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Jind News: टेस्टिंग टीम ने पूछा- सोनीपत रेलवे ट्रैक की कैसी है हालत
Sun, 04 Jan 2026 11:15 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Sun, 04 Jan 2026 11:15 PM IST
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04जेएनडी18-रेलवे जंक्शन पर खड़ी हाइड्रोजन ट्रेन, जिसका ट्रायल होना बाकी है। संवाद
जींद। सोनीपत रेलवे ट्रैक पर चलने के लिए हाइड्रोजन ट्रेन दिल्ली से जींद पहुंच चुकी है। अब इसके संचालन के लिए रेलवे ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। लखनऊ से आरडीएसओ (रिसर्च डिजाइन्स एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइजेशन) की टीम जंक्शन पहुंच चुकी है और फिलहाल यह टीमें प्लांट की मशीनों की टेस्टिंग कर रही है।
सोनीपत रेलवे ट्रैक की स्थिति को लेकर लखनऊ से पहुंची टेस्टिंग टीम ने निरीक्षण से पहले स्थानीय लोको पायलटों और रेलकर्मियों से फीडबैक लिया। टीम ने जब ट्रैक की मौजूदा हालात के बारे में पूछा तो लोको पायलटों ने साफ तौर पर सुरक्षा को लेकर चिंता जताई।
उन्होंने बताया कि ट्रैक के दोनों ओर झाड़ियां काफी घनी होकर खड़ी हैं, जिससे कई स्थानों पर विजिबिलिटी प्रभावित होती है। इसके अलावा बीच ट्रैक पर लोगों के बैठे रहने और पैदल आवागमन की समस्या भी लगातार बनी रहती है, जो किसी भी तरह की टेस्टिंग और नियमित रेल संचालन के लिए खतरे का कारण बन सकती है।
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सुबह-शाम के समय ट्रैक पर बैठना, मोबाइल पर बात करना या पटरी पार करना आम बात हो गई है। इस स्थिति में टेस्टिंग के दौरान तेज गति से ट्रायल लेना जोखिम भरा साबित हो सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि टेस्टिंग शुरू करने से पहले ट्रैक के आसपास साफ-सफाई, झाड़ियों की कटाई और लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाया जाना जरूरी है।
इस दौरान टेस्टिंग टीम के अधिकारियों ने लोको पायलटों की बातों को गंभीरता से सुना और नोट किया। टीम के एक सदस्य ने बताया कि टेस्टिंग के दौरान सुरक्षा सर्वोपरि होती है। ट्रैक के किनारे मौजूद झाड़ियों, अतिक्रमण और अनधिकृत आवागमन को लेकर संबंधित विभाग को रिपोर्ट भेजी जाएगी। इसके बाद ही टेस्टिंग की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा।
टीम यह भी देखेगी कि ट्रैक पर बैलास्ट की स्थिति, स्लीपरों की मजबूती और रेल पटरियों का अलाइनमेंट में कुछ खामी तो नहीं है। टेस्टिंग का उद्देश्य भविष्य में ट्रेन संचालन को और सुरक्षित और सुगम बनाना है। यदि इस दौरान किसी भी तरह की कमी सामने आती है तो उसे दूर करने के बाद ही आगे की अनुमति दी जाएगी।
सीटीएम ने किया प्लांट का निरीक्षण
दिल्ली से सड़क के रास्ते जींद पहुंचे सीटीएम (चीफ ट्रैफिक मैनेजर) राजेश अवस्थी ने हाइड्रोजन प्लांट का निरीक्षण किया। उन्होंने हाइड्रोजन गैस को बनते देखा। इस दौरान उन्होंने कहा कि प्लांट में हाईमास्क लाइट की कमी है। इसलिए प्लांट के स्टोर की तरफ से एक और हाईमास्क लाइट लगाई जाए। वह रविवार सुबह दस बजे पहुंच गए थे और उन्होंने एक बजे तक प्लांट के हर पहलू पर बारीकी से बातचीत की।
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सोनीपत रेलवे ट्रैक की स्थिति को लेकर लखनऊ से पहुंची टेस्टिंग टीम ने निरीक्षण से पहले स्थानीय लोको पायलटों और रेलकर्मियों से फीडबैक लिया। टीम ने जब ट्रैक की मौजूदा हालात के बारे में पूछा तो लोको पायलटों ने साफ तौर पर सुरक्षा को लेकर चिंता जताई।
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उन्होंने बताया कि ट्रैक के दोनों ओर झाड़ियां काफी घनी होकर खड़ी हैं, जिससे कई स्थानों पर विजिबिलिटी प्रभावित होती है। इसके अलावा बीच ट्रैक पर लोगों के बैठे रहने और पैदल आवागमन की समस्या भी लगातार बनी रहती है, जो किसी भी तरह की टेस्टिंग और नियमित रेल संचालन के लिए खतरे का कारण बन सकती है।
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सुबह-शाम के समय ट्रैक पर बैठना, मोबाइल पर बात करना या पटरी पार करना आम बात हो गई है। इस स्थिति में टेस्टिंग के दौरान तेज गति से ट्रायल लेना जोखिम भरा साबित हो सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि टेस्टिंग शुरू करने से पहले ट्रैक के आसपास साफ-सफाई, झाड़ियों की कटाई और लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाया जाना जरूरी है।
इस दौरान टेस्टिंग टीम के अधिकारियों ने लोको पायलटों की बातों को गंभीरता से सुना और नोट किया। टीम के एक सदस्य ने बताया कि टेस्टिंग के दौरान सुरक्षा सर्वोपरि होती है। ट्रैक के किनारे मौजूद झाड़ियों, अतिक्रमण और अनधिकृत आवागमन को लेकर संबंधित विभाग को रिपोर्ट भेजी जाएगी। इसके बाद ही टेस्टिंग की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा।
टीम यह भी देखेगी कि ट्रैक पर बैलास्ट की स्थिति, स्लीपरों की मजबूती और रेल पटरियों का अलाइनमेंट में कुछ खामी तो नहीं है। टेस्टिंग का उद्देश्य भविष्य में ट्रेन संचालन को और सुरक्षित और सुगम बनाना है। यदि इस दौरान किसी भी तरह की कमी सामने आती है तो उसे दूर करने के बाद ही आगे की अनुमति दी जाएगी।
सीटीएम ने किया प्लांट का निरीक्षण
दिल्ली से सड़क के रास्ते जींद पहुंचे सीटीएम (चीफ ट्रैफिक मैनेजर) राजेश अवस्थी ने हाइड्रोजन प्लांट का निरीक्षण किया। उन्होंने हाइड्रोजन गैस को बनते देखा। इस दौरान उन्होंने कहा कि प्लांट में हाईमास्क लाइट की कमी है। इसलिए प्लांट के स्टोर की तरफ से एक और हाईमास्क लाइट लगाई जाए। वह रविवार सुबह दस बजे पहुंच गए थे और उन्होंने एक बजे तक प्लांट के हर पहलू पर बारीकी से बातचीत की।