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इस वर्ष शुरू नहीं हो पाएगा टी-फ्लाईओवर का निर्माण!

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 02 Nov 2022 02:18 AM IST
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Construction of T-flyover will not start this year
माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। शहर के यातायात को सुगम बनाने वाली परियोजना टी-फ्लाईओवर का स्वरूप छोटा करने, लागत को 154 करोड़ रुपये से घटाकर 93 करोड़ रुपये करने के बावजूद ये परियोजना सिरे नहीं चढ़ रही है। पहले तो इसे स्मार्ट सिटी लिमिटेड को बनाना था, करीब चार महीने पहले इसे हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) को दे दिया गया। पिछले आठ महीनों में तीन बार टेंडर भी लगाया गया लेकिन अभी भी इसकी स्थिति जस की तस ही है। किसी भी निर्माणदायी एजेंसी ने इसके निर्माण के लिए टेंडर लेने में रुचि नहीं दिखाई है। एक बार फिर टेंडर को रन किया गया है।
शहर में फ्लाईओवर बनाने के लिए मंथन तो पिछले साल से चल रहा था, लेकिन जनवरी में इसकी डिजाइन को स्वीकृति प्रदान कर दी गई थी। स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने इसकी अनुमानित लागत 154 करोड़ रुपये रखी थी। पहले इसे सेक्टर 13-14 के डिवाइडिंग रोड से शुरू करके खालसा कॉलेज के पास उतारना था। अमर उजाला ने ही 14 मार्च को प्रकाशित एक रिपोर्ट में सुझाव दिया था कि इसे खालसा कॉलेज की बजाय रेलवे रोड पर फिश मार्केट या चर्च के पास उतार दिया जाए तो इसका फायदा अधिकांश स्कूलों के बच्चों, शिक्षकों, घोघड़ीपुर से आने वाले ट्रैफिक, आसपास की विभिन्न क़ॉलोनियों को मिल सकता है। इसके बाद स्मार्ट सिटी ने इस पर पुनर्विचार करके दोबारा डिजाइन तैयार की थी, जिसमें अब इसकी लंबाई 700 मीटर कम कर दी गई है। लागत भी 61 करोड़ रुपये कम हो गई है। अब ये फ्लाईओवर हरियाणा नर्सिंग होम से रेलवे रोड तक व टी-प्वॉइंट कमेटी चौक से कर्ण पार्क तक बनाने को हरी झंडी दे दी थी। मार्च महीने में ही इसका टेंडर भी ऑनलाइन कर दिया गया था। इसके बाद लगातार टेंडर लगते रहे लेकिन कोई भी निर्माणदायी संस्था ने टेंडर नहीं लिया। यदि अब भी टेंडर नहीं लिया तो इस साल इसका निर्माण शुरू होने मुश्किल हो जाएगा।
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कहां आ रही दिक्कत
जानकार बताते हैं कि जो भी निर्माणदायी संस्था टेंडर के बारे में जानकारी प्राप्त करती है तो फ्लाईओवर का निर्माण शहर के अंदर होने के कारण हाथ पीछे खींच लेती है। संस्थाओं का मानना है कि शहर के अंदर निर्माण सामग्री लाने, ले जाने में दिक्कत होगी, डस्ट आदि की समस्या, दिन के समय भीड़भाड़ के बीच कार्य के दौरान अड़चनें, मैटीरियल स्टॉक, मशीनों के संचालन, लेबर आदि की भी परेशानी आ सकती है। यदि विरोध होने लगा तो मामला लटक भी सकता है। यही कारण है कि कई बड़ी बड़ी कंपनियां इस बड़ी परियोजना पर काम करने के लिए तैयार नहीं हो रही है। हालांकि एचएसवीपी को उम्मीद है कि शीघ्र ही कोई न कोई बड़ी एजेंसी कार्य को करेगी।
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इन्हें हो सकता है बड़ा लाभ
रेलवे रोड व इसके आसपास ही राजकीय महिला कॉलेज, गवर्नमेंट सीनियर सेेकेंडरी स्कूल (बालक एवं बालिका), डीएवी महिला कॉलेज, डीएवी बीएड कॉलेज, डीएवी ब्वायज कॉलेज, एसडी आदर्श स्कूल, एसडी सीनियर सेकेंडरी स्कूल मुल्तान, जैन गर्ल्स स्कूल, एसडी गर्ल्स स्कूल आदि कई स्कूल कॉलेज हैं, जिनके हजारों छात्र-छात्राएं रोज आते-जाते हैं, इन विद्यार्थियों को अब नए डिजाइन पर प्रस्तावित फ्लाईओवर से फायदा मिल सकेगा। नए प्रस्तावित स्वरूप पर बनने वाले फ्लाईओवर से घोघड़ीपुर से आने वाले ट्रैफिक को तो लाभ मिलेगा ही, साथ ही सदर बाजार को सीधा लाभ मिल सकेगा। रमेश नगर, इब्राहिम मंडी और सुभाष कॉलोनी आदि की आबादी को भी इसका फायदा होगा।

इस फ्लाईओवर की मौजूदा अनुमानित लागत 93 करोड़ रुपये है। पहले टेंडर लगाए गए थे लेकिन कंपनियों ने रुचि नहीं दिखाई थी। अब एक बार फिर टेंडर ऑनलाइन किया गया है, उम्मीद है कि आगामी तीन चार दिनों में कोई न कोई बड़ी एजेंसी टेंडर लेगी और शीघ्र ही टी-फ्लाईओवर का कार्य शुरू करा दिया जाएगा। इसमें धनराशि तो स्मार्टसिटी मुहैया कराएगी और एचएसवीपी की देखरेख में तैयार होगा। कार्य तो किसी निर्माणदायी एजेंसी को ही करना है।
- धर्मबीर मैहला, कार्यकारी अभियंता, एचएसवीपी करनाल
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