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चार वर्षों में पांच करोड़ रुपये पटाखों के जरिए उड़ा दिये धुएं में
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firecrackers
- फोटो : Kaithal
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दीपावली के आसपास वातावरण में प्रदूषण के बढ़ते स्तर में पटाखों की अहम भूमिका रहती है। पटाखों के जलाने का समय निर्धारित करने से लेकर तमाम प्रयासों के बावजूद प्रदूषण नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। इस बार भी दीपावली नजदीक है और पटाखे विक्रेताओं ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। एक अनुमान के अनुसार पिछले चार साल में अकेले कैथल में चार से पांच करोड़ रुपये पटाखों के धुएं में उड़ा दिए गए। इस बार भी लाखों रुपये के पटाखे उड़ाए जाने की संभावना है। अमर उजाला द्वारा अपील की जा रही है कि पटाखे न जलाएं। पर्यावरण के साथ-साथ अपने धन की भी बचत करें।
जानकारी के अनुसार पिछले चार से पांच वर्ष में दीपावली के दौरान जिलावासी करीब चार से पांच करोड़ रुपये पटाखों के जरिये धुएं में उड़ा दिए गए। लेकिन इस बार जो माल विक्रेताओं ने मंगवाया है या फिर मंगवाने वाले हैं, उसमें ज्यादातर इको फ्रेंडली बताया जा रहा है। हालांकि प्रदूषण से बचाव के लिए कंपनियों ने इस बार ग्रीन क्रैकर मार्केट में उतारे हैं, लेकिन वे भी पूरी तरह से प्रदूषण रहित नहीं हैं। पटाखे, फूलझड़ी, फिरकी, अनार से लेकर रॉकेट जैसे प्रोडक्ट ग्रीन हैं, जिन पर विशेष रूप से इको फ्रेंडली होने का मार्का लगाया गया है।
गौरतलब है कि जिले में पटाखों के मुख्य सप्लायर केवल चार हैं। इसके अलावा कुछ खरीदार जिले के बाहर से भी दीपावली पर बेचने के लिए पटाखे मंगवा लेते हैं, जिन्हें स्टॉल लगाकर बेचा जाता है। जिस तरह से हर बार करीब एक करोड़ रुपये के पटाखे प्रयोग किए जाते हैं, इस बार विक्रेताओं ने 30 प्रतिशत तक कम बिक्री की संभावना जताई है।
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दीपावली नजदीक आने के साथ-साथ बढ़ेगी बिक्री
पटाखे विक्रेता सुशील कुमार, यतिन कुमार व नवीन कुमार ने बताया कि दीपावली नजदीक आने के साथ-साथ बिक्री बढ़ेगी। इस बार उन्होंने माल की सप्लाई भी कम मंगवाई है। जो सामान मंगवाया है, वो पर्यावरण को प्रदूषित नहीं करते हैं। कोरोना काल का भी प्रभाव बिक्री पर स्पष्ट रूप से पड़ेगा। बीते वर्षों में दशहरा के दौरान ही खरीद शुरू हो जाती थी, लेकिन इस बार दीपावली से चार पांच दिन पहले ही बिक्री शुरू होगी।
स्टॉलों से होती है सबसे ज्यादा बिक्री
पटाखे विक्रेताओं ने बताया कि गोदामों पर खरीद के लिए सामान्य ग्राहक नहीं आता। ज्यादातर ब्रिकी स्टॉल के जरिये होती है। दीपावली से कुछ दिन पहले प्रशासन से अनुमति लेने के बाद हुडा सेक्टर 19 या फिर चंदाना गेट पर पटाखों के लिए स्टॉल लगाए जाते हैं। वहीं से लोग पटाखों की बिक्री करते हैं।
