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नागरिक अस्पताल में नहीं रेडियोलॉजिस्ट
ब्यूरो/ अमर उजाला, जींद
Updated Sat, 17 Dec 2016 12:16 AM IST
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नागरिक अस्पताल के अल्ट्रासाउंड केंद्र पर लगा ताला।
- फोटो : jind
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स्वास्थ्य विभाग की ओर से अल्ट्रासाउंड केंद्रों के खिलाफ की गई कार्रवाई के विरोध में शुक्रवार को निजी अल्ट्रासाउंड केंद्र बंद रहे। इससे गर्भवती महिलाओं को काफी परेशानी हुई। रेडियोलॉजिस्ट नहीं होने से नागरिक अस्पताल में भी गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड नहीं हो पाए। अल्ट्रासाउंड के लिए अस्पताल आने वाली गर्भवती महिलाओं को डॉक्टरों ने खानपुर और रोहतक पीजीआई रेफर कर दिया।
गौरतलब है कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा पीएनडीटी एक्ट की पालना के लिए निजी अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालकों पर लगातार शिकंजा कसा जा रहा है। पीएनडीटी एक्ट की उल्लंघना के आरोप में स्वास्थ्य विभाग द्वारा हाल ही में एक अल्ट्रासाउंड केंद्र की मशीन सील किए जाने तथा रोहतक रोड स्थित एक अल्ट्रासाउंड केंद्र के रिकार्ड में मिली खामियों के बाद केंद्र संचालक को नोटिस दिए जाने से स्वास्थ्य विभाग तथा इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) में खींचतान बढ़ गई है। स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई से खफा होकर आईएमए ने गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड नहीं करने का फैसला लिया है।
आईएमए के इस फैसले के बाद शुक्रवार को जिले के सभी अल्ट्रासाउंड केंद्रों संचालकों ने अल्ट्रासाउंड करने से साफ मना कर दिया। निजी अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालकों ने गर्भवती महिलाओं को छोड़कर बाकी सामान्य अल्ट्रासाउंड किए। गर्भवती महिलाओं ने अल्ट्रासाउंड के लिए नागरिक अस्पताल का रुख किया, लेकिन रेडियोलॉजिस्ट नहीं होने से यहां भी गर्भवती महिलाओं का अल्ट्रासाउंड नहीं हो सका। गर्भवती महिलाओं को चिकित्सकों द्वारा अल्ट्रासाउंड के लिए रोहतक व खानपुर पीजीआई रेफर किया गया।
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मैं अपनी पत्नी का अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए जींद आया था। यहां पहुंचा तो पता चला कि निजी अल्ट्रासाउंड संचालकों द्वारा गर्भवती महिलाओं का अल्ट्रासाउंड नहीं किया जा रहा है। अब बिना अल्ट्रासाउंड कराए घर जाना पड़ेगा, क्योंकि यहां अल्ट्रासाउंड की दूसरी कोई सुविधा नहीं है।
गुलजारी
मुझे अपना अल्ट्रासाउंड करवाना था, लेकिन निजी अल्ट्रासाउंड संचालकों ने अल्ट्रासाउंड करने से मना कर दिया। जब अल्ट्रासाउंड के लिए सरकारी अस्पताल पहुंची तो सरकारी अस्पताल के चिकित्सकों ने पीजीआई की पर्ची बना दी। अब ऐसी स्थिति में पीजीआई जाना संभव नहीं है। इसलिए बिना अल्ट्रासाउंड कराए ही घर जाना पड़ेगा।
सीमा
एक सप्ताह में जवाब नहीं दिया तो रद्द होगा लाइसेंस
नागरिक अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. संजय दहिया ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम ने डॉ. प्रभुदयाल तथा डॉ. प्रवीण गुप्ता के नेतृत्व में शहर के रोहतक रोड स्थित निजी अल्ट्रासाउंड केंद्र के रिकार्ड की जांच की थी। रिकार्ड में काफी खामियां पाई गईं। विभाग की टीम ने अल्ट्रासाउंड केंद्र के रिकार्ड कब्जे में लेकर केंद्र संचालक को कारण बताओ नोटिस जारी कर एक सप्ताह में जवाब मांगा है। यदि अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालक ने एक सप्ताह में नोटिस का जवाब नहीं दिया तो उसका लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा।
पीएनडीटी एक्ट का गलत प्रयोग कर रहा विभाग
