प्रसूता का जी घबराने की बात कह रही है तो खून क्यों चढ़ाया जा रहा है। बिजेंद्र ने बताया कि इस पर डाक्टर ने गुस्सा होते हुए कहा कि डाक्टर मैं हूं या तुम हो और जबरदस्ती खून चढ़ा दिया। बिजेंद्र ने बताया कि रात करीब साढ़े नौ बजे संतोष की हालत बिगड़ गई तो उसे रेफर कर दिया। जिसे वह उपचार के लिए बहरोड के एक निजी अस्पताल ले गया। जहां डाक्टरों ने पहुंचते ही संतोष को मृत घोषित कर दिया। बिजेंद्र ने बताया कि कैलाश अस्पताल में निजी अस्पताल की एंबुलेंस के साथ गया अस्पताल का कर्मचारी संतोष के मृत होने की बात सुनते ही वहां भाग गया।
आरोप, नवजात बच्चों को जबरन डिस्चार्ज किया
बिजेंद्र का आरोप है कि इधर उसी रात अस्पताल में संतोष के नवजात बच्चों की देखभाल कर रही उसकी मां खजानी देवी को बच्चों के डिस्चार्ज कागज देकर अस्पताल से जाने के लिए कह दिया गया। बिजेंद्र ने बताया कि जुड़वा बच्चों में से एक बच्चे का वजन महज डेढ़ किलो था, लेकिन इसके बावजूद भी बिश्नोई अस्पताल से जान बूझकर उन्हें जबरदस्ती डिस्चार्ज कर दिया, इन दोनों बच्चों का इलाज अभी भी सिंघाना रोड स्थित बच्चों के अस्पताल में चल रहा है। बिजेंद्र ने पुलिस को संतोष की मौत के लिए अस्पताल की डाक्टर व उसके स्टाफ को जिम्मेदार ठहराते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।


वर्जन
गर्भवती महिला की उम्र ज्यादा होने के कारण उसे हाई रिस्क प्रेग्नेंसी का डर था। इस बारे में उसके घर वालों को भी सब कुछ बता दिया गया था तथा अन्य बड़े अस्पताल में डिलिवरी करवाने के लिए भी कहा गया था। प्रसूता के ब्रेन हैमरेज का भी खतरा था। दो दिन वह बिल्कुल ठीक भी रही। फिर भी समय पर उन्हें रेफर कर दिया गया था। यहां से संतोष सही गई थी। बहरोड़ जाने के बाद ही कुछ हुआ होगा।
- अलका बिश्नोई, चिकित्सक।
वर्जन
उन्हें लिखित में शिकायत मिल गई है। मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद ही आगामी कार्रवाई की जाएगी।
- सज्जन सिंह, चौकी प्रभारी महावीर चौक।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed