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Karnal News: सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस के 20 फीसदी मरीज बढ़े

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 29 Apr 2025 02:25 AM IST
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20% increase in patients of cervical spondylitis
संवाद न्यूज एजेंसी
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करनाल। घंटों मोबाइल फोन या लैपटॉप की स्क्रीन पर नजर गड़ाए रखने वालों को सावधान होने की जरूरत है। क्योंकि इसके कारण सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस की समस्या सामने आ रही है।
डॉक्टरों के मुताबिक नागरिक अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 30 मरीज गर्दन, पीठ और कंधों के दर्द की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं, जिनमें ज्यादातर युवा हैं। पिछले साल की अपेक्षा ऐसे मरीजों की संख्या 20 फीसदी बढ़ गई है।
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फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. सौरभ ने बताया कि घंटों एक ही मुद्रा में स्क्रीन के सामने बैठे रहना, गर्दन को झुकाकर मोबाइल चलाना, लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठे रहना, योग और व्यायाम की कमी, शारीरिक गतिविधियां कम करना आदि कारणों से गर्दन पर असामान्य दबाव पड़ता है। जिससे ये सभी आदतें सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस और टेक्स्ट नेक सिंड्रोम को न्योता दे रही हैं। उन्होंने बताया कि अकसर लोग इसे सामान्य समझ कर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन लंबे समय तक ध्यान न देने से यह गंभीर दर्द और बीमारी का रूप ले सकता है।
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डॉक्टर ने बताया कि मोबाइल को आंखों की सीध में रखकर काम करें व गर्दन झुकाकर अधिक समय तक फोन इत्यादि न चलाएं, बैठते समय पीठ को सीधा रखें और कुर्सी का सहारा लें, स्क्रीन समय को सीमित रखें और एक ही मुद्रा में अधिक समय तक बैठने से बचें और कम से कम 20 से 30 मिनट का काम से ब्रेक लेकर गर्दन व कंधों को स्ट्रैच करें।
क्या है सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस : डॉ. सौरभ ने बताया कि हमारी रीढ़ की हड्डी में एक के ऊपर एक कई छोटी-छोटी हड्डियां कोशिकाएं होती हैं। हर दो हड्डियों के बीच में एक नरम स्पंज जैसा कुशन होता है जिसे इंटरवर्टेब्रल डिस्क कहते हैं। इस डिस्क के बीच में एक जैल जैसा गाढ़ा पदार्थ होता है जिसे न्यूक्लिस पलपोस कहा जाता है।
यह डिस्क हमारी रीढ़ को लचीला बनाती है और झटकों को सोखने का काम करती है। लेकिन जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है या गलत मुद्रा के कारण लगातार दबाव पड़ता है यह डिस्क सूखने और कमजोर होने लगती है। न्यूक्लिस पलपोस का पानी कम होने लगता है जिससे डिस्क पतली और सख्त हो जाती है, डिस्क सिकुड़ने से हड्डियां आपस में रगड़ने लगती हैं और वहीं से जोड़ों में अकड़न, दर्द और सूजन की समस्या शुरू हो जाती है।
इसके अलावा डिस्क के फटने या बाहर निकलने से नसों पर दबाव भी पड़ सकता है जिससे हाथों में झनझनाहट, कमजोरी या तेज दर्द महसूस होने लगता है और गर्दन में अकड़न आने लगती है जिससे अक्सर गर्दन जाम हो गई जैसा महसूस होता है।
क्या है टेक्स्ट नेक सिंड्रोम: यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें गर्दन में दर्द और जकड़न हो जाती है और यह लगातार मोबाइल फोन और लैपटॉप आदि उपकरणों को गर्दन झुकाकर इस्तेमाल करने के कारण होता है। घंटों तक सिर को झुकाकर स्क्रीन देखते हैं तो गर्दन की मांसपेशियों और रीढ़ की हड्डियों पर बहुत ज्यादा दबाव पड़ता है।

जिससे गर्दन में दर्द और जकड़न, कंधों में खिंचाव और दर्द, सिर दर्द होना, पीठ के ऊपरी हिस्से में दर्द, हाथों में झनझनाहट या कमजोरी होना और पीठ का झुक जाना जिससे शरीर का पोस्टर भी खराब होने लगता है। वहीं रीढ़ की हड्डी में गैप आ जाता है। नसों पर दबाव पड़ने लगता है जिससे हाथों और उंगलियों में समस्या आ सकती है और कम उम्र में ही गर्दन के ऑपरेशन तक की नौबत भी आ सकती है।
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