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Jind News: जिले को हरा-भरा बनाने की तैयारी...आठ नर्सरियों में 2.13 करोड़ से तैयार होगी नई पौध, टेंडर जारी
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20जेएनडी02: शहर की एक नर्सरी में तैयार की जा रही पौध। फाइल फोटो।
जींद। आने वाले वर्षों में जिले को हरा-भरा बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। वन विभाग की नर्सरियों में तैयार होने वाली नई पौध सरकारी कार्यालयों, स्कूलों, सार्वजनिक स्थानों, सड़कों के किनारे, गांवों और किसानों के खेतों तक पहुंचेगी ताकि जिले में पौधरोपण अभियानों के लिए स्थानीय स्तर पर ही पौध उपलब्ध हो सके।
जींद वन मंडल ने जिले की आठ नर्सरियों में नई पौध तैयार करने के लिए करीब 2.13 करोड़ रुपये के टेंडर जारी किए हैं। जींद, नरवाना, सफीदों और जुलाना क्षेत्र की इन नर्सरियों में पौध तैयार करने से संबंधित कार्य की अवधि 194 दिन निर्धारित की गई है।
यानी चयनित एजेंसी को करीब छह माह से अधिक समय में निर्धारित नर्सरी कार्य पूरा करना होगा। हालांकि, पौध तैयार होने के बाद उसके रोपण योग्य आकार तक पहुंचने में प्रजाति और विकास के अनुसार अलग-अलग समय लग सकता है।
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टेंडर के तहत सफीदों मुख्यालय नर्सरी में 13.49 लाख रुपये, गतौली नर्सरी में 29.65 लाख, जींद मुख्यालय नर्सरी में 24.18 लाख, नरवाना नर्सरी में 41.80 लाख, हर्बल पार्क नर्सरी में 26.03 लाख, बरौदा नर्सरी में 32.27 लाख, पिल्लूखेड़ा नर्सरी में 13.81 लाख और उझाना नर्सरी में 31.44 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। इन सभी कार्यों पर कुल 2.13 करोड़ रुपये खर्च होंगे है।
छायादार व सजावटी पौधे लगाए जाएंगे
नर्सरियों में तैयार होने वाली पौध का उपयोग अलग-अलग क्षेत्रों में पौधरोपण के लिए किया जा सकेगा। सरकारी कार्यालयों और संस्थानों के परिसरों में छायादार व सजावटी पौधे लगाए जा सकेंगे। वहीं सड़कों के किनारे पौधरोपण से हरित पट्टियां विकसित करने में मदद मिलेगी। गांवों में सार्वजनिक स्थानों और स्कूलों के आसपास पौधे लगाए जा सकते हैं, जबकि किसानों को खेतों की मेड़ और खाली स्थानों पर पौधरोपण के लिए पौध उपलब्ध कराई जा सकती है।
गांवों और शहरों में बढ़ेगा हरित आवरण
नर्सरियों में तैयार होने वाले पौधे जब बड़े होकर पेड़ बनेंगे तो गांवों और शहरों में हरित आवरण बढ़ेगा। सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर छाया मिलेगी, सरकारी परिसरों की सुंदरता बढ़ेगी और खेतों की मेड़ों पर हरियाली विकसित की जा सकेगी। पेड़ स्थानीय स्तर पर गर्मी के प्रभाव को कम करने, धूल रोकने और प्राकृतिक पर्यावरण को बेहतर बनाने में भी योगदान देते हैं। इस लिहाज से 2.13 करोड़ रुपये की यह राशि केवल पौध तैयार करने पर खर्च नहीं होगी, बल्कि आने वाले वर्षों की हरित विरासत तैयार करने की दिशा में निवेश होगी।
वर्जन
