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Karnal News: पुश्तैनी संपत्तियों पर हक तो जता रहे, दस्तावेज हैं नहीं

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 13 Sep 2025 01:56 AM IST
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They are claiming rights on ancestral properties but do not have documents
माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। नगर निगम क्षेत्र में पुश्तैनी जमीनों पर रहने वाले लोग लाल डोरे के बंधन से मुक्त नहीं हो पा रहे हैं। हालांकि लाल डोरे के अंतर्गत बसे 5300 लोगों ने अपनी संपत्तियों को निगम के पोर्टल पर स्वयं प्रमाणित तो किया है लेकिन इनके प्रमाणपत्र निगम से लेने के लिए वे दस साल पुराना सबूत नहीं दे पा रहे हैं। अब तक शहर के लाल डोरा क्षेत्र में कुल 16,324 संपत्तियां दर्ज हुई हैं। इनमें से महज 1,600 संपत्ति मालिकों को ही प्रॉपर्टी सर्टिफिकेट जारी किया जा सका है।
नियम के अनुसार आवेदक को अपनी संपत्ति पर कम से कम 10 साल पुराना मालिकाना हक साबित करने वाले सबूत देने जरूरी हैं। लेकिन अधिकतर लोग केवल मौखिक दावा कर रहे हैं। जरूरी दस्तावेज पेश नहीं कर पा रहे। पुराने समय में जमीन और मकानों के लेन-देन बिना पक्के कागजों के या मौखिक भी हो जाते थे, इसलिए आज प्रमाण जुटाना मुश्किल हो रहा है।
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स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे पीढ़ियों से इन घरों और जमीनों में रह रहे हैं लेकिन अब प्रमाणपत्र पाने के लिए बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। कई लोगों ने कहा कि सरकार ने मालिकाना हक देने की घोषणा की थी, लेकिन जब सबूत ही उपलब्ध नहीं हैं। अतिरिक्त निगम आयुक्त अशोक कुमार का कहना है कि सर्टिफिकेट केवल उन्हीं को दिया जाएगा जिनके पास कानूनी और वैध दस्तावेज मौजूद हैं। यह इसलिए जरूरी है ताकि भविष्य में किसी भी तरह का विवाद खड़ा न हो। अधिकारी मानते हैं कि प्रक्रिया लंबी जरूर है लेकिन पारदर्शिता और विवाद-मुक्त मालिकाना हक सुनिश्चित करने के लिए यह जरूरी कदम है।
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