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Karnal News: सौ दिन में स्वास्थ्य विभाग ने तलाशे 1247 टीबी के मरीज

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 24 Mar 2025 02:12 AM IST
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In 100 days, the health department found 1247 TB patients
- निक्षय अभियान के तहत अब तक दो लाख 65 हजार 375 लोगों की हो चुकी स्क्रीनिंग, 24 मार्च तक चलेगा अभियान
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जिले को टीबी मुक्त बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग का निक्षय 100 दिन अभियान चल रहा है, जिसके तहत अब तक 2 लाख 65 हजार 375 लोगों की स्क्रीनिंग की गई है। इनमें से एक लाख से अधिक लोगों के एक्स-रे किए गए, जिनमें से 1247 मरीजों में संक्रमण की पुष्टि हुई है, उनका इलाज शुरू कर दिया गया है। जिला नागरिक अस्पताल से उप-सिविल सर्जन डॉ. सिम्मी कपूर के अनुसार जिले में फिलहाल 2632 मरीजों का इलाज चल रहा है, जबकि 2568 मरीज ठीक हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि यह अभियान 24 मार्च तक चलेगा।


डॉ. सिम्मी का कहना है कि पिछले पांच वर्षों में जिले में टीबी के मामलों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। 2024 में 5100 टीबी मरीज मिले, जिनमें से 2568 पूरी तरह ठीक हो चुके हैं, जबकि 2532 मरीजों का इलाज जारी है। तुलनात्मक रूप से, 2023 में 5132 मरीज मिले थे, जो 2024 की तुलना में 32 कम हैं। वहीं, बीते पांच वर्षों में जिले में टीबी मरीजों की संख्या 2019 में 3854, 2020 में 4312, 2021 में 4274, 2022 में 4507 और 2023 में 5132 दर्ज की गई थी।
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डॉ. सिम्मी बताती हैं कि स्वास्थ्य विभाग की विशेष टीमों ने घर-घर जाकर टीबी मरीजों की पहचान की है। इसके लिए निक्षय अभियान के तहत चार टीबी स्क्रीनिंग वैन को रवाना किया गया था, जिनमें से दो स्वास्थ्य विभाग और दो मेदांता अस्पताल की शामिल हैं। इनमें से दो वैन में पोर्टेबल एक्स-रे मशीन भी लगी हैं, जिससे संदिग्ध मरीजों की तुरंत जांच की जा सके। स्वास्थ्य विभाग के जिला कार्यक्रम संयोजक कमल शर्मा के अनुसार, अब तक करीब 90 प्रतिशत स्क्रीनिंग पूरी हो चुकी है।
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उप-सिविल सर्जन डॉ. सिम्मी कपूर के अनुसार, टीबी एक संक्रामक रोग है, जो मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करता है और संक्रमित व्यक्ति की खांसी, छींक और थूक से फैलता है। यदि समय पर इलाज न किया जाए तो एक मरीज 10-15 अन्य लोगों को संक्रमित कर सकता है। टीबी के लक्षणों में दो सप्ताह से अधिक खांसी, शाम के समय बुखार, खांसते समय बलगम में खून आना, सांस फूलना, भूख और वजन में कमी, रात में अधिक पसीना आना और गर्दन या बगल में गांठ होना शामिल हैं। उन्होंने बताया कि भारत सरकार ने टीबी को नोटिफाइबल डिजीज घोषित किया है, जिसके तहत सभी निजी अस्पतालों, क्लीनिकों और लैब को टीबी मरीजों की जानकारी अनिवार्य रूप से देनी होगी। डॉ. सिम्मी का कहना है कि किसी व्यक्ति को अगर लंबे समय तक खांसी, बुखार, वजन कम होने या बलगम में खून आने जैसी कोई समस्या हो, तो वह नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर जांच करवाए और निशुल्क इलाज का लाभ उठाए।

सहायता राशि बढ़ाई
डॉ. सिम्मी बताती हैं कि टीबी मरीजों को आर्थिक सहायता देने के लिए सरकार ने निक्षय पोषण योजना के तहत सहायता राशि को 500 रुपये से बढ़ाकर 1000 रुपये प्रतिमाह कर दिया है। यह लाभ सभी नए और पुराने मरीजों को मिलेगा। साथ ही, मरीज की जानकारी देने वाले व्यक्ति, मरीज की देखभाल करने वाले आशा वर्कर और इलाज करने वाले डॉक्टर को भी 500 रुपये प्रति मरीज की सहायता दी जाएगी।

इन क्षेत्रों में मिले सबसे अधिक मरीज

इस अभियान के तहत शहर में सबसे अधिक केस मिले हैं। जिनमें शिव कॉलोनी, इंद्रा कॉलोनी आदि शामिल हैं। इससे अलग घरौंडा क्षेत्र में भी टीबी के मरीज अधिक मिले हैं। इसके बाद इंद्री, निसिंग व असंध में टीबी के मरीज मिल रहे हैं।
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