फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Karnal News ›   School children are commuting unsafely in e-rickshaws and auto-rickshaws, while the authorities turn a blind eye.

Karnal News: ई-रिक्शा व ऑटो में स्कूली बच्चे कर रहे असुरक्षित सफर, जिम्मेदार आंखें मूंदे

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 19 Sep 2026 02:33 AM IST
विज्ञापन
School children are commuting unsafely in e-rickshaws and auto-rickshaws, while the authorities turn a blind eye.
मॉडल टाउन की सड़क से ई रिक्शा में चालक के साथ बैठे युवक ने गोद में बैठाया बच्चा।  संवाद
करनाल।
विज्ञापन

ई-रिक्शा और ऑटो में स्कूलों के बच्चे असुरक्षित सफर कर रहे हैं। नियमों के बावजूद बड़ी संख्या में छात्र असुरक्षित वाहनों में स्कूल आ-जा रहे हैं।
सुबह और दोपहर के समय शहर के विभिन्न इलाकों में ई-रिक्शा और ऑटो में बच्चों को ले जाते हुए देखा जा सकता है। कई जगहों पर एक ही वाहन में क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाया जा रहा है। न तो इनमें सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा है और न ही किसी प्रकार की निगरानी नजर आती है। शुक्रवार को अमर उजाला की पड़ताल में ई-रिक्शों में बच्चों को चालक की सीट पर भी बैठाया हुआ था।
सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी के तहत बच्चों के परिवहन के लिए निर्धारित नियम स्पष्ट हैं लेकिन जमीनी स्तर पर इनका पालन होता नजर नहीं आ रहा। न तो वाहनों पर जरूरी परमिट और फिटनेस की जांच होती दिखती है और न ही ड्राइवरों की नियमित मॉनिटरिंग हो रही है। ऐसे में अभिभावकों की चिंता बढ़ती जा रही है।
विज्ञापन

सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ शुभम और तेजपाल का मानना है कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर केवल कागजी कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि नियमित जांच, सख्त प्रवर्तन और अभिभावकों की जागरूकता भी जरूरी है। ऐसे में अब सवाल यह है कि जिम्मेदार विभाग कब तक कार्रवाई करते हैं और बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


हमारी टीमें लगातार स्कूल बसों की जांच करती हैं, लापरवाही पाए जाने पर कार्रवाई भी की जाती है। ई-रिक्शा में निर्धारित क्षमता से ज्यादा बच्चों को नहीं बैठाया जाना चाहिए। अभिभावक स्वयं भी ध्यान रखें। ऐसा करने वाले वाहन चालकों पर भी कार्रवाई होगी। - विजय देसवाल, आरटीए सचिव

ये हैं नियम
वाहन फिटनेस और पंजीकरण: यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि ई-रिक्शा और ऑटो, जो स्कूली बच्चों को ले जाते हैं, नियमित रूप से फिटनेस जांच से गुजरें और उनका पंजीकरण वैध हो। बिना फिटनेस या पंजीकरण वाले वाहनों को सड़कों पर चलने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

क्षमता से अधिक सवारी पर रोक: ई-रिक्शा और ऑटो में निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाने पर सख्त रोक लगाई जानी चाहिए। ई-रिक्शा में चालक सहित अधिकतम पांच और ऑटो में चालक के अतिरिक्त तीन सवारी की सीमा का कड़ाई से पालन होना चाहिए।

सुरक्षा जाली और एंगल: बच्चों के गिरने से रोकने के लिए वाहनों के किनारों पर सुरक्षा जाली लगाना अनिवार्य किया जाना चाहिए। साथ ही, स्कूल वाहनों में दाईं ओर एंगल लगाना भी आवश्यक है, ताकि बच्चे बाईं ओर से सुरक्षित रूप से उतर सकें।

चालक की सीट पर बच्चों को न बैठाना: बच्चों को चालक की सीट के पास या आगे की सीट पर बैठाने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे चालक का ध्यान भटक सकता है और हैंडलिंग में समस्या आ सकती है।

मॉडल टाउन की सड़क से ई रिक्शा में चालक के साथ बैठे युवक ने गोद में बैठाया बच्चा।  संवाद

मॉडल टाउन की सड़क से ई रिक्शा में चालक के साथ बैठे युवक ने गोद में बैठाया बच्चा।  संवाद

मॉडल टाउन की सड़क से ई रिक्शा में चालक के साथ बैठे युवक ने गोद में बैठाया बच्चा।  संवाद

मॉडल टाउन की सड़क से ई रिक्शा में चालक के साथ बैठे युवक ने गोद में बैठाया बच्चा।  संवाद

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed