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अफसर हजम कर गए एफसीआई गाोदाम का कम हुआ गेहूं
इंद्री/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 01 Jun 2015 01:00 AM IST
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इंद्री। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग इंद्री के गेहूं गोदाम में पानी का छिड़काव करते पकड़े गए कर्मचारियों के मामले में रविवार को विभाग के डिप्टी डायरेक्टर जयपाल सिंह, डीएफएससी निशांत राठी ने टीम के साथ मौके का निरीक्षण किया। गीले गेहूं को ट्रक में लदवाया और कांटे पर तोल करवाई गई। इसमें वजन पूरा निकला।
इससे साबित हो गया कि गेहूं की तोल को पूरा करने के लिए कर्मचारियों ने पानी का छिड़काव किया था। यदि गेहूं सूखा होता तो तोल में कमी आती। इसके साथ ही गोदामों से गेहूं निकालकर बेचने के मामले का पर्दाफाश हो जाता। उच्चाधिकारियों ने रिपोर्ट बनाकर सरकार को सौंपने का आश्वासन दिया है।
डिप्टी डायरेक्टर जयपाल सिंह ने बताया कि गेहूं का वजन तो लगभग पूरा मिला है। फि र भी चट्टों पर पानी छिड़कने वाले दोनों कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यह छापा मुख्यमंत्री के ओएसडी अमरेंद्र सिंह ने मारा था। अब अधिकारी इस मामले को दबाने की कोशिश में लग गए हैं। अधिकारी नमीयुक्त गेहूं की तोल करवाकर सही रिपोर्ट बना रहे हैं, जबकि तोल सूखे गेहूं की होनी चाहिए थी।
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डिप्टी डायरेक्टर से बारे में सवाल पूछा गया, तो वह जवाब घुमा गए। अधिकारियों के बयानोेें से साफ है कि इस घोटाले पर पर्दा डालने के प्रयास शुरू हो गए हैं। अब अधिकारी गेहूं का वजन पूरा होने की बात कह रहे हैं, जबकि एक दिन पहले विभाग की टीम ने गेहूं की बोरियों की तोल करवाई थी, तो उस वक्त प्रति कट्टा पांच से सात किलोग्राम गेहूं कम मिला था। रातोंरात गेहूं की तोल पूरी होना विभाग की जांच रिपोर्ट पर सवाल उठा रहा है।
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इससे साबित हो गया कि गेहूं की तोल को पूरा करने के लिए कर्मचारियों ने पानी का छिड़काव किया था। यदि गेहूं सूखा होता तो तोल में कमी आती। इसके साथ ही गोदामों से गेहूं निकालकर बेचने के मामले का पर्दाफाश हो जाता। उच्चाधिकारियों ने रिपोर्ट बनाकर सरकार को सौंपने का आश्वासन दिया है।
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डिप्टी डायरेक्टर जयपाल सिंह ने बताया कि गेहूं का वजन तो लगभग पूरा मिला है। फि र भी चट्टों पर पानी छिड़कने वाले दोनों कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यह छापा मुख्यमंत्री के ओएसडी अमरेंद्र सिंह ने मारा था। अब अधिकारी इस मामले को दबाने की कोशिश में लग गए हैं। अधिकारी नमीयुक्त गेहूं की तोल करवाकर सही रिपोर्ट बना रहे हैं, जबकि तोल सूखे गेहूं की होनी चाहिए थी।
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डिप्टी डायरेक्टर से बारे में सवाल पूछा गया, तो वह जवाब घुमा गए। अधिकारियों के बयानोेें से साफ है कि इस घोटाले पर पर्दा डालने के प्रयास शुरू हो गए हैं। अब अधिकारी गेहूं का वजन पूरा होने की बात कह रहे हैं, जबकि एक दिन पहले विभाग की टीम ने गेहूं की बोरियों की तोल करवाई थी, तो उस वक्त प्रति कट्टा पांच से सात किलोग्राम गेहूं कम मिला था। रातोंरात गेहूं की तोल पूरी होना विभाग की जांच रिपोर्ट पर सवाल उठा रहा है।