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पानी से भरे खेत, किसान चिंतित
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बारिश से बिछी धान की फसल दिखाता किसान। संवाद
- फोटो : Kurukshetra
संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। किसान जहां अनाज मंडियों में धान न बिक पाने के चलते भारी परेशानी झेल रहे हैं, वहीं बारिश ने भी उनकी मुसीबतें बढ़ाई हुई है। धान की फसल में बारिश का पानी भर जाने से किसानोें को चिंता बढ़ गई है। बारिश से जिले में 50 हजार एकड़ से ज्यादा धान की फसल में 10 फीसदी तक नुकसान माना जा रहा है।
पिछले तीन दिन में जले में जमकर बारिश हुई। जिले में तीनों दिन में औसतन 54 एमएम बारिश हुई। सबसे ज्यादा पिहोवा व इस्माईलाबाद क्षेत्र में दर्ज की गई। आगे बारिश रही तो और भी नुकसान की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में किसानों की चिंता बढ़ी हुई है।
पीआर व 1509 किस्म की धान की फसल पक चुकी है। किसानों ने कटाई 20 दिन पहले शुरू कर दी थी। कटाई जोर पकड़ने लगी थी कि पिछले एक सप्ताह से मौसम ने इस पर ब्रेक लगा दी। हालांकि कई दिनों से बारिश का दौर चल रहा है, लेकिन पिछले तीन में ज्यादा बारिश हुई, जिससे खेत पानी से लबालब हो गए तो मंडियों में भी धान की ढेरियां भीग गई।
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कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अनुसार जिला में इस बार एक लाख 50 हजार हेक्टेयर के कुल रकबा में से किसानों द्वारा एक लाख 16 हजार हेक्टेयर रकबा में धान की फसल लगाई गई थी। 13 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की फसल है। किसानों ने पीआर व 1509 किस्म की धान भी बड़े स्तर पर लगाई और यह सितंबर माह के पहले हप्ते में ही कटाई की जाने लगी थी।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक डॉ. प्रदीप मिल का कहना है बारिश से अब तक 50 हजार एकड़ से ज्यादा धान की फसल में 10 फीसदी तक नुकसान का अनुमान है। विभाग की ओर से निगरानी की जा रही है। वहीं किसानों को फसल बचाने के लिए जागरूक किया जा रहा है।
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कुरुक्षेत्र। किसान जहां अनाज मंडियों में धान न बिक पाने के चलते भारी परेशानी झेल रहे हैं, वहीं बारिश ने भी उनकी मुसीबतें बढ़ाई हुई है। धान की फसल में बारिश का पानी भर जाने से किसानोें को चिंता बढ़ गई है। बारिश से जिले में 50 हजार एकड़ से ज्यादा धान की फसल में 10 फीसदी तक नुकसान माना जा रहा है।
पिछले तीन दिन में जले में जमकर बारिश हुई। जिले में तीनों दिन में औसतन 54 एमएम बारिश हुई। सबसे ज्यादा पिहोवा व इस्माईलाबाद क्षेत्र में दर्ज की गई। आगे बारिश रही तो और भी नुकसान की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में किसानों की चिंता बढ़ी हुई है।
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पीआर व 1509 किस्म की धान की फसल पक चुकी है। किसानों ने कटाई 20 दिन पहले शुरू कर दी थी। कटाई जोर पकड़ने लगी थी कि पिछले एक सप्ताह से मौसम ने इस पर ब्रेक लगा दी। हालांकि कई दिनों से बारिश का दौर चल रहा है, लेकिन पिछले तीन में ज्यादा बारिश हुई, जिससे खेत पानी से लबालब हो गए तो मंडियों में भी धान की ढेरियां भीग गई।
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कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अनुसार जिला में इस बार एक लाख 50 हजार हेक्टेयर के कुल रकबा में से किसानों द्वारा एक लाख 16 हजार हेक्टेयर रकबा में धान की फसल लगाई गई थी। 13 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की फसल है। किसानों ने पीआर व 1509 किस्म की धान भी बड़े स्तर पर लगाई और यह सितंबर माह के पहले हप्ते में ही कटाई की जाने लगी थी।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक डॉ. प्रदीप मिल का कहना है बारिश से अब तक 50 हजार एकड़ से ज्यादा धान की फसल में 10 फीसदी तक नुकसान का अनुमान है। विभाग की ओर से निगरानी की जा रही है। वहीं किसानों को फसल बचाने के लिए जागरूक किया जा रहा है।