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राइस मिलों को धान देने की शर्तों को सख्त करने की तैयारी में सरकार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 02 Sep 2020 01:51 AM IST
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government is preparing to tighten the conditions of paddy rice mills
पिछले कुछ सालों से हरियाणा राज्य में सीएमआर चावल की वापसी को लेकर दिक्कतें आ रही हैं। राइस मिलर्स पर घोटालों के भी आरोप लग रहे हैं। यही कारण है कि आगामी वर्ष से राइस मिलर्स को दिए जाने वाले धान (पैड्डी) की शर्तों को सरकार सख्त करने जा रही है। विभागीय सूत्रों के अनुसार राइस मिलर्स से प्रति टन क्षमता पर ली जाने वाली एफडीआर को 10 लाख से बढ़ाकर 50 लाख करने, धान की कीमत के बराबर राइस मिलर्स और उसके गारंटर की प्रापर्टी अटैच करने या बैंक गारंटी लेने और 50-50 लाख का चेक लेने पर विचार कर रही है, ताकि यदि राइस मिलर्स समय पर सीएमआर चावल की आपूर्ति न करें तो उसकी कीमत को उनसे आसानी से वसूला जा सके।
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आमतौर पर राइस मिल चार या पांच टन की क्षमता के होते हैं। अभी तक केंद्र सरकार से मिलने वाले धान को लेने के लिए प्रति टन क्षमता के अनुसार राइस मिल को 10 लाख रुपये की एफडीआर बनवानी होती थी, लेकिन आगामी वर्ष के लिए इसे 50 लाख किए जाने की तैयारी है। पहले टन के बाद प्रति टन पांच लाख की बढ़ोत्तरी होती थी, अब दस लाख होगी, यानी चार टन क्षमता वाले राइस मिल को 25 लाख की बजाय 80 लाख की एफडीआर करानी होगी। एक और नियम इस बार लागू करने की सुगबुगाहट है कि हरियाणा सरकार राइस मिल को जितनी कीमत का धान देगा, उतनी कीमत की बैंक गारंटी लेगी या फिर कीमत के बराबर राइस मिलर्स, उसके गारंटर की संपत्ति गिरवी रखेंगे। इसके अलावा राइस मिलर्स व उसके गारंटर से 50-50 लाख रुपये का चेक भी एडवांस में लेने पर विचार किया जा रहा है।
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धान की कीमत की बात की जाए तो राइस मिल की क्षमता पर पहले टन पर 4000 मीट्रिक टन, इसके बाद टन के अनुसार एक एक हजार मीट्रिक टन बढ़ता जाता है यानी चार टन क्षमता की राइस मिल है तो उसे 7000 मीट्रिक टन यानी 70 हजार क्विंटल धान मिल सकता है। इसकी कीमत की बात करें तो 2000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से 13 करोड़ रुपये से अधिक हो जाती है। इतनी कीमत की संपत्ति को अटैच कराना होगा या फिर बैंक गारंटी देनी होगी। यदि यही शर्तें लागू हुईं तो राइस मिलर्स के लिए सीएमआर चावल के लिए धान को लेना आसान नहीं होगा। इन शर्तों की भनक लगते ही राइस मिलर्स में खलबली मच गई है। देखना यह होगा कि सरकार इन शर्तों को लागू करती है या फिर इसमें कुछ बदलाव करके नियमावली जारी करती है।
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अभी कोई नियमावली जारी नहीं हुई है और ना ही इन शर्तों की कोई स्पष्ट जानकारी है, लेकिन सुनने में आ रहा है कि इस बार शर्तें काफी कड़ी बनाई जा रही है। सरकार को सरल शर्तों के साथ ही धान को देना चाहिए। राइस मिलर्स पूरी ईमानदारी से ही सीएमआर चावल की आपूर्ति करेंगे। इस साल करनाल जिले में सात राइस मिलर्स पूरा चावल नहीं दे पाए हैं, उसके लिए तिथि बढ़ने की पूरी संभावना है।
-विनोद गोयल, सीनियर वाइस प्रेसीडेंट-हरियाणा राइस मिलर्स एसोसिएशन।
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