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भाजपा में योग्यता से मिलती है नौकरी, बेटे की सिफारिश भी नहीं मानी : डॉ. कृष्ण मिड्ढा
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आयोजित कार्यक्रम में कॉलोनी वासियों से मिलते हुए डिप्टी स्पीकर डॉक्टर कृष्ण मिड्ढा।
- फोटो : प्रमाण पत्र और ट्रॉफी के साथ मुस्कान।
संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। हरियाणा विधानसभा के डिप्टी स्पीकर डॉ. कृष्ण मिड्ढा ने कहा कि वर्तमान नायब सरकार में नौकरियां पूरी तरह योग्यता के आधार पर दी जा रही हैं। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री ने उनके बेटे की भी सिफारिश स्वीकार नहीं की जिससे यह साबित होता है कि भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी है।
वार्ड-23 में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. मिड्ढा ने कहा कि विधानसभा में उन्होंने खुद मुख्यमंत्री के समक्ष अपने बड़े बेटे के संबंध में बात रखी थी। उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा कि छोटा बेटा रूद्राक्ष जींद में सबको जानता है लेकिन बड़े बेटे को कोई नहीं जानता।
उन्होंने मुख्यमंत्री से कहा था कि यदि संभव हो तो उसे एचसीएस में अवसर दिया जाए। इस पर मुख्यमंत्री ने जवाब दिया कि यदि एक का पक्ष लिया जाएगा तो बाकी उम्मीदवारों के साथ न्याय कैसे होगा।
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डिप्टी स्पीकर ने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों में एसडीएम और तहसीलदार जैसे पदों पर नियुक्तियों के लिए लाखों-करोड़ों रुपये तक लिए जाते थे। उन्होंने कहा कि अब भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह कंप्यूटर आधारित और पारदर्शी है। उन्होंने कहा कि कंप्यूटर न तो मिड्ढा को जानता है न मुख्यमंत्री को और न किसी मंत्री को। वह केवल मेरिट को पहचानता है।
डॉ. मिड्ढा ने दावा किया कि वर्तमान सरकार में गरीब परिवारों के बच्चे भी बिना किसी सिफारिश और पैसे के उच्च पदों पर चयनित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब सपने में भी न सोच पाने वाले युवाओं को एसडीएम और एचसीएस जैसे पद मिल रहे हैं।
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जींद। हरियाणा विधानसभा के डिप्टी स्पीकर डॉ. कृष्ण मिड्ढा ने कहा कि वर्तमान नायब सरकार में नौकरियां पूरी तरह योग्यता के आधार पर दी जा रही हैं। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री ने उनके बेटे की भी सिफारिश स्वीकार नहीं की जिससे यह साबित होता है कि भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी है।
वार्ड-23 में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. मिड्ढा ने कहा कि विधानसभा में उन्होंने खुद मुख्यमंत्री के समक्ष अपने बड़े बेटे के संबंध में बात रखी थी। उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा कि छोटा बेटा रूद्राक्ष जींद में सबको जानता है लेकिन बड़े बेटे को कोई नहीं जानता।
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उन्होंने मुख्यमंत्री से कहा था कि यदि संभव हो तो उसे एचसीएस में अवसर दिया जाए। इस पर मुख्यमंत्री ने जवाब दिया कि यदि एक का पक्ष लिया जाएगा तो बाकी उम्मीदवारों के साथ न्याय कैसे होगा।
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डिप्टी स्पीकर ने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों में एसडीएम और तहसीलदार जैसे पदों पर नियुक्तियों के लिए लाखों-करोड़ों रुपये तक लिए जाते थे। उन्होंने कहा कि अब भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह कंप्यूटर आधारित और पारदर्शी है। उन्होंने कहा कि कंप्यूटर न तो मिड्ढा को जानता है न मुख्यमंत्री को और न किसी मंत्री को। वह केवल मेरिट को पहचानता है।
डॉ. मिड्ढा ने दावा किया कि वर्तमान सरकार में गरीब परिवारों के बच्चे भी बिना किसी सिफारिश और पैसे के उच्च पदों पर चयनित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब सपने में भी न सोच पाने वाले युवाओं को एसडीएम और एचसीएस जैसे पद मिल रहे हैं।