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उपभोक्ता फोर्म ने हुडा पर 25 हजार रुपये जुर्माना लगाया
Updated Tue, 28 Aug 2018 12:49 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। हाउसिंग बोर्ड निवासी एक व्यक्ति की शिकायत पर जिला उपभोक्ता फोर्म ने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण पर 25 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। वहीं फोरम ने हुडा को पीड़ित व्यक्ति को कागजात पूरे करके देने का भी आदेश दिया है।
हाउसिंग बोर्ड निवासी महावीर गर्ग ने जिला उपभोक्ता फोर्म को शिकायत की थी कि पत्नी मंजू देवी के नाम एक प्लॉट नारनौल के सेक्टर के फेज एक में दिसंबर 2006 में अलाट हुआ था। जून 2013 में पोजिशन सर्टिफिकेट भी जारी कर दी गई थी। अगस्त 2013 में उन्होंने हुडा में पैसे जमा कराकर नक्शा भी पास करा दिया था। इस दौरान उन्होंने निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया था। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद उन्होंने हुडा में ओक्यूपेशन सर्टिफिकेट के लिए भी दिसंबर 2014 में अप्लाई किया।
नियमों के अनुसार फाइल जमा होने के 12 दिन बाद उनको ओक्यूपेशन सर्टिफिकेट मिल जाती है। हुडा द्वारा न तो ओक्यूपेशन सर्टिफिकेट जारी की न ही फाइल पर कोई ओब्जेक्शन लगाया। उसकी पत्नी के नाम प्लॉट होने के कारण हुडा के रेवाड़ी स्थित कार्यालय में उक्त सर्टिफिकेट के लिए चक्कर काटता रहा, मगर हुडा के अधिकारियों ने उसे यह सर्टिफिकेट दी ही नहीं। वहीं इस बारे में उन्होंने आरटीआई लगाई तो भी प्रथम व द्वितीय अपील होने के बावजूद उन्हें कोई सही जवाब नहीं दिया गया।
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इससे परेशान होकर उन्होंने सीएम विंडो में भी शिकायत की। मगर वहां भी उन्हें निराशा ही हाथ लगी। इस दौरान परेशानी के कारण उनकी पत्नी का भी देहांत हो गया। जिस पर उसने उपभोक्ता अदालत की शरण ली। उपभोक्ता अदालत ने पूरे मामले की जांच करने के हुडा को इसमें दोषी ठहराया तथा 25 हजार रुपये का जुर्माना और 30 दिन के अंदर सर्टिफिकेट जारी करने को कहा। वहीं, उपभोक्ता का कहना है कि इसके बावजूद भी हुडा ने उनको सर्टिफिकेट जारी नहीं की। जिससे वह काफी परेशान हो गया है।
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नारनौल। हाउसिंग बोर्ड निवासी एक व्यक्ति की शिकायत पर जिला उपभोक्ता फोर्म ने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण पर 25 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। वहीं फोरम ने हुडा को पीड़ित व्यक्ति को कागजात पूरे करके देने का भी आदेश दिया है।
हाउसिंग बोर्ड निवासी महावीर गर्ग ने जिला उपभोक्ता फोर्म को शिकायत की थी कि पत्नी मंजू देवी के नाम एक प्लॉट नारनौल के सेक्टर के फेज एक में दिसंबर 2006 में अलाट हुआ था। जून 2013 में पोजिशन सर्टिफिकेट भी जारी कर दी गई थी। अगस्त 2013 में उन्होंने हुडा में पैसे जमा कराकर नक्शा भी पास करा दिया था। इस दौरान उन्होंने निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया था। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद उन्होंने हुडा में ओक्यूपेशन सर्टिफिकेट के लिए भी दिसंबर 2014 में अप्लाई किया।
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नियमों के अनुसार फाइल जमा होने के 12 दिन बाद उनको ओक्यूपेशन सर्टिफिकेट मिल जाती है। हुडा द्वारा न तो ओक्यूपेशन सर्टिफिकेट जारी की न ही फाइल पर कोई ओब्जेक्शन लगाया। उसकी पत्नी के नाम प्लॉट होने के कारण हुडा के रेवाड़ी स्थित कार्यालय में उक्त सर्टिफिकेट के लिए चक्कर काटता रहा, मगर हुडा के अधिकारियों ने उसे यह सर्टिफिकेट दी ही नहीं। वहीं इस बारे में उन्होंने आरटीआई लगाई तो भी प्रथम व द्वितीय अपील होने के बावजूद उन्हें कोई सही जवाब नहीं दिया गया।
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इससे परेशान होकर उन्होंने सीएम विंडो में भी शिकायत की। मगर वहां भी उन्हें निराशा ही हाथ लगी। इस दौरान परेशानी के कारण उनकी पत्नी का भी देहांत हो गया। जिस पर उसने उपभोक्ता अदालत की शरण ली। उपभोक्ता अदालत ने पूरे मामले की जांच करने के हुडा को इसमें दोषी ठहराया तथा 25 हजार रुपये का जुर्माना और 30 दिन के अंदर सर्टिफिकेट जारी करने को कहा। वहीं, उपभोक्ता का कहना है कि इसके बावजूद भी हुडा ने उनको सर्टिफिकेट जारी नहीं की। जिससे वह काफी परेशान हो गया है।