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नागरिक अस्पताल में जन्म प्रमाणपत्र बनाने में गड़बड़ी करने का लगाया आरोप
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नागरिक अस्पताल में स्थापित आधार सेंटर। संवाद
- फोटो : Jind
नागरिक अस्पताल में बच्चों के जन्म प्रमाणपत्र बनाने में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। एक युवक ने अस्पताल प्रशासन को शिकायत देकर अस्पताल में स्थित आधार कार्ड सेंटर तथा अस्पताल के कर्मचारियों पर जन्म प्रमाणपत्र पर फर्जी मुहर लगाने के आरोप लगाए हैं। अस्पताल प्रशासन ने भी इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है।
युवक का आरोप है कि जो लोग आधार केंद्र संचालक को मौके पर ही 300 रुपये दे देते हैं उनको तुरंत बच्चे का जन्म प्रमाणपत्र बनाकर दे दिया जाता है, जबकि अन्य लोगों को 40 दिन का समय दिया जाता है।
गांव बिटानी निवासी अमित ने कहा कि वह दो दिन पहले अपने बच्चे का जन्म प्रमाणपत्र लेने के लिए नागरिक अस्पताल के कमरा नंबर 104 में आया था। यहां कर्मचारियों ने उसे नागरिक अस्पताल में ही स्थित आधार केंद्र पर भेज दिया। आधार केंद्र पर काम कर रहे युवक ने उससे कहा कि यदि उसे तुरंत जन्म प्रमाणपत्र चाहिए तो 300 रुपये देने होंगे, नहीं तो उसके बच्चे का जन्म प्रमाणपत्र 40 दिन बाद मिलेगा। इसके बाद अमित चला गया। सोमवार को अमित नागरिक अस्पताल पहुंचा और आधार केंद्र पर काम करने वाले युवक को 300 रुपये दे दिए। इसके बाद आधार सेंटर संचालक ने जन्म प्रमाणपत्र का प्रिंट निकाला और कमरा नंबर 104 में जाकर जन्म प्रमाणपत्र रजिस्ट्रार की मुहर लगवाकर तुरंत ले आया।
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अमित ने कहा कि उसे संदेह हुआ कि कहीं यह मुहर नकली तो नहीं। इसके बाद उसने इसकी शिकायत प्रधान चिकित्सा अधिकारी से की। प्रधान चिकित्सा अधिकारी डॉ. लोकवीर व एसएमओ डॉ. गोपाल गोयल ने जन्म प्रमाणपत्र रजिस्ट्रार के छुट्टी पर होने के बावजूद मुहर लगाने के मामले को गंभीरता से लेते हुए इसकी जांच के आदेश दे दिए हैं।
बिटानी निवासी अमित की शिकायत उनके पास आई है। शिकायत के आधार पर जांच की जाएगी। इसमें सबसे अहम बात यह है कि या तो आधार केंद्र संचालक के पास रजिस्ट्रार की मुहर है, जोकि उसने फर्जी बनवाई हुई होगी या फिर अस्पताल के कर्मचारियों की मिलीभगत से वह मुहर लगवा रहा है। कहीं न कहीं तो इसमें गड़बड़ी जरूर है। इस मामले में जो भी आरोपी मिलेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. लोकवीर, पीएमओ।
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युवक का आरोप है कि जो लोग आधार केंद्र संचालक को मौके पर ही 300 रुपये दे देते हैं उनको तुरंत बच्चे का जन्म प्रमाणपत्र बनाकर दे दिया जाता है, जबकि अन्य लोगों को 40 दिन का समय दिया जाता है।
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गांव बिटानी निवासी अमित ने कहा कि वह दो दिन पहले अपने बच्चे का जन्म प्रमाणपत्र लेने के लिए नागरिक अस्पताल के कमरा नंबर 104 में आया था। यहां कर्मचारियों ने उसे नागरिक अस्पताल में ही स्थित आधार केंद्र पर भेज दिया। आधार केंद्र पर काम कर रहे युवक ने उससे कहा कि यदि उसे तुरंत जन्म प्रमाणपत्र चाहिए तो 300 रुपये देने होंगे, नहीं तो उसके बच्चे का जन्म प्रमाणपत्र 40 दिन बाद मिलेगा। इसके बाद अमित चला गया। सोमवार को अमित नागरिक अस्पताल पहुंचा और आधार केंद्र पर काम करने वाले युवक को 300 रुपये दे दिए। इसके बाद आधार सेंटर संचालक ने जन्म प्रमाणपत्र का प्रिंट निकाला और कमरा नंबर 104 में जाकर जन्म प्रमाणपत्र रजिस्ट्रार की मुहर लगवाकर तुरंत ले आया।
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अमित ने कहा कि उसे संदेह हुआ कि कहीं यह मुहर नकली तो नहीं। इसके बाद उसने इसकी शिकायत प्रधान चिकित्सा अधिकारी से की। प्रधान चिकित्सा अधिकारी डॉ. लोकवीर व एसएमओ डॉ. गोपाल गोयल ने जन्म प्रमाणपत्र रजिस्ट्रार के छुट्टी पर होने के बावजूद मुहर लगाने के मामले को गंभीरता से लेते हुए इसकी जांच के आदेश दे दिए हैं।
बिटानी निवासी अमित की शिकायत उनके पास आई है। शिकायत के आधार पर जांच की जाएगी। इसमें सबसे अहम बात यह है कि या तो आधार केंद्र संचालक के पास रजिस्ट्रार की मुहर है, जोकि उसने फर्जी बनवाई हुई होगी या फिर अस्पताल के कर्मचारियों की मिलीभगत से वह मुहर लगवा रहा है। कहीं न कहीं तो इसमें गड़बड़ी जरूर है। इस मामले में जो भी आरोपी मिलेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. लोकवीर, पीएमओ।