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मानसिक रुप से कमजोर बच्चों को मुख्य धारा में लाने वाले खुद मानसिक रुप से कमजोर

Wed, 04 Apr 2018 12:48 AM IST
Updated Wed, 04 Apr 2018 12:48 AM IST
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मानसिक रुप से कमजोर बच्चों को मुख्य धारा में लाने वाले खुद मानसिक रुप से कमजोर
सतीश जागलान
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जींद। बाल शोषण, अनाथ, गुम हुए, घर से भागे, बाल मजदूरी और मानसिक रुप से कमजोर बच्चों की काउंसिलिंग करके उनको मुख्य धारा में लाने का जिम्मा जिस महिला एवं बाल विकास विभाग पर है, उसकी बाल कल्याण समिति के सदस्य खुद मानसिक रुप से कमजोर होने के कारण बता इस्तीफा दे दिया । सदस्य के इस्तीफा देने के कारण बैठक का कोरम पूरा नहीं होगा, जिस कारण समिति द्वारा लिया गया कोई भी फैसला अपने अंजाम तक नहीं पहुंच सकेगा। जब तक नए सदस्यों की नियुक्ति नहीं हो जाती, तब तक बच्चों के प्रोटेक्शन से संबंधित कार्य अधूरे ही रहेंगे।
महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला बाल संरक्षण यूनिट बच्चों से संबंधित कार्य करती है। इसमें बाल शोषण (शारीरिक, मानसिक, सामाजिक), अनाथ, गुम हुए या घर से भागे बच्चों की शिक्षा व सुरक्षा, बेसहारा व अनाथ बच्चों को आश्रम देना, अनाथ आश्रम में रह रहे बच्चों की देखभाल, बाल मजदूरी को रोकना, बाल अपराधियों को पुनर्वास, बाल अपराधों के लिए जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण की तरफ से कानूनी सहायता, दंपति को बच्चा गोद लेना है या उसे बच्चा गोद दिलाना, जिला स्तर, खंड स्तर व ग्राम स्तर पर चाइल्ड प्रोटेक्शन कमेटी का गठन, बच्चों पर घर या स्कूल में किसी प्रकार के हो रहे शोषण को रोकना, शोषित बच्चों की काउंसिलिंग, नवजात शिशुओं के लिए क्रेडल बेबी रिसेप्शन सेंटर, विभिन्न विभागों से तालमेल कर बच्चों की सुरक्षा करना, लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, पोक्सो के तहत पंजीकृत केसों को मानसिक, सामाजिक व कानूनी सहायता, पोक्सो केस से पीड़ितों को पढ़ाई छूट जाने के बाद पढ़ाई शुरू करानी व सशक्त जीवन जीने में पूर्ण सहयोग करना शामिल है। इस यूनिट में काम करने वाले सदस्य राजेश भारद्वाज ने अनियमित भुगतान, आर्थिक, मानसिक व शारीरिक परेशानी को कारण बताते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया। भारद्वाज के इस्तीफे में मानसिक रूप से परेशान होने की बात लिखी है। इससे साफ है कि इस यूनिट में काम करने वाले लोग यदि खुद मानसिक रुप से परेशान हैं तो वे बच्चों की मानसिक परेशानी को कैसे दूर कर सकते हैं।
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कैसे होती है सदस्यों की नियुक्ति
बाल कल्याण समिति सदस्यों की नियुक्ति महिला एवं बाल विकास विभाग पंचकूला करता है। जींद में एक चेयरमैन व चार सदस्यों के पद हैं। इनमें से फिलहाल एक चेयरमैन व एक सदस्य बचा है। इन सदस्यों को प्रति बैठक एक हजार रुपये का मानदेय मिलता है। यह समिति ही इस विभाग के अंतिम फैसले लेती है। बच्चों की काउंसिलिंग से लेकर उनको गोद देने, लेने व बच्चों की सुरक्षा से संबंधित सभी फैसले यह समिति लेती है।
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बाल कल्याण समिति में एक चेयरमैन व चार सदस्य होते हैं। अब फिलहाल एक चेयरमैन व एक सदस्य है। एक सदस्य के इस्तीफा देने से बैठक का कोरम पूरा नहीं होगा। इससे विभाग व समिति द्वारा लिए जाने वाले फैसले प्रभावित होंगे बाकी कार्य निरंतर चलते रहेंगे।

सुजाता, जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी।

समिति सदस्य राजेश भारद्वाज ने इस्तीफा दे दिया है। इससे समिति के काफी कार्य प्रभावित होंगे। बैठक का कोरम पूरा करने के लिए दो सदस्यों व एक चेयरमैन का होना जरूरी है। महिला एवं बाल विकास विभाग पंचकूला को नए सदस्यों की नियुक्ति करने के लिए लिखा गया है।
सोम कुमार, चेयरमैन बाल कल्याण समिति
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