शहरवासी अशोक, पवन, सतीश, राजू, प्रदीप व भूषण ने बताया कि जिलावासी प्रदूषण को रोकने में अपना हर संभव सहयोग दें। असल तो पटाखों के इस्तेमाल से परहेज करें, लेकिन अगर फिर भी पटाखे जलाने हैं तो इको फ्रेंडली पटाखों का प्रयोग करें। इससे दीपावली की रौनक भी कम नहीं होगी और साथ में पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा।
नगर परिषद के ईओ अशोक कुमार ने बताया कि शहर में पटाखे जलाने से संबंधित अभी तक कोई गाइड लाइन उनके पास नहीं आई है। जैसे ही कोई आदेश आता है, वह शहरवासियों को बताया जाएगा। उसी के आधार पर खरीद होगी।
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जानकारी के अनुसार पिछले चार से पांच वर्ष में दीपावली के दौरान जिलावासी करीब चार से पांच करोड़ रुपये पटाखों के जरिये धुएं में उड़ा दिए गए। लेकिन इस बार जो माल विक्रेताओं ने मंगवाया है या फिर मंगवाने वाले हैं, उसमें ज्यादातर इको फ्रेंडली बताया जा रहा है। हालांकि प्रदूषण से बचाव के लिए कंपनियों ने इस बार ग्रीन क्रैकर मार्केट में उतारे हैं, लेकिन वे भी पूरी तरह से प्रदूषण रहित नहीं हैं। पटाखे, फूलझड़ी, फिरकी, अनार से लेकर रॉकेट जैसे प्रोडक्ट ग्रीन हैं, जिन पर विशेष रूप से इको फ्रेंडली होने का मार्का लगाया गया है।
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गौरतलब है कि जिले में पटाखों के मुख्य सप्लायर केवल चार हैं। इसके अलावा कुछ खरीदार जिले के बाहर से भी दीपावली पर बेचने के लिए पटाखे मंगवा लेते हैं, जिन्हें स्टॉल लगाकर बेचा जाता है। जिस तरह से हर बार करीब एक करोड़ रुपये के पटाखे प्रयोग किए जाते हैं, इस बार विक्रेताओं ने 30 प्रतिशत तक कम बिक्री की संभावना जताई है।
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दीपावली नजदीक आने के साथ-साथ बढ़ेगी बिक्री
पटाखे विक्रेता सुशील कुमार, यतिन कुमार व नवीन कुमार ने बताया कि दीपावली नजदीक आने के साथ-साथ बिक्री बढ़ेगी। इस बार उन्होंने माल की सप्लाई भी कम मंगवाई है। जो सामान मंगवाया है, वो पर्यावरण को प्रदूषित नहीं करते हैं। कोरोना काल का भी प्रभाव बिक्री पर स्पष्ट रूप से पड़ेगा। बीते वर्षों में दशहरा के दौरान ही खरीद शुरू हो जाती थी, लेकिन इस बार दीपावली से चार पांच दिन पहले ही बिक्री शुरू होगी।
स्टॉलों से होती है सबसे ज्यादा बिक्री
पटाखे विक्रेताओं ने बताया कि गोदामों पर खरीद के लिए सामान्य ग्राहक नहीं आता। ज्यादातर ब्रिकी स्टॉल के जरिये होती है। दीपावली से कुछ दिन पहले प्रशासन से अनुमति लेने के बाद हुडा सेक्टर 19 या फिर चंदाना गेट पर पटाखों के लिए स्टॉल लगाए जाते हैं। वहीं से लोग पटाखों की बिक्री करते हैं।
शहरवासी अशोक, पवन, सतीश, राजू, प्रदीप व भूषण ने बताया कि जिलावासी प्रदूषण को रोकने में अपना हर संभव सहयोग दें। असल तो पटाखों के इस्तेमाल से परहेज करें, लेकिन अगर फिर भी पटाखे जलाने हैं तो इको फ्रेंडली पटाखों का प्रयोग करें। इससे दीपावली की रौनक भी कम नहीं होगी और साथ में पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा।
नगर परिषद के ईओ अशोक कुमार ने बताया कि शहर में पटाखे जलाने से संबंधित अभी तक कोई गाइड लाइन उनके पास नहीं आई है। जैसे ही कोई आदेश आता है, वह शहरवासियों को बताया जाएगा। उसी के आधार पर खरीद होगी।