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कलियुग में ओम नमः शिवाय’ मंत्र ही सार तत्व : आचार्य राजेंद्र महाराज
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फोटो 2 नरवाना। कथा श्रवण करती श्रद्धालु महिलाएं। स्रोत आयोजक
नरवाना। श्री सिद्धिविनायक सेवा समिति की ओर से हुड्डा ग्राउंड, रेलवे रोड पर आयोजित श्री शिव महापुराण कथा के सप्तम दिवस वृंदावन से पहुंचे आचार्य राजेंद्र महाराज ने भगवान शिव की महिमा, ज्ञान, वैराग्य और शिव नाम के महत्व का वर्णन किया। कथा के अंतिम दिन श्रद्धालु भक्ति में डूबे नजर आए और ‘हर-हर महादेव’ तथा ओम नमः शिवाय’ के जयघोष से कथा स्थल गूंज उठा।
आचार्य राजेंद्र महाराज ने कहा कि कथा कभी समाप्त नहीं होती, बल्कि केवल विश्राम लेती है। श्री शिव महापुराण का श्रवण एवं अध्ययन मन को शांति प्रदान करता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। उन्होंने कहा कि कलियुग में भगवान शिव का नाम ही सार तत्व है। श्रद्धा और विश्वास के साथ ओम नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करने से मन को शांति मिलती है।
उन्होंने भगवान शिव के विभिन्न स्वरूपों और द्वादश ज्योतिर्लिंगों की महिमा का भी वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान शिव की आराधना, पूजा और भजन से व्यक्ति को आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है। सोमवार, प्रदोष, महाशिवरात्रि और मासिक शिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा-अर्चना का विशेष धार्मिक महत्व बताया। कथा के सप्तम दिवस के यजमान मुकेश गोयल, नविंदू सिंगला, हंसराज समैण और सतनारायण बंसल रहे।
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कथा के समापन अवसर पर श्रद्धालुओं ने आचार्य राजेंद्र महाराज को नम आंखों से विदाई दी। कार्यक्रम के प्रधान कैलाश सिंगला ने कथा को सफल बनाने में सहयोग देने वाले श्रद्धालुओं, अतिथियों और सहयोगियों का आभार जताते हुए कहा कि सभी के सहयोग से नरवाना शहर को वृंदावन जैसा भक्तिमय बनाने का प्रयास सफल रहा।
इस दौरान ब्राह्मणों, टेंट, साउंड और म्यूजिक सेवा से जुड़े सहयोगियों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर पूर्व प्रधान नरेश जैन, राकेश शर्मा, संयोजक विनोद मंगला, कैशियर जयपाल बंसल, सलाहकार देवीराम गर्ग, सतीश बंसल, जितेंद्र जिंदल, राजेश बाता, पवन मित्तल मौजूद रहे।
फोटो 2 नरवाना। कथा श्रवण करती श्रद्धालु महिलाएं। स्रोत आयोजक
फोटो 3 नरवाना। राधा कृष्ण की झांकी। स्रोत आयोजक।
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आचार्य राजेंद्र महाराज ने कहा कि कथा कभी समाप्त नहीं होती, बल्कि केवल विश्राम लेती है। श्री शिव महापुराण का श्रवण एवं अध्ययन मन को शांति प्रदान करता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। उन्होंने कहा कि कलियुग में भगवान शिव का नाम ही सार तत्व है। श्रद्धा और विश्वास के साथ ओम नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करने से मन को शांति मिलती है।
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उन्होंने भगवान शिव के विभिन्न स्वरूपों और द्वादश ज्योतिर्लिंगों की महिमा का भी वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान शिव की आराधना, पूजा और भजन से व्यक्ति को आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है। सोमवार, प्रदोष, महाशिवरात्रि और मासिक शिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा-अर्चना का विशेष धार्मिक महत्व बताया। कथा के सप्तम दिवस के यजमान मुकेश गोयल, नविंदू सिंगला, हंसराज समैण और सतनारायण बंसल रहे।
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कथा के समापन अवसर पर श्रद्धालुओं ने आचार्य राजेंद्र महाराज को नम आंखों से विदाई दी। कार्यक्रम के प्रधान कैलाश सिंगला ने कथा को सफल बनाने में सहयोग देने वाले श्रद्धालुओं, अतिथियों और सहयोगियों का आभार जताते हुए कहा कि सभी के सहयोग से नरवाना शहर को वृंदावन जैसा भक्तिमय बनाने का प्रयास सफल रहा।
इस दौरान ब्राह्मणों, टेंट, साउंड और म्यूजिक सेवा से जुड़े सहयोगियों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर पूर्व प्रधान नरेश जैन, राकेश शर्मा, संयोजक विनोद मंगला, कैशियर जयपाल बंसल, सलाहकार देवीराम गर्ग, सतीश बंसल, जितेंद्र जिंदल, राजेश बाता, पवन मित्तल मौजूद रहे।
फोटो 2 नरवाना। कथा श्रवण करती श्रद्धालु महिलाएं। स्रोत आयोजक
फोटो 3 नरवाना। राधा कृष्ण की झांकी। स्रोत आयोजक।

फोटो 2 नरवाना। कथा श्रवण करती श्रद्धालु महिलाएं। स्रोत आयोजक