पीएनडीटी एक्ट की आड़ में स्वास्थ्य विभाग निजी अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालकों पर दबाव बना रहा है। निजी अल्ट्रासाउंड संचालकों के खिलाफ विभाग तानाशाही रवैया अपना रहा है। इससे निजी अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालकों में भय बना हुआ है। अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट में छोटी सी क्लेरिकल मिस्टेक मिलने पर भी विभाग तानाशाही रवैया अपनाकर कार्रवाई कर देता है। जबकि प्रदेश सरकार द्वारा जारी किए गए आदेशों में यह स्पष्ट किया गया है कि रिपोर्ट में क्लेरिकल मिस्टेक होने पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। हैरत की बात यह है कि सरकारी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन होने के बाद भी वहां गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड नहीं किए जा रहे हैं क्योंकि अस्पताल प्रशासन पीएनडीटी एक्ट के नियमों के तहत रिकार्ड पूरा करने की सिरदर्दी नहीं लेना चाहता।
-डॉ. सुरेश जैन, प्रधान आईएमए जींद
कई निजी अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालकों द्वारा पीएनडीटी एक्ट की सही पालना नहीं की जा रही है। जो निजी अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालक एक्ट की पालना नहीं करेगा, उसके खिलाफ विभाग सख्त कार्रवाई करेगा। सरकारी अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट नहीं होने से यहां अल्ट्रासाउंड नहीं हो रहे हैं। रेडियोलॉजिस्ट के लिए विभाग को लिखा गया है। शहर के एक निजी अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालक के रिकार्ड में काफी गड़बड़ मिली है, उसे नोटिस भेजा गया है। यदि वह इसका जवाब नहीं देता तो उसका लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा।
डॉ. संजय दहिया, सिविल सर्जन, नागरिक अस्पताल, जींद
पीएनडीटी एक्ट के तहत गठित एडवाइजरी कमेटी के सदस्यों को निर्देश दिए गए हैं कि वे विभिन्न अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर छापामारी की कार्रवाई में तेजी लाएं और ऐसे केस जिनमें छापामारी हुई है, उनकी वर्तमान स्थिति का आंकलन भी करते रहें। ऐसे गांव जिनका लिंगानुपात अच्छा है, उन गांवों की पंचायतों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। इसके अलावा, जिन ग्राम पंचायतों का लिंगानुपात खराब है, उन्हें इस कार्य में सक्रिय भागीदारी निभाने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।
विनय सिंह, डीसी, जींद
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गौरतलब है कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा पीएनडीटी एक्ट की पालना के लिए निजी अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालकों पर लगातार शिकंजा कसा जा रहा है। पीएनडीटी एक्ट की उल्लंघना के आरोप में स्वास्थ्य विभाग द्वारा हाल ही में एक अल्ट्रासाउंड केंद्र की मशीन सील किए जाने तथा रोहतक रोड स्थित एक अल्ट्रासाउंड केंद्र के रिकार्ड में मिली खामियों के बाद केंद्र संचालक को नोटिस दिए जाने से स्वास्थ्य विभाग तथा इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) में खींचतान बढ़ गई है। स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई से खफा होकर आईएमए ने गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड नहीं करने का फैसला लिया है।
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आईएमए के इस फैसले के बाद शुक्रवार को जिले के सभी अल्ट्रासाउंड केंद्रों संचालकों ने अल्ट्रासाउंड करने से साफ मना कर दिया। निजी अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालकों ने गर्भवती महिलाओं को छोड़कर बाकी सामान्य अल्ट्रासाउंड किए। गर्भवती महिलाओं ने अल्ट्रासाउंड के लिए नागरिक अस्पताल का रुख किया, लेकिन रेडियोलॉजिस्ट नहीं होने से यहां भी गर्भवती महिलाओं का अल्ट्रासाउंड नहीं हो सका। गर्भवती महिलाओं को चिकित्सकों द्वारा अल्ट्रासाउंड के लिए रोहतक व खानपुर पीजीआई रेफर किया गया।