नर्सरियों में पौध तैयार करने का उद्देश्य जिले में पौधरोपण के लिए स्थानीय स्तर पर पर्याप्त पौध उपलब्ध कराना है। तैयार पौध का उपयोग विभागीय पौधरोपण के साथ जरूरत के अनुसार विभिन्न सरकारी और सार्वजनिक स्थानों पर हरियाली बढ़ाने में किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आज लगाई जाने वाली पौध आने वाले वर्षों में पेड़ों का रूप लेगी और जिले के पर्यावरण को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। -पवन ग्रोवर, डीएफओ जींद।
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जींद वन मंडल ने जिले की आठ नर्सरियों में नई पौध तैयार करने के लिए करीब 2.13 करोड़ रुपये के टेंडर जारी किए हैं। जींद, नरवाना, सफीदों और जुलाना क्षेत्र की इन नर्सरियों में पौध तैयार करने से संबंधित कार्य की अवधि 194 दिन निर्धारित की गई है।
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यानी चयनित एजेंसी को करीब छह माह से अधिक समय में निर्धारित नर्सरी कार्य पूरा करना होगा। हालांकि, पौध तैयार होने के बाद उसके रोपण योग्य आकार तक पहुंचने में प्रजाति और विकास के अनुसार अलग-अलग समय लग सकता है।
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टेंडर के तहत सफीदों मुख्यालय नर्सरी में 13.49 लाख रुपये, गतौली नर्सरी में 29.65 लाख, जींद मुख्यालय नर्सरी में 24.18 लाख, नरवाना नर्सरी में 41.80 लाख, हर्बल पार्क नर्सरी में 26.03 लाख, बरौदा नर्सरी में 32.27 लाख, पिल्लूखेड़ा नर्सरी में 13.81 लाख और उझाना नर्सरी में 31.44 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। इन सभी कार्यों पर कुल 2.13 करोड़ रुपये खर्च होंगे है।
छायादार व सजावटी पौधे लगाए जाएंगे
नर्सरियों में तैयार होने वाली पौध का उपयोग अलग-अलग क्षेत्रों में पौधरोपण के लिए किया जा सकेगा। सरकारी कार्यालयों और संस्थानों के परिसरों में छायादार व सजावटी पौधे लगाए जा सकेंगे। वहीं सड़कों के किनारे पौधरोपण से हरित पट्टियां विकसित करने में मदद मिलेगी। गांवों में सार्वजनिक स्थानों और स्कूलों के आसपास पौधे लगाए जा सकते हैं, जबकि किसानों को खेतों की मेड़ और खाली स्थानों पर पौधरोपण के लिए पौध उपलब्ध कराई जा सकती है।
गांवों और शहरों में बढ़ेगा हरित आवरण
नर्सरियों में तैयार होने वाले पौधे जब बड़े होकर पेड़ बनेंगे तो गांवों और शहरों में हरित आवरण बढ़ेगा। सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर छाया मिलेगी, सरकारी परिसरों की सुंदरता बढ़ेगी और खेतों की मेड़ों पर हरियाली विकसित की जा सकेगी। पेड़ स्थानीय स्तर पर गर्मी के प्रभाव को कम करने, धूल रोकने और प्राकृतिक पर्यावरण को बेहतर बनाने में भी योगदान देते हैं। इस लिहाज से 2.13 करोड़ रुपये की यह राशि केवल पौध तैयार करने पर खर्च नहीं होगी, बल्कि आने वाले वर्षों की हरित विरासत तैयार करने की दिशा में निवेश होगी।
वर्जन
नर्सरियों में पौध तैयार करने का उद्देश्य जिले में पौधरोपण के लिए स्थानीय स्तर पर पर्याप्त पौध उपलब्ध कराना है। तैयार पौध का उपयोग विभागीय पौधरोपण के साथ जरूरत के अनुसार विभिन्न सरकारी और सार्वजनिक स्थानों पर हरियाली बढ़ाने में किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आज लगाई जाने वाली पौध आने वाले वर्षों में पेड़ों का रूप लेगी और जिले के पर्यावरण को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। -पवन ग्रोवर, डीएफओ जींद।