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नशाखोरी से उत्पन्न होते हैं मानसिक विकार
Updated Tue, 05 Sep 2017 01:16 AM IST
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सामाजिक विकास में नशा सबसे बड़ी रुकावट : सुरेंद्र
अमर उजाला ब्यूरो
नांगल चौधरी। पर्यावरणविद सुरेंद्र कमानियां की अध्यक्षता में सोमवार को भोजावास, आकोली और शिमली में युवा जागरूकता सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में नशाखोरी रोकने तथा पौधरोपण के लिए जागरूक किया गया। इस दौरान उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए सुरेंद्र कमानियां ने कहा कि सामाजिक विकास में नशा सबसे बड़ी रुकावट है।
विशेषज्ञों के अनुसार अधिकांश युवा एक-दूसरे की देखादेखी शराब या धूम्रपान करना शुरू कर देते हैं। इसके बाद उन्हें नशे की लत हो जाती है। जिसका सर्वाधिक दुष्प्रभाव फेफड़े, गला, नेत्रों पर पड़ता हैं। उन्होंने कहा कि नशा छोड़ना असंभव नहीं है, इसके लिए संकल्प लेना पड़ेगा। इसके बाद युवाओं को नीम के पौधे वितरित किए गए। इस मौके पर रविंद्र कुमार, अशोक यादव, महेश कुमार, दयाराम व विकास आदि मौजूद थे।
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अमर उजाला ब्यूरो
नांगल चौधरी। पर्यावरणविद सुरेंद्र कमानियां की अध्यक्षता में सोमवार को भोजावास, आकोली और शिमली में युवा जागरूकता सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में नशाखोरी रोकने तथा पौधरोपण के लिए जागरूक किया गया। इस दौरान उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए सुरेंद्र कमानियां ने कहा कि सामाजिक विकास में नशा सबसे बड़ी रुकावट है।
विशेषज्ञों के अनुसार अधिकांश युवा एक-दूसरे की देखादेखी शराब या धूम्रपान करना शुरू कर देते हैं। इसके बाद उन्हें नशे की लत हो जाती है। जिसका सर्वाधिक दुष्प्रभाव फेफड़े, गला, नेत्रों पर पड़ता हैं। उन्होंने कहा कि नशा छोड़ना असंभव नहीं है, इसके लिए संकल्प लेना पड़ेगा। इसके बाद युवाओं को नीम के पौधे वितरित किए गए। इस मौके पर रविंद्र कुमार, अशोक यादव, महेश कुमार, दयाराम व विकास आदि मौजूद थे।
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