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Jind News: जिले की सभी खेल नर्सरियों को 15 जून तक देनी होगी सुविधाओं की रिपोर्ट
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जींद। जिले में संचालित 129 खेल नर्सरियों की कार्यप्रणाली और खिलाड़ियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की समीक्षा के लिए खेल विभाग ने विशेष अभियान शुरू किया है। जिला खेल एवं युवा कार्यक्रम अधिकारी (डीएसओ) रामपाल हुड्डा ने सभी खेल नर्सरियों को निर्देश दिए हैं कि वे 15 जून तक अपनी-अपनी सुविधाओं और गतिविधियों की विस्तृत रिपोर्ट जिला खेल कार्यालय में प्रस्तुत करें।
डीएसओ रामपाल हुड्डा ने बताया कि खेल विभाग का मुख्य उद्देश्य खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इसी को ध्यान में रखते हुए जिले की सभी खेल नर्सरियों का निरीक्षण किया जाएगा। रिपोर्ट मिलने के बाद जिला खेल अधिकारी स्वयं भी विभिन्न नर्सरियों का दौरा कर व्यवस्थाओं का जायजा लेंगे।
निरीक्षण के दौरान यह देखा जाएगा कि नर्सरियों में नियुक्त कोच नियमित रूप से समय पर पहुंच रहे हैं या नहीं। इसके अलावा खिलाड़ियों और कोच की उपस्थिति रजिस्टर की भी जांच की जाएगी। खेल विभाग यह भी सुनिश्चित करेगा कि खिलाड़ियों को खेल सामग्री, प्रशिक्षण सुविधाएं और अन्य आवश्यक संसाधन निर्धारित मानकों के अनुसार मिल रहे हैं या नहीं।
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रामपाल हुड्डा ने कहा कि सरकार द्वारा खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए खेल नर्सरियों पर हर वर्ष लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं। ऐसे में यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि खिलाड़ियों को योजनाओं का पूरा लाभ मिले और किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाए। यदि निरीक्षण के दौरान किसी नर्सरी में कमियां पाई जाती हैं तो संबंधित अधिकारियों और कोचों से जवाब तलब किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि जिले की खेल नर्सरियां अनेक खिलाड़ियों को राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इसलिए सभी नर्सरी संचालकों और कोचों को पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ कार्य करना चाहिए।
विभाग का प्रयास है कि जिले का कोई भी खिलाड़ी खेल सुविधाओं से वंचित न रहे और उन्हें बेहतर माहौल में प्रशिक्षण उपलब्ध हो सके। इससे जिले में खेल संस्कृति को और मजबूती मिलेगी तथा नई प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।
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डीएसओ रामपाल हुड्डा ने बताया कि खेल विभाग का मुख्य उद्देश्य खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इसी को ध्यान में रखते हुए जिले की सभी खेल नर्सरियों का निरीक्षण किया जाएगा। रिपोर्ट मिलने के बाद जिला खेल अधिकारी स्वयं भी विभिन्न नर्सरियों का दौरा कर व्यवस्थाओं का जायजा लेंगे।
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निरीक्षण के दौरान यह देखा जाएगा कि नर्सरियों में नियुक्त कोच नियमित रूप से समय पर पहुंच रहे हैं या नहीं। इसके अलावा खिलाड़ियों और कोच की उपस्थिति रजिस्टर की भी जांच की जाएगी। खेल विभाग यह भी सुनिश्चित करेगा कि खिलाड़ियों को खेल सामग्री, प्रशिक्षण सुविधाएं और अन्य आवश्यक संसाधन निर्धारित मानकों के अनुसार मिल रहे हैं या नहीं।
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रामपाल हुड्डा ने कहा कि सरकार द्वारा खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए खेल नर्सरियों पर हर वर्ष लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं। ऐसे में यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि खिलाड़ियों को योजनाओं का पूरा लाभ मिले और किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाए। यदि निरीक्षण के दौरान किसी नर्सरी में कमियां पाई जाती हैं तो संबंधित अधिकारियों और कोचों से जवाब तलब किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि जिले की खेल नर्सरियां अनेक खिलाड़ियों को राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इसलिए सभी नर्सरी संचालकों और कोचों को पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ कार्य करना चाहिए।
विभाग का प्रयास है कि जिले का कोई भी खिलाड़ी खेल सुविधाओं से वंचित न रहे और उन्हें बेहतर माहौल में प्रशिक्षण उपलब्ध हो सके। इससे जिले में खेल संस्कृति को और मजबूती मिलेगी तथा नई प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।