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Mainpuri News: चार चिताएं जलीं एकसाथ, राेया पूरा गांव
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फोटो 4 गांव चांदा में शव को मुखाग्नि देते परिजन। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
किशनी। क्षेत्र के तीन गांनों चांदा, हविलिया और किशनपुर मुरगिया में बुधवार को चार चिताएं जलीं तो लोगों की आंखों से आंसू बह निकले। रोते-बिलखते परिजन, रिश्तेदार और ग्रामीणों ने मातम के बीच पलवल में कुंडली-मानेसर-पलवल (केएमपी) एक्सप्रेसवे पर हुए भीषण हादसे में जान गंवाने वाले वरिष्ठ सपा नेता विजय यादव (65), किसान महेश यादव (60), कमला देवी (60) और रेशमा देवी (45) को अंतिम विदाई दी।
मंगलवार रात चारों शव जब इन गांवों में पहुंचे तो अपनों के बेजान शरीर देख परिजन के कलेजे कांप उठे। रातभर घरों से दर्दभरी चीखें सुनाई देती रहीं। बुधवार सुबह सूरज की पहली किरण के साथ अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू हो गईं। मासूम बच्चे अपनों को कफन में लिपटा देख सिसक रहे थे।
गांव मुरगिया और चांदा से जब अर्थियां उठीं तो परिजन की चीखें गांव को दहलाने लगीं। जो चेहरे कल तक गांव की चौपालों और आंगनों में हंसते-बोलते थे, वे कफन में लिपटे श्मशान की ओर बढ़ रहे थे।
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हर किसी की आंखें सजल थीं और जुबान पर सिर्फ एक ही सवाल था, आखिर कुदरत ने इन परिवारों पर इतना जुल्म क्यों ढाया। जैसे-तैसे हिम्मत कर ग्रामीणों ने गमजदा परिजनों को संभाला और शवों को अंत्येष्टि स्थल ले जाया गया। परिजनों ने कांपते हाथों से मुखाग्नि देकर चारों का अंतिम संस्कार किया।
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किशनी। क्षेत्र के तीन गांनों चांदा, हविलिया और किशनपुर मुरगिया में बुधवार को चार चिताएं जलीं तो लोगों की आंखों से आंसू बह निकले। रोते-बिलखते परिजन, रिश्तेदार और ग्रामीणों ने मातम के बीच पलवल में कुंडली-मानेसर-पलवल (केएमपी) एक्सप्रेसवे पर हुए भीषण हादसे में जान गंवाने वाले वरिष्ठ सपा नेता विजय यादव (65), किसान महेश यादव (60), कमला देवी (60) और रेशमा देवी (45) को अंतिम विदाई दी।
मंगलवार रात चारों शव जब इन गांवों में पहुंचे तो अपनों के बेजान शरीर देख परिजन के कलेजे कांप उठे। रातभर घरों से दर्दभरी चीखें सुनाई देती रहीं। बुधवार सुबह सूरज की पहली किरण के साथ अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू हो गईं। मासूम बच्चे अपनों को कफन में लिपटा देख सिसक रहे थे।
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गांव मुरगिया और चांदा से जब अर्थियां उठीं तो परिजन की चीखें गांव को दहलाने लगीं। जो चेहरे कल तक गांव की चौपालों और आंगनों में हंसते-बोलते थे, वे कफन में लिपटे श्मशान की ओर बढ़ रहे थे।
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हर किसी की आंखें सजल थीं और जुबान पर सिर्फ एक ही सवाल था, आखिर कुदरत ने इन परिवारों पर इतना जुल्म क्यों ढाया। जैसे-तैसे हिम्मत कर ग्रामीणों ने गमजदा परिजनों को संभाला और शवों को अंत्येष्टि स्थल ले जाया गया। परिजनों ने कांपते हाथों से मुखाग्नि देकर चारों का अंतिम संस्कार किया।

फोटो 4 गांव चांदा में शव को मुखाग्नि देते परिजन। संवाद

फोटो 4 गांव चांदा में शव को मुखाग्नि देते परिजन। संवाद