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छात्तर गांव में हालात सामान्य करने की कोशिशें तेज

Fri, 15 Oct 2021 11:18 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 15 Oct 2021 11:18 PM IST
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Efforts to normalize the situation in Chhattar village intensified
अनुसूचित जाति के लोगों से बातचीत करने पहुंचे एसडीएम व डीएसपी। संवाद - फोटो : Jind
जींद। उचाना उपमंडल के छात्तर गांव में अनुसूचित जाति के लोगों के बहिष्कार के मामले में उचाना के एसडीएम और डीएसपी शुक्रवार को फिर गांव में पहुंचे। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति के लोगों को रोजगार और राशन की समस्या नहीं होने दी जाएगी। वहीं, गांव में गैर अनुसूचित जाति के लोग भी हालात को सामान्य करने में लगे हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह दो लोगों का झगड़ा था, लेकिन कुछ लोगों ने इसे जातीय रंग दे दिया है।
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शुक्रवार दोपहर एसडीएम डॉ. राजेश खोथ और डीएसपी जितेंद्र कुमार गांव में पहुंचे। एसडीएम ने कहा कि अनुसूचित जाति के लोगों को किसी भी प्रकार से भयभीत होने की जरूरत नहीं है। वे बेखौफ होकर अपने काम कर सकते हैं। यदि कोई व्यक्ति दुकान से सामान नहीं देता है तो इसकी सूचना उनको दें। साथ उन्होंने बताया कि गांव में इस वित्तीय वर्ष में करीब 15 लाख रुपये के काम मनरेगा में करवाए गए हैं। इनमें से अधिकतर काम अनुसूचित जाति के लोगों ने ही किए हैं। साथ उन्होंने कहा कि गांव में अभी भी मनरेगा के तहत काम शुरू करवा दिया गया है। उक्त लोग चाहें तो वहां काम कर सकते हैं।
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छात्तर गांव सामाजिक समरसता और भाईचारे की मिसाल
वहीं छात्तर गांव निवासी पूनिया खाप के प्रवक्ता एडवोकेट जितेंद्र छात्तर ने कहा कि गांव में सामाजिक बहिष्कार जैसा कोई मुद्दा नहीं है। गांव में सभी जातियों के लोग एक साथ रह रहे हैं। कुछ लोग बाहर से आकर वीडियो बनाकर गांव की शांति भंग करने का काम कर रहे हैं। इससे गांव को बदनाम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि गांव में कोई बाहरी व्यक्ति आकर माहौल खराब करेगा तो उसकी शिकायत पुलिस को दी जाएगी। साथ ही जिन लोगों ने वीडियो वायरल किया है, उनको कानूनी नोटिस भेजा जाएगा। छात्तर ने कहा कि गांव की व्यक्तिगत लड़ाई को जातीय रंग देने वालों को कामयाब नहीं होने दिया जाएगा।
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जींद को किया जाए अनुसूचित जाति अत्याचार प्रभावित जिला घोषित : रजत कलसन
नेशनल अलायंस फॉर दलित ह्यूमन राइट्स के संयोजक एडवोकेट रजत कलसन ने विज्ञप्ति जारी कर कहा कि पूरे हरियाणा में अनुसूचित जाति के खिलाफ जातीय अत्याचार चरम पर है। जींद जिले में सबसे अधिक मामले आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि जींद जिले को अनुसूचित जाति अत्याचार प्रभावित जिला घोषित कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि पीड़ितों को समझौते के लिए पुलिस अधिकारियों द्वारा मजबूर किया जा रहा है। जिले के खापड़ व छात्तर गांवों में अनुसूचित जाति के लोगों का सामाजिक बहिष्कार किया जा रहा है। खापड़ में तो सामाजिक बहिष्कार के बारे में पीड़ितों ने आठ सितंबर को शिकायत दी थी, परंतु डेढ़ माह बीत जाने के बाद भी आज तक पुलिस ने उस में मुकदमा दर्ज नहीं किया है। उन्होंने कहा कि उचाना उपमंडल में सभी प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी जाति विशेष के नियुक्त किए गए हैं। यह अधिकारी पर्दे के पीछे से सामाजिक बहिष्कार के आरोपियों की मदद कर रहे हैं।

उचाना के एसडीएम डॉ. राजेश खोथ ने बताया कि मैं खुद डीएसपी के साथ गांव में गया हूं। प्रशासन पूरी तरह से शांति के पक्ष में है। 23 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। जांच की जा रही है। जो लोग सामाजिक बहिष्कार के मामले में संलिप्त पाएं जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। अनुसूचित जाति के लोगों को आश्वासन दिया गया है कि उन्हें किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं आने दी जाएगी।
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