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निपुण मिशन : जिले के स्कूलों में शुरू होगा 90 दिवसीय उपचारात्मक कार्यक्रम

Sun, 20 Sep 2026 11:53 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 20 Sep 2026 11:53 PM IST
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Nipun Mission: 90-day remedial program to be started in district schools
20जेएनडी06: प्रथम आवधिक आकलन कार्यक्रम की जानकारी देते हुए राजेश व​शिष्ठ। स्रोत: अध्यापक
जींद। निपुण हरियाणा मिशन के तहत विद्यार्थियों की आधारभूत भाषा और गणितीय दक्षताओं को मजबूत करने के लिए जिले के विद्यालयों में 90 दिवसीय केंद्रित उपचारात्मक कार्यक्रम शुरू किया जाएगा। प्रथम आवधिक आकलन (पीए-1) में सामने आए परिणामों के आधार पर विद्यार्थियों के लर्निंग गैप को चिह्नित किया जाएगा और उसी के अनुरूप उपचारात्मक गतिविधियां करवाई जाएंगी। कार्यक्रम में विद्यार्थियों के अंकों के बजाय उनकी कमजोर दक्षताओं को आधार बनाया जाएगा।
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कार्यक्रम का उद्देश्य केवल परीक्षा परिणाम सुधारना नहीं, बल्कि प्रत्येक विद्यार्थी की वास्तविक सीखने की जरूरत पहचानकर उसे अपेक्षित कक्षा-स्तरीय दक्षता तक पहुंचाना है। इसके लिए पीए-1 के परिणामों का विद्यार्थीवार और दक्षतावार विश्लेषण किया जाएगा।
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कार्यक्रम के तहत विद्यालय के पहले घंटे को जीरो पीरियड के रूप में उपयोग किया जाएगा। इसमें 30 मिनट हिंदी और 30 मिनट गणित की कमजोर दक्षताओं पर केंद्रित गतिविधियां करवाई जाएंगी। विद्यार्थियों को उनकी जरूरत के अनुसार छोटे समूहों में बांटकर स्तरानुकूल शिक्षण दिया जाएगा।
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हिंदी में पठन, लेखन, मौखिक गतिविधियां और भाषा संबंधी अभ्यास, जबकि गणित में संख्या ज्ञान, गणना और अन्य आवश्यक दक्षताओं पर कार्य होगा। इसके लिए टीएलएम, कार्यपत्रकों, पठन सामग्री और खेल आधारित गतिविधियों का इस्तेमाल किया जाएगा।
खंड शिक्षा अधिकारी और क्लस्टर हेड विद्यालयों का नियमित निरीक्षण कर जीरो पीरियड, लर्निंग गैप और उपचारात्मक गतिविधियों की निगरानी करेंगे। वहीं बीआरपी, एबीआरसी और मेंटर शिक्षकों को आवश्यक शैक्षणिक सहयोग देंगे।
कक्षा के स्तर के अनुसार गतिविधियां तय की जाएंगी। पहली कक्षा में ध्वनि और वर्ण पहचान तथा 20 तक संख्या ज्ञान, दूसरी में मात्राओं, शब्द-वाक्य पठन और 99 तक संख्या ज्ञान, तीसरी में अनुच्छेद पठन व दो अंकीय घटाव, चौथी में विचारों की स्पष्ट अभिव्यक्ति तथा आकृतियों की समझ और पांचवीं में कहानी-अनुच्छेद पठन व भाग की अवधारणा मजबूत करने पर जोर रहेगा।


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मूल्यांकन का उद्देश्य केवल परिणाम जानना नहीं, बल्कि बच्चे की सीखने की जरूरत पहचानकर उसके सुधार की दिशा तय करना है। अगले 90 दिनों में योजनाबद्ध उपचारात्मक प्रयासों से विद्यार्थियों को अपेक्षित कक्षा-स्तरीय दक्षताओं तक पहुंचाने पर विशेष फोकस रहेगा। -राजेश वशिष्ठ, जिला समन्वयक एफएलएन
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