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Karnal News: वार्ड आठ और 11 से सर्वसम्मति से चुने गए दो भाजपा पार्षद
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करनाल। नगर निगम चुनाव में निगम क्षेत्र के 20 वार्डों में से भाजपा ने दो वार्डों में बिना चुनाव लड़े ही जीत दर्ज कर ली। दोनों वार्डों में भाजपा प्रत्याशियों के सामने कोई प्रतिद्वंदी प्रत्याशी ही नहीं बचा। जिसकी वजह से जिला प्रशासन को दोनों वार्डों में अकेले बचे प्रत्याशियों को निर्विरोध सर्वसम्मति से चुने जाने का प्रमाण पत्र भी दे दिया। इनमें वार्ड नंबर आठ से संकल्प भंडारी और 11 से संजीव मेहता निर्विरोध चुने गए।
रोचक बात ये है कि वार्ड आठ से तीन प्रत्याशी चुनावी मैदान में उतरे थे। इनमें बीजेपी से संकल्प भंडारी, निर्दलीय प्रत्याशी में विष्णु कुमार शर्मा और यशपाल मित्तल ने नामांकन भरा था। नामांकन पत्र दाखिल करने के अंतिम दिन कांग्रेस ने अपने प्रत्याशी की घोषणा कर दी लेकिन प्रत्याशी अचानक लापता हो गया और नामांकन नहीं भरा जा सका। इसके बाद बचे दो आजाद उम्मीदवारों ने बुधवार को अपना नामांकन उठा लिया। जिसके बाद भाजपा प्रत्याशी संकल्प भंडारी अकेले बच गए और उनको सर्वसम्मति से पार्षद चुन लिया गया।
दूसरी ओर वार्ड 11 से दो प्रत्याशियों ने नामांकन भरा। इनमें बीजेपी से संजीव कुमार मेहता और निर्दलीय गुरविंद्र सिंह शामिल रहे। इनमें गुरविंद्र कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी थे। बुधवार को गुरविंद्र ने अपना नामांकन उठा लिया और संजीव मेहता भी बिना चुनाव लड़े जीत गए।
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वार्ड 12 के नामांकन को लेकर हो गया विवाद
शहर में चर्चाएं हैं कि भाजपा को कई वार्ड निर्विरोध, बिना चुनाव लड़े ही जीतने थे। इनमें से दो वार्डों में भाजपा नेताओं की रणनीति पूरी तरह से सफल भी हो गई। जबकि वार्ड 12 में खेल बिगड़ गया। बताया जा रहा है कि भाजपा की रणनीति में वार्ड 12 से कांग्रेस प्रत्याशी भी आ चुका था लेकिन बीच में ही खेल बिगड़ गया। शहर के राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि भाजपा की नजर सबसे ज्यादा सबसे कम प्रत्याशियों वाले वार्डों पर थी। इनमें दो दो प्रत्याशी वाले वार्ड जिनमें वार्ड नंबर आठ, 11 और 12 तो मुख्य रूप से शामिल थे।
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रोचक बात ये है कि वार्ड आठ से तीन प्रत्याशी चुनावी मैदान में उतरे थे। इनमें बीजेपी से संकल्प भंडारी, निर्दलीय प्रत्याशी में विष्णु कुमार शर्मा और यशपाल मित्तल ने नामांकन भरा था। नामांकन पत्र दाखिल करने के अंतिम दिन कांग्रेस ने अपने प्रत्याशी की घोषणा कर दी लेकिन प्रत्याशी अचानक लापता हो गया और नामांकन नहीं भरा जा सका। इसके बाद बचे दो आजाद उम्मीदवारों ने बुधवार को अपना नामांकन उठा लिया। जिसके बाद भाजपा प्रत्याशी संकल्प भंडारी अकेले बच गए और उनको सर्वसम्मति से पार्षद चुन लिया गया।
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दूसरी ओर वार्ड 11 से दो प्रत्याशियों ने नामांकन भरा। इनमें बीजेपी से संजीव कुमार मेहता और निर्दलीय गुरविंद्र सिंह शामिल रहे। इनमें गुरविंद्र कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी थे। बुधवार को गुरविंद्र ने अपना नामांकन उठा लिया और संजीव मेहता भी बिना चुनाव लड़े जीत गए।
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वार्ड 12 के नामांकन को लेकर हो गया विवाद
शहर में चर्चाएं हैं कि भाजपा को कई वार्ड निर्विरोध, बिना चुनाव लड़े ही जीतने थे। इनमें से दो वार्डों में भाजपा नेताओं की रणनीति पूरी तरह से सफल भी हो गई। जबकि वार्ड 12 में खेल बिगड़ गया। बताया जा रहा है कि भाजपा की रणनीति में वार्ड 12 से कांग्रेस प्रत्याशी भी आ चुका था लेकिन बीच में ही खेल बिगड़ गया। शहर के राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि भाजपा की नजर सबसे ज्यादा सबसे कम प्रत्याशियों वाले वार्डों पर थी। इनमें दो दो प्रत्याशी वाले वार्ड जिनमें वार्ड नंबर आठ, 11 और 12 तो मुख्य रूप से शामिल थे।