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मैं अपनी पत्नी का अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए जींद आया था। यहां पहुंचा तो पता चला कि निजी अल्ट्रासाउंड संचालकों द्वारा गर्भवती महिलाओं का अल्ट्रासाउंड नहीं किया जा रहा है। अब बिना अल्ट्रासाउंड कराए घर जाना पड़ेगा, क्योंकि यहां अल्ट्रासाउंड की दूसरी कोई सुविधा नहीं है।
गुलजारी
मुझे अपना अल्ट्रासाउंड करवाना था, लेकिन निजी अल्ट्रासाउंड संचालकों ने अल्ट्रासाउंड करने से मना कर दिया। जब अल्ट्रासाउंड के लिए सरकारी अस्पताल पहुंची तो सरकारी अस्पताल के चिकित्सकों ने पीजीआई की पर्ची बना दी। अब ऐसी स्थिति में पीजीआई जाना संभव नहीं है। इसलिए बिना अल्ट्रासाउंड कराए ही घर जाना पड़ेगा।
सीमा
एक सप्ताह में जवाब नहीं दिया तो रद्द होगा लाइसेंस
नागरिक अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. संजय दहिया ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम ने डॉ. प्रभुदयाल तथा डॉ. प्रवीण गुप्ता के नेतृत्व में शहर के रोहतक रोड स्थित निजी अल्ट्रासाउंड केंद्र के रिकार्ड की जांच की थी। रिकार्ड में काफी खामियां पाई गईं। विभाग की टीम ने अल्ट्रासाउंड केंद्र के रिकार्ड कब्जे में लेकर केंद्र संचालक को कारण बताओ नोटिस जारी कर एक सप्ताह में जवाब मांगा है। यदि अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालक ने एक सप्ताह में नोटिस का जवाब नहीं दिया तो उसका लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा।
पीएनडीटी एक्ट का गलत प्रयोग कर रहा विभाग
पीएनडीटी एक्ट की आड़ में स्वास्थ्य विभाग निजी अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालकों पर दबाव बना रहा है। निजी अल्ट्रासाउंड संचालकों के खिलाफ विभाग तानाशाही रवैया अपना रहा है। इससे निजी अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालकों में भय बना हुआ है। अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट में छोटी सी क्लेरिकल मिस्टेक मिलने पर भी विभाग तानाशाही रवैया अपनाकर कार्रवाई कर देता है। जबकि प्रदेश सरकार द्वारा जारी किए गए आदेशों में यह स्पष्ट किया गया है कि रिपोर्ट में क्लेरिकल मिस्टेक होने पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। हैरत की बात यह है कि सरकारी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन होने के बाद भी वहां गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड नहीं किए जा रहे हैं क्योंकि अस्पताल प्रशासन पीएनडीटी एक्ट के नियमों के तहत रिकार्ड पूरा करने की सिरदर्दी नहीं लेना चाहता।
-डॉ. सुरेश जैन, प्रधान आईएमए जींद
कई निजी अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालकों द्वारा पीएनडीटी एक्ट की सही पालना नहीं की जा रही है। जो निजी अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालक एक्ट की पालना नहीं करेगा, उसके खिलाफ विभाग सख्त कार्रवाई करेगा। सरकारी अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट नहीं होने से यहां अल्ट्रासाउंड नहीं हो रहे हैं। रेडियोलॉजिस्ट के लिए विभाग को लिखा गया है। शहर के एक निजी अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालक के रिकार्ड में काफी गड़बड़ मिली है, उसे नोटिस भेजा गया है। यदि वह इसका जवाब नहीं देता तो उसका लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा।
डॉ. संजय दहिया, सिविल सर्जन, नागरिक अस्पताल, जींद
पीएनडीटी एक्ट के तहत गठित एडवाइजरी कमेटी के सदस्यों को निर्देश दिए गए हैं कि वे विभिन्न अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर छापामारी की कार्रवाई में तेजी लाएं और ऐसे केस जिनमें छापामारी हुई है, उनकी वर्तमान स्थिति का आंकलन भी करते रहें। ऐसे गांव जिनका लिंगानुपात अच्छा है, उन गांवों की पंचायतों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। इसके अलावा, जिन ग्राम पंचायतों का लिंगानुपात खराब है, उन्हें इस कार्य में सक्रिय भागीदारी निभाने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।
विनय सिंह, डीसी, जींद