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भगवान महावीर स्वामी जयंती पर निकाली गई प्रभात फेरी
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सफीदों। नगर में वीरवार को भगवान महावीर स्वामी की जयंती धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर जैन धर्म के अनुयायियों ने सुबह नगर की पुरानी अनाज मंडी से प्रभातफेरी निकाली। इसमें समाज के सैकड़ों लोगों ने भाग लिया।
प्रभातफेरी पहले नगर की जैन स्थानक पहुंची। जहां पर एसपी मुनि महाराज ने उपस्थित श्रद्धालुओं को मंगलपाठ सुनाया। उसके उपरांत प्रभातफेरी नगर के जैन मंदिर पहुंची जहां पर श्रद्धालुओं ने भगवान महावीर स्वामी के दर्शन किए। इस कार्यक्रम की अध्यक्ष मंदिर समिति के अध्यक्ष चंद्रप्रकाश जैन ने की। प्रधान चंद्रप्रकाश गर्ग ने आए हुए श्रद्धालुओं का स्वागत करते हुए उन्हें भगवान महावीर स्वामी जयंती की बधाई दी। उन्होंने बताया कि इस उपलक्ष्य में मंदिर प्रांगण में अनेक धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर स्वामी का जन्म 599 ईसा पूर्व बिहार के कुंडलपुर के राजघराने में हुआ था। इनके माता का नाम त्रिशला और पिता सिद्धार्थ थे। भगवान महावीर के बचपन का नाम वर्धमान था। राजसी ठाट में पले बढ़े वर्धमान ने तमाम भौतिक सुविधाओं को त्यागकर 30 वर्ष की आयु में घर छोड़ कर 12 साल कठोर तप करके कैवल्य ज्ञान प्राप्त किया और वह तीर्थंकर कहलाए। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर ने जगत सत्य व अहिंसा का संदेश दिया है तथा हर किसी को चाहिए कि वे इस मार्ग पर चलकर अपने जीवन पथ को आगे बढ़ाएं।
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प्रभातफेरी पहले नगर की जैन स्थानक पहुंची। जहां पर एसपी मुनि महाराज ने उपस्थित श्रद्धालुओं को मंगलपाठ सुनाया। उसके उपरांत प्रभातफेरी नगर के जैन मंदिर पहुंची जहां पर श्रद्धालुओं ने भगवान महावीर स्वामी के दर्शन किए। इस कार्यक्रम की अध्यक्ष मंदिर समिति के अध्यक्ष चंद्रप्रकाश जैन ने की। प्रधान चंद्रप्रकाश गर्ग ने आए हुए श्रद्धालुओं का स्वागत करते हुए उन्हें भगवान महावीर स्वामी जयंती की बधाई दी। उन्होंने बताया कि इस उपलक्ष्य में मंदिर प्रांगण में अनेक धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर स्वामी का जन्म 599 ईसा पूर्व बिहार के कुंडलपुर के राजघराने में हुआ था। इनके माता का नाम त्रिशला और पिता सिद्धार्थ थे। भगवान महावीर के बचपन का नाम वर्धमान था। राजसी ठाट में पले बढ़े वर्धमान ने तमाम भौतिक सुविधाओं को त्यागकर 30 वर्ष की आयु में घर छोड़ कर 12 साल कठोर तप करके कैवल्य ज्ञान प्राप्त किया और वह तीर्थंकर कहलाए। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर ने जगत सत्य व अहिंसा का संदेश दिया है तथा हर किसी को चाहिए कि वे इस मार्ग पर चलकर अपने जीवन पथ को आगे बढ़ाएं